महर्षि संस्थान का कोई भी व्यक्ति कोरोना से प्रभावित नहीं: ब्रह्मचारी गिरीश जी

महर्षि संस्थान का कोई भी व्यक्ति कोरोना से प्रभावित नहीं: ब्रह्मचारी गिरीश जी

भोपाल (महामीडिया) महान चेतना वैज्ञानिक महर्षि महेश योगी द्वारा प्रणीत भावातीत ध्यान की महत्ता का विश्वव्यापी असर है कि महर्षि संस्था से जुड़े दो लाख से अधिक लोगों को कोरोना विपत्ति का दंश नहीं झेलना पड़ा। पिछले तीन-चार महीने में भावातीत ध्यान वाले किसी भी एक साधक को कोई संक्रमण नहीं हुआ। इससे यह सिद्ध होता है कि दुनिया में कोरोना की सबसे प्रभावशाली वैक्सीन भावातीत ध्यान है। यह बात महर्षि संस्थान के प्रमुख ब्रह्मचारी गिरीश जी ने आज गुरूपूर्णिमा महोत्सव के अवसर पर बेबीनार के माध्यम से दो लाख से अधिक लोगों को संबोधित करते हुए कहीं। 
महर्षि संस्थान में गुरूपूर्णिमा महोत्सव वैदिक पाठपूजा और वैदिक पंण्डितों के मंत्रोच्चार के साथ प्रातः 10:30 बजे आरंभ हुआ। तत्पश्चात् ब्रह्मचारी गिरीश जी ने अपनी संस्था की सभी उलब्धियों को गुरू ब्रह्मनंद सरस्वती महाराज जी और परमपूज्यनीय महर्षि महेश योगी जी के श्री कमल चरणों में समर्पित किया । इसके बाद उनके संबोधन को देश भर में 160 से अधिक स्कूलों के एक लाख से ज्यादा छात्र-छात्राएं, उनके अभिभावक, शिक्षकगण और विभिन्न संस्था के सैकड़ों कर्मचारियों-अधिकारियों ने बेबीनार और रामराज टीवी के लाइव प्रसारण के साथ देखा और सुना। 
महर्षि संस्थान द्वारा भारत के ब्रह्मस्थान करौंदी में नौ हजार स्थाई शांति साधकों का समूह स्थापित किया जाने के लिए आज गुरूपूर्णिमा के अवसर पर अधिक से अधिक लोगों को जोड़ने का आह्वान एवं संकल्प महर्षि विद्यामंदिर विद्यालय समूह के अध्यक्ष एवं महर्षि महेश योगी वैदिक विश्वविद्यालय के कुलाधिपति ब्रह्मचारी गिरीश जी ने किया। 
इस अवसर पर ब्रह्मचारी गिरीश जी ने कहा कि आज पूरे भारत में एक लाख घरों, स्कूलों, कालेजों, विश्वविद्यालयों एवं महर्षि संस्थानों में एक साथ गुरूपूजन हो रहा है। हमें यह शक्ति अपने गुरू ब्रह्मलीन ब्रह्मनंद सरस्वती महाराज एवं महर्षि महेश योगी जी द्वारा मिली है कि जो पूरी दुनिया में नकारात्मकता फैली हुई है वह सकारात्मकता में परिवर्तित हो जायेगी। हमारे गुरू का नाम ब्रह्मनंद है अर्थात ब्रह्म का आनंद है, अर्थात ब्रह्म का ज्ञान। यही हमारे जीवन का संचालक है। वैदिक ज्ञान की परंपरा हम लोगों को शांति, प्रबुद्द, सार्मथ्य, बनाये रखने की शक्ति प्रदान करते है। महर्षि जी कहा करते थे कि हम जो अपने आस-पास प्राप्त करते हैं वह चेतना का ही एक प्राकट्य स्वरूप है। इसे हमें भावातीत चेतना ‘यूनीफाईड फील्ड’ अनंताकाश बोलते हैं। हम सभी लोगों को चेतना का ज्ञान मिल गया है। इसमें भावातीत ध्यान सर्वाधिक महत्वपूर्ण है। ब्रह्मचारी गिरीश जी ने बताया कि भावातीत ध्यान की उपलब्धि हमें पिछले तीन-चार महीनों में कोरोना काल जैसी महामारी के दौरान देखने को मिली। जब हमने पाया कि विश्वभर में भावातीत ध्यान करने वाले एक भी व्यक्ति को कोरोना का संक्रमण नहीं हुआ। इस प्रकार हम कह सकते है कि, भावातीत ध्यान एक प्रकार से कोरोना से बचाव के लिए सबसे अच्छा वैक्सीन है। ब्रह्मचारी गिरीश जी ने आगे कहा कि, जब हम सिद्धि कार्यक्रम का अंतिम सूत्र लगाते हैं तो कर्म फलीभूत होता है और हमें मनचाहा फल मिलता है। यह एक समर्थ विद्या है जिसमें पूर्ण में से पूर्ण निकालने से पूर्ण ही बचता है महर्षि जी का सदैव कहना था कि समुद्र में से समुद्र निकाल दोगे तो समुद्र ही बचेगा। ज्ञान शक्ति से ही क्रिया शक्ति है। यह सब कुछ ब्रह्मनंद सरस्वती जी महाराज की कृपा से प्राप्त हुआ है और इस परंपरा को महर्षि महेश योगी जी ने अक्षुण्य रखा है। चेतना में स्थित होकर कार्य करने से सारी उपलब्धियां सहज हो जाती है और मन शांत हो जाता है। यही शांत मन सभी शारीरिक व्याधियों का निदान है। सभी रोगों के उपचार की एकमात्र वैक्सीन है। 
गुरूपूर्णिमा कार्यक्रम की शुरूआत सर्वप्रथम महर्षि संस्थान की परंपरा अनुसार गुरूपूजन से प्रारंभ हुआ। इसके पश्चात् ब्रह्मचारी गिरीश जी ने भारत के ब्रह्मस्थान करौंदी में नौ हजार स्थाई शांति साधकों की स्थापना का संकल्प लिया। इसके पश्चात् महर्षि विद्या मंदिर के पूरे देश के 160 विद्यालयों, चार प्रबंधन संस्थान, दो निजी विश्वविद्यालय , महर्षि नर्सरी, महर्षि खादी, महर्षि आनंद निकेतन, महर्षि नेशनल ओलंपियाड की वर्ष भर की उपलब्धियों को गुरू चरणों में समर्पित किया एवं नये वर्ष के संकल्पों के लिए उनसे आर्शीवाद मांगा। इस अवसर पर नीदरलैंड से राजा हैरिस ने भी बेबीनार के माध्यम से संबोधित करते हुए अपनी बात रखी। इस अवसर पर महर्षि महेश योगी वैदिक विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. भुवनेश शर्मा, महर्षि विद्या मंदिर विद्यालय समूह के कार्यकारी निदेशक प्रकाश जोशी, महर्षि विद्या मंदिर विद्यालय समूह के निदेशक संचार एवं जनसंपर्क व्ही. आर. खरे की आनलाइन उपस्थिति उल्लेखनीय थी।
 

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