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धार्मिक कार्य करने का आध्यात्मिक मास होता है पुरुषोत्तम मास

धार्मिक कार्य करने का आध्यात्मिक मास होता है पुरुषोत्तम मास

admin | पोस्ट किया गया 523 दिन 13 घंटे पूर्व
17/05/2018
भोपाल (महामीडिया) हिन्दू पंचांगों में बारह मास होते हैं. यह सूर्य की संक्रांति और चन्द्रमा पर आधारित होते हैं. हर वर्ष सूर्य और चन्द्र मास में लगभग 11 दिनों का अंतर आ जाता है. तीन वर्ष में यह अंतर लगभग एक माह का हो जाता है इसलिए हर तीसरे वर्ष अधिक मास आ जाता है. इसको लोकाचार में मलमास भी कहा जाता है. यह 16 मई से 13 जून तक रहेगा. धार्मिक कार्यों का किसी भी अन्य माह में किए गए पूजा-पाठ से 10 गुना अधिक फल मिलता है. इस पूरे महीने में भगवान विष्णु की विशेष कृपा मिलती है. इसलिए इसे पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है. मलमास में कोई भी शुभ कार्य नहीं होता. यानