विश्व प्रसिद्ध मैसूरु का दशहरा

विश्व प्रसिद्ध मैसूरु का दशहरा

नई दिल्ली (महामीडिया) कर्नाटक में दशहरा को राजकीय उत्सव का सम्मान मिला हुआ है। यहां पर 10 दिन तक दशहरा मनाया जाता है। इस दौरान सबसे खास होती है जम्बो सवारी और टॉर्च लाइट परेड। इसमें 21 तोपों की सलामी के साथ महल से हाथियों का जुलूस निकाला जाता है। इसमें एक ऐसा हाथी भी शामिल होता है, जिसे खास तरह से सजाया जाता है। इस हाथी पर 750 किलो सोने का एक सिंहासन रखा जाता है। इस पर देवी चामुंडेश्वरी की प्रतिमा रखी जाती है।
हर साल 750 किलो के सोने के सिंहासन पर मां चामुंडेश्वरी की प्रतिमा को लेकर हाथियों का काफिला मैसूरु के शाही राज महल से शहर में निकलता है, तो इसे देखने के लिए लाखों की भीड़ जमा होती है। अलग-अलग जिलों की झांकियां निकाली जाती है, लोक-कलाकार शोभा यात्रा में शामिल होते हैं।
इस बार कोरोना के चलते मां चामुंडेश्वरी की सवारी तो निकलेगी, लेकिन सिर्फ 300 लोग ही शामिल होंगे। इसके पहले करीब 10 लाख लोग शामिल होते थे। साथ ही इस बार कोई भी झांकी नहीं होगी और न ही लोक कलाकार अपनी कला का प्रदर्शन करते दिखेंगे।
मैसूरु में दशहरे के दौरान सबसे विशेष होती है जम्बो सवारी। जिसमें राज महल से हाथियों का जुलूस निकाला जाता है। यह मैसूरु की लगभग हर गली से होकर गुजरता है।
मान्यता है कि मैसूरु दशहरे की शुरुआत 15 वीं शताब्दी में विजयनगर के शासकों ने की थी। लेकिन, इतिहास के पन्नों को पलटें, तो पता चलता है कि दशहरा उत्सव को भव्यता वाडयार शासनकाल में दी गई थी। वाडयार राजाओं ने तकरीबन 150 साल तक कर्नाटक पर राज किया था और मैसूरु को अपनी राजधानी बनाया, इसी दौरान मैसूरु दशहरा उत्सव को राजकीय उत्सव के रूप में मनाने का फैसला किया गया। आजादी के बाद भी राज्य सरकार ने इसे राजकीय उत्सव के रूप में मनाने जाने का क्रम जारी रखा।
 

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