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भावातीत ध्यान और विश्राम के स्तर

भावातीत ध्यान और विश्राम के स्तर

Admin Chandel | पोस्ट किया गया 521 दिन 8 मिनट पूर्व
17/05/2018
भोपाल (महामीडिया) भावातीत ध्यान से साधक को स्वाभाविक रूप से स्वत: गहन विश्राम मिलता है यह अध्ययन डॉ. कीथ वालेस के प्रथम अध्ययन को पुष्ट करता है। इस अध्ययन में साधक की चयापचय गति (मेटाबोलिक रेट) निकालने के लिए साधक में आॅक्सीजन खपत की माप ध्यान पूर्व, ध्यान के समय तथा ध्यान के पश्चात् लिया गया। इन साधकों की औसत आयु 31 वर्ष थी और यह लोग लगभग 26 महीनों से नियमित रूप से ध्यान कर रहे थे। इन साधकों में ध्यान पर बैठने के ठीक 5 मिनिट बाद ही आॅक्सीजन खपत में 14.9 प्रतिशत की कमी देखी गई है।
भावातीत ध्यान के समय साधक के शरीर में आॅक्सीजन की कुल खपत में जो कमी आती है वह साधक को मिलने वाले विशिष्ट विश्रांति का सूचक है। इसके लिए साधक अपनी सांस को किसी विशेष युक्ति के द्वारा नियंत्रित नहीं करता। वह अपनी सांस को हटाता रोकता नहीं है। सारी क्रिया अत्यंत सरल एवं प्राकृतिक रूप से स्वत: होती है, बिना किसी प्रयास के शारीरिक कोशिकाओं में आॅक्सीजन की आवश्यकता घट जाती है।
आॅक्सीजन की खपत का माप लेकर चयापचय गति (मेटाबालिक रेट) निकालते हैं। भावातीत ध्यान के समय यह चयापचय गति बहुत घट जाती है। भावातीत ध्यान शैली पर वैज्ञानिक शोध अध्ययनों ने प्रदर्शित किया है कि इसमें औसत 16 प्रतिशत की गिरावट ध्यान के पहले 10 मिनिट में ही आ जाती है।
इसके अतिरिक्त महत्वपूर्ण बात तो यह है कि साधक के रक्त में आॅक्सीजन तथा कार्बन-डाई-आॅक्साइड के आंशिक दाब (पार्शियल प्रेशर) स्थाई बने रहते हैं। गहन निद्रा की तुलना में भावातीत ध्यान के समय चयापचय गति में जो कमी आती है वह कहीं अधिक होती है और अपेक्षाकृत बहुत कम समय लेती है।
संदर्भ- राबर्ट कीथ वालेस, हबर्ट बेंसन, आर्ची एफ. विल्सन, 'ए वेकफुल हाइपोमेटाबालिक फिजियोलाजिक स्टेट' अमेरिकन जर्नल आॅफ फिजियोलाजी 221, सं. 3 (यू.एस.ए. 1971) 795-799, राबर्ट कीथ वालेस एण्ड हबर्ट वेन्सन 'द फिजियोलाजी आॅफ मेडीटेशन' साइंटिफिक अमेरिकन 226 सं. 2, (यू.एस.ए.1971) 84-90
"चेतना की यात्रा कहां से कहां तक है? अव्यक्त से व्यक्त होते हुए अव्यक्त तक।"
द्वितीय अध्ययन: भावातीत ध्यान से साधक को स्वाभाविक रूप से स्वत: गहन विश्राम मिलता है यह अध्ययन डॉ. कीथ वालेस के प्रथम अध्ययन को पुष्ट करता है। इस अध्ययन में साधक की चयापचय गति (मेटाबोलिक रेट) निकालने के लिए साधक में आॅक्सीजन खपत की माप ध्यान पूर्व, ध्यान के समय तथा ध्यान के पश्चात् लिया गया। इन साधकों की औसत आयु 31 वर्ष थी और यह लोग लगभाग 26 महीनों से नियमित रूप से ध्यान कर रहे थे। इन साधकों में ध्यान पर बैठने के ठीक 5 मिनिट बाद ही आॅक्सीजन खपत में 14.9 प्रतिशत की कमी देखी गई है। 14 मिनिट ध्यान के पश्चात् यह बढ़कर 15.7 प्रतिशत हो गई। इन दोनों स्थितियों की तुलना एक दूसरे समूह (नियंत्रक समूह) के प्राप्त आंकड़ों से की गई जिसके सदस्य केवल आंख बंद करके विश्राम करते थे और ध्यान नहीं करते थे। सांख्य के दृष्टिकोण से प्राप्त निष्कर्ष अत्यंत महत्वपूर्ण हैं क्योंकि संभाविता का मान .001 से कम आता है (पी .001)।
