भाजपा के नए प्रमुख के सामने चुनौतियां कम नहीं

भोपाल (महामीडिया) बीजेपी के वरिष्ठ नेता जगत प्रकाश नड्डा ने 20 जनवरी को अमित शाह की जगह पार्टी अध्यक्ष का पदभार संभाला है। नड्डा का कद बहुत कम समय में ही बहुत बड़ा हो गया है। उन्हें लगभग सात महीने पहले ही कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में नियुक्त किया गया था। भाजपा की सर्वसम्मति के साथ और किसी भी प्रतियोगिता के बिना अपना अध्यक्ष का चुनाव करने की परंपरा है। भाजपा के संगठन में दशकों का अनुभव रखने वाले नड्डा को लंबे समय से पार्टी की शीर्ष भूमिका के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह की पसंद के रूप में देखा जाता रहा है।
मृदुभाषी, सरल, फिर भी दृढ़, हिमाचल प्रदेश के 59 वर्षीय भाजपा नेता नड्डा एक ऐसे व्यक्ति हैं, जिन्हें आम तौर पर लो प्रोफाइल रहने के लिए जाना जाता है। लेकिन उनके इस नरम आवरण के पीछे, नड्डा का एक हिम्मती और दृढसंकल्पित व्यक्तित्व छिपा हुआ है। संगठन की विचारधारा के प्रति उनकी असीम प्रतिबद्धता और संगठनात्मक कौशल के गुणों ने ही उनके उत्थान को सुनिश्चित किया है । नड्डा के पास हिमाचल प्रदेश से लॉ की डिग्री है। यह उत्तरी पहाड़ी राज्य है, जहां से नड्डा ने 1993 में बिलासपुर सीट से राज्य विधानसभा के लिए चुनावी शुरुआत की थी। उन्होंने इस सीट से कई बार जीत हासिल की और उसके बाद वन, पर्यावरण, विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री बने।
नड्डा का पार्टी के शीर्ष पद पर निर्विरोध निर्वाचन, प्रधानमंत्री, गृह मंत्री और पार्टी के अन्य शीर्ष पदाधिकारियों का उन पर किये गए असीम विश्वास को भी दर्शाता है। इसके अलावा, उनका चयन निश्चित रूप से अमित शाह के भार को कम करेगा,  जो अब अपनी पूरी ऊर्जा से गृह मंत्रालय के कार्य के लिए समर्पित हो सकते हैं। हालांकि, आने वाले समय में नड्डा को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा। नड्डा को पहले उन सभी को मजबूत करना है जो भाजपा ने नई चुनौतियों का सामना करते हुए हासिल किया है, जिसमें राज्यों में भाजपा के खिलाफ सत्ता-विरोधी लहर भी शामिल है।
पार्टी झारखंड हार गई, महाराष्ट्र में भी सरकार बनाने में असमर्थ रही और बस हरियाणा में ही वह अपनी जीत को दोहरा पायी। पार्टी के आक्रामक रुख से असहज कई भाजपा के सहयोगियों को एकजुट रखना भी एक समस्या है, खासकर सीएए और एनआरसी जैसे विवादास्पद मुद्दों पर। एक महत्वपूर्ण सवाल यह है कि क्या नड्डा बीजेपी की छवि को नरम करने की कोशिश करेंगे और सहयोगी दलों के साथ बेहतर काम कर पाएंगे? क्या नड्डा पार्टी के राज्य स्तर पर सामने आए बदलावों को पलट पाएंगे? सबसे महत्वपूर्ण बात, उन्हें आने वाले दिल्ली विधानसभा चुनाव के लिए एक अभियान का प्रबंधन करना होगा। एक महत्वपूर्ण सवाल यह है कि क्या नड्डा बीजेपी की छवि को नरम करना चाहते हैं और सहयोगी दलों के साथ बेहतर कार्य संबंध हासिल करेंगे। यह देखना होगा की क्या वह स्वतंत्र रूप से कार्य करेंगे या हकीकत में अमित शाह ही पार्टी के अध्यक्ष के रूप में अपना कार्य जारी रखेंगे ।
 

- प्रभाकर पुरंदरे

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