महर्षि विद्यामंदिर स्कूल संस्कारों के केंद्रः विभांशु जोशी

महर्षि विद्यामंदिर स्कूल संस्कारों के केंद्रः विभांशु जोशी


भोपाल (महामीडिया) आज समन्वय भवन भोपाल में महर्षि विद्यामंदिर त्रिलंगा का वार्षिकोत्सव दिवस समारोह संपन्न हुआ। इस अवसर पर मोटीवेशनल स्पीकर, एडव्होकेट एवं लेखक विभांशु जोशी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे। 
मुख्य अतिथि विभांशु जोशी ने वार्षिकोत्सव समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि महर्षि विद्यामंदिर स्कूल संस्कारों के केंद्र बन चुके है। जिसमें अन्य स्कूलों की अपेक्षा भारतीय संस्कृति एवं भावातीत ध्यान का नियमित अभ्यास कराया जाता है। आज राष्ट्रीय बालिका दिवस है इसलिए यह दिन बेटियों के नाम समर्पित है। हमें बच्चों की प्रतिभा का आकलन करना चाहिए, बच्चों से संवाद करना चाहिए और खासकर महर्षि विद्यामंदिर स्कूल के अभिभावकों को इस बात का गर्व होना चाहिए कि आपका बच्चा एक बढ़िया एवं संस्कारित स्कूल में पड़ता है। जहां घर से स्कूल जाने पर प्रसंन्नता एवं स्कूल से घर जाने पर प्रसंन्नता आती है। 
सर्वप्रथम गणेश वंदना की प्रस्तुति हुई इसके बाद बच्चों ने स्वागत गीत प्रस्तुत किया। मां सरस्वती शारदे के बोल पर सामूहिक सरस्वती वंदना की शानदार प्रस्तुति से श्रोताओं का मन मोह लिया। मेरे तो गिरधर गोपाल दूसरा न कोई... के बोल पर कृष्ण भक्ति युक्त नाटक की प्रस्तुति दी गई जिसमें मीरा का भगवान कृष्ण के प्रति आगाध प्रेम को दर्शाया गया था। इसके पश्चात मीरा के प्रभु गिरधर नागर सामूहिक गान की प्रस्तुति हुई।  छोटे-छोटे बच्चों ने स्वच्छ भारत का इरादा कर लिया हमने की थीम पर शानदार प्रस्तुति दी और स्वच्छ भारत पर प्रेरक सामूहिक नृत्य प्रस्तुत किया। 
इस अवसर पर अतिथि के रूप में उपस्थित महर्षि विद्यामंदिर विद्यालय समूह के निदेशक संचार एवं जनसंपर्क व्ही.आर. खरे ने कहा कि जोशी जी की बालसुलभ कार्य प्रणाली एवं व्यक्तित्व ने हमें बहुत प्रभावित किया। जैसा कि जोशी जी ने कहा है आप सदैव बच्चों से संवाद करें तो हम अपने स्कूलों में निरतर इसे लागू करें। हमारे स्कूलों का ध्येय वाक्य है माता-पिता हमें एक अबोध बालक दें हम आपको एक उत्कृष्ट नागरिक देंगे। उन्होंने अभिभावकों से कहा कि मन को शांत रखना बहुत आवश्यक है और इसके लिए हमें भावातीय ध्यान करना चाहिए। जिससे काम में मन लगेगा एवं सकारात्मकता में वृद्धि होगी । महर्षि जी कहा करते थे जीवन संघर्ष नहीं है, केवल आनंद है। अतएव आप सभी अभिभावक जो भी भावातीय ध्यान सीखना चाहते है उनकी व्यवस्था स्कूलों में की जाएगी।
इस अवसर पर महर्षि शिक्षा संस्थान की उपनिदेशक श्रीमति आर्यानंद कुमार ने कहा कि अधिक से अधिक अभिभावक महर्षि विद्यामंदिर के स्कूलों में अपने बच्चों को प्रवेश दिलाएं ताकि उनके बच्चों को भारतीय संस्कृति, संस्कार एवं भावातीत ध्यान का लाभ मिल सके। इसके पश्चात महर्षि विद्या मंदिर एवं महर्षि किड्सहोम की समन्वयक श्रीमति रीता प्रकाशम ने वार्षिक उत्सव के दौरान बच्चों द्वारा एक से बढ़कर एक प्रस्तुति के लिए महर्षि विद्यामंदिर त्रिलंगा के प्राचार्य एवं शिक्षकों  की सराहना की। 
कार्यक्रम के अंत में महर्षि विद्यामंदिर त्रिलंगा की प्राचार्या निधि सक्सेना मेडम ने वार्षिक सांस्कृतिक दिवस समारोह में समस्त उपस्थित अतिथियों, अभिभावकों एवं उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले समस्त बच्चों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि हमारे विद्यालय में प्रतिदिन भावातीत ध्यान कराने से पढ़ाई में बच्चों का मन लगता है एवं वह एकाग्र चिंत होकर अध्ययन एवं अन्य समस्त कार्यक्रमों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते है। जैसा कि आप सभी लोगों ने आज देखा। यह परमपूज्य महर्षि महेश योगी जी द्वारा दी गई भावातीत ध्यान की शिक्षा का ही परिणाम है। 

सम्बंधित ख़बरें