संदर्भ- पाल डब्ल्यू कोरे. ऐयर वे कंडक्टेंस एण्ड आॅक्सीजन कनजम्पशन चेंजेज ड्यू टू दि ट्रांसेंडेंटल मेडीटेशन टेक्नीक यूनिवर्सिटी आॅफ कोलोरेडो मेडिकल सेंटर, डेनवर कोलोरेडो (यू.एस.ए)।
"ज्ञानयुग का विश्व प्रशासन की दिशा को प्रभावित कर रहा है। ज्ञानयुग के सूर्योदय के साथ ही मानव जीवन के उच्चतर मूल्यों को स्वाभाविक रूप से अपने आचरण में उतारने लगेंगे।"
ग्राह्यता :- (ग्रहण करने की प्रवृत्ति) भावातीत ध्यान से हमारे अंदर एक ऐसी भावना का विकास होता है जिससे अधिक से अधिक ज्ञान, शक्ति तथा संवेदन ग्रहण करने की क्षमता बढ़ती है।
इन क्षमताओं को हम वैज्ञानिक अनुसन्धान के परिणामों से समझने का प्रयत्न करेंगे। यह अध्ययन बतलायेगा कि शरीर वैज्ञानिक, मनोवैज्ञानिक, सामाजिक तथा वातावरण संबंधित परिवेशों से हम क्या ग्रहण कर सकते हैं तथा उनका हमारे सम्पूर्ण व्यक्तित्व पर क्या प्रभाव पड़ता है। प्रयोगों का विवरण निम्न प्रकार है-
शरीर वैज्ञानिक ग्राह्यता- 
1. आॅक्सीजन की खपत में आश्चर्यजनक कमी। 2. श्वांस की दर एवं विस्तार में स्वाभाविक परिवर्तन। 3. हृदय गति में प्राकृतिक परिवर्तन। 4. स्वसंचालित स्नायुमंडल के सन्तुलन में वृद्धि।
तृतीय अध्ययन: मात्र आराम से लेटने में जितना विश्राम मिलता है, उसकी तुलना में भावातीत ध्यान में मिलने वाला विश्राम कहीं अधिक गहन और उच्च स्तर का होता है। इस अध्ययन के निष्कर्ष इसके पूर्व डॉक्टर कीथ वालेस के अन्वेषण को पुष्ट करते हैं। इस अध्ययन में किशोरों का चयन किया गया जो पिछले 12 सप्ताह से नियमित रूप से भावातीत ध्यान कर रहे थे। तुलनात्मक अध्ययन के लिए एक और ऐसे ही समूह (नियंत्रक समूह) का चयन किया गया जो केवल चित्त लेटकर विश्राम करते थे ध्यान नहीं करते थे। नियंत्रक समूह के सदस्यों में आॅक्सीजन खपत में 3.5 प्रतिशत की कमी 15 मिनिट के विश्राम के बाद देखी गई। साधकों में यह कमी 15 मिनिट ध्यान के पश्चात् 15.5 प्रतिशत पाई गई जो साधारण विश्राम की तुलना में लगभग पांच गुनी है।
संदर्भ- वी. हुबर्ट धनराज और मोहन सिंह रिडक्शन इन मेटाबोलिकट डयूरिंग दि प्रैक्टिम आॅफ दि ट्रांसडेंटल मेडीटेशन टेक्नीक यूनिवर्सिटी आॅफ एलबर्टा, एडमाउन्टन, एलबर्टा, कनाडा।
अपराध, बीमारी, युद्ध इसलिए होते हैं क्योंकि संसार के नेतागण इन बीमारियों का इलाज करते हैं, इनके कारणों का नहीं। 
(महर्षि जी के उद्बोधनों पर आधारित)
(भावातीत ध्यान पर वैज्ञानिक अनुसंधान से साभार)
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