महामीडिया न्यूज सर्विस
"प्रत्येक मनुष्य ब्रह्म है, दलित कोई नहीं" - ब्रह्मचारी गिरीश जी

"प्रत्येक मनुष्य ब्रह्म है, दलित कोई नहीं" - ब्रह्मचारी गिरीश जी

admin | पोस्ट किया गया 532 दिन 16 घंटे पूर्व
08/05/2018
भोपाल (महामीडिया) दिनांक 7.5.16. उज्जैन। महर्षि महेश योगी शिविर में ब्रह्मचारी गिरीश जी ने कहा कि "जो मानव शरीर लेकर जन्मा है वह ब्रह्म है, दलित कोई नहीं है, निहित सवार्थों के चलते ब्रह्म को दलित बताया जा रहा है। भगवान श्रीकृष्ण ने गीता में स्वयं कहा है कि चारों वर्ण उन्हीं की सृष्टि हैं जो गुण और कार्याें के अनुसार हैं। किसी भी मनुष्य या जाति को दलित कहना उचित नहीं है। प्रत्येक मनुष्य के जीवन का आधार उसकी चेतना है, उसकी आत्मा है। सर्वोच्च और श्रेष्ठतम कार्यों के आधार पर व्यक्ति ऊचाँ उठता है और कोई निम्न कार्यों के कारण वह एक बुरा या छोटा व्यक्ति कहलाता है। चेतना की उच्च अवस्था प्राप्त व्यक्ति श्रेष्ठ कहलाता है और बाकी उसका अनुसरण करते हैं।" उन्होंने कहा कि "राजनीतिक कारणों और स्वार्थ ने अच्छे खासे मनुष्य को दलित की संज्ञा दे दी है। उनके उत्थान के कार्यक्रमों का पूर्ण लाभ उन तक नहीं पहुँच पा रहा है। सरकारें भी यह स्वीकार करती हैं। वास्तव में किसी को दलित कहना पाप-कर्म माना जाना चाहिए। 
महर्षि महेश योगी जी ने सारे विश्व के सभी धर्मों, विश्वास, आस्था, संप्रदाय, जाति और आयु के नागरिकों को भावातीत ध्यान और उसके उन्नत तकनीक सिखाकर चेतना की उच्चावस्था का अनुभव कराया। संतों का यही आशीर्वाद तो प्रत्येक व्यक्ति को ब्रह्म बनाता है जबकि साधारण मनुष्य ब्रह्म को दलित बना देते हैं।"
ब्रह्मचारी जी ने भगवान महाकालेश्वर की धरती में आयोजित हो रहे सिंहस्थ महाकुंभ में पधारे सभी साधु-संतों से निवेदन किया कि वे ब्रह्म को दलित बनाए जाने की कुत्सित चालों को अपने ज्ञान और आशीर्वाद से नाकाम कर दें। भविष्य में कोई व्यक्ति दलित कहलाकर अपने को छोटा, निर्धन, दीन-हीन ना समझें। समाज में सब ब्रह्मत्व को प्राप्त करें। सिंहस्थ कुंभ की मानवता को यह ऐतिहासिक देन होगी। 
आज प्रातः बड़ी संख्या में श्रद्धालुगण आज हवनात्मक अतिरूद्रभिषेक में 151 वैदिक पंडितों द्वारा किए जा रहे पूजन तथा हवन में सम्मिलित होकर प्रसन्न हो गए। अपरान्ह में श्रीराम कथा में आज संत शिरोमणी श्री श्री 1008 श्री राम जी बाबा ?कोकिल? द्वारा आज श्री राम के वनवास जाते समय केवटराज निषाद द्वारा गंगा पार-उतराई, उनके वन में रहते हुए राक्षसों का संहार कर साधु-संतों को राक्षसों के कष्ट से मुक्ति दिलाने तथा भरत जी द्वारा भगवान श्रीराम से मिलन व अंत में उनकी खड़ाऊं ले जाने के मार्मिक प्रसंग का संगीतमय वाचन किया गया। सायं ख्याति प्राप्त भजन गायक पंडित लक्ष्मीकांत काण्डपाल जी ने श्री रामचरित मानस से अयोध्याकाण्ड की संगीतमय प्रस्तुति दी। इसके अंतर्गत माता कैकेयी द्वारा महाराज दशरथ से मांगे गए दो वचनों के अंतर्गत भरत जी को राज सिंहासन तथा भगवान श्रीराम को चौदह वर्ष के वनवास दिये जाने कथा का वर्णन किया गया जिसे सुनकर सभी श्रद्धालुगण भावुक हो गए। 
परम् पूज्य महर्षि महेश योगी जी के द्वारा प्रणीत भावातीत ध्यान तथा वेद के 40 क्षेत्रों पर आधारित प्रदर्शनी गणमान्य नागरिकों को काफी लुभा रही हैं । www.ramrajtv.com रामराजटीवी डाॅट काॅम आॅनलाइन पर श्रीराम कथा प्रवाह का सीधा प्रसारण किया जा रहा है। साथ ही प्रतिदिन प्रातः 12 बजे तक ज्योतिष, महर्षि स्वास्थ्य पद्धति, योगासन एवं भावातीत ध्यान पर परामर्श उपलब्ध है।
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