महामीडिया न्यूज सर्विस
अनंत अक्षय का प्रतीक है अक्षय तृतीया

अनंत अक्षय का प्रतीक है अक्षय तृतीया

Admin Chandel | पोस्ट किया गया 584 दिन 7 घंटे पूर्व
17/04/2018
भोपाल (महामीडिया) वैसाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि में जब सूर्य और चन्द्रमा अपने उच्च प्रभाव में होते हैं, और जब उनका तेज सर्वोच्च होता है, उस तिथि को हिन्दू पंचांग के अनुसार अत्यंत शुभ माना जाता है और इस शुभ तिथि को कहा जाता है अक्षय तृतीया अथवा आखा तीज| अक्षय तृतीया को अनंत-अक्षय-अक्षुण्ण फलदायक कहा जाता है। जो कभी क्षय नहीं होती उसे अक्षय कहते हैं। कहते हैं कि इस दिन जिनका परिणय-संस्कार होता है उनका सौभाग्य अखंड रहता है। इस दिन महालक्ष्मी की प्रसन्नता के लिए भी विशेष अनुष्ठान होता है जिससे अक्षय पुण्य मिलता है। इस दिन जो भी शुभ कार्य किये जाते हैं, उनका सुखद परिणाम मिलता है| पारंपरिक रूप से यह तिथि भगवान विष्णु के छठे अवतार श्री परशुराम की जन्मतिथि होती है| इस तिथि के साथ पुराणों की अहम वृत्तांत जुड़े हुए है। राजस्थान इस दिन होम, जप, तप, दान, स्नान आदि किए जाते है। इस दिन प्रत्येक घर में नया धान आ जाता है । अतः उसका स्वागत करते गेहूं, चना, तिल, जौ, बाजरी, मूंग और मोंठ आदि सात खाद्यानों की पूजा करके शीघ्र वर्षा हेतु प्रार्थना की जाती है कि आगामी वर्ष भी अच्छी फसल वाला हो। गांव गांव में मेले लगते हैं। स्त्रियां मंगलाचरण गाती हैं और छोटे बच्चे वर वधू के स्वांग रचते हैं। शाम को लोग हवा का रुख देख कर शकुन लेते हैं। अतिथियों की अफीम, गुड़ आदि से मनुहार करते हैं । विभिन्न अनाजों से बने सत्तू का भी प्रयोग किया जाता है। इस अवसर पर सीरा, लापसी, मूंग और चावल की खीचड़ी, बाजरे का खीच व गुड़ की गलवानी बनाते हैं। लड़के व नवयुवक पतंग उड़ाते हैं । इस दिन विवाह हेतु बिना देखा अबूझ मुहूत्र्त होता है । कृषक वर्ग अपनी संतान का ज्यादातर विवाह इसी दिन करते हैं। सारे गांव के लोग अपने पुराने बैर-भाव को भुलाकर एक साथ भोजन करते हैं।
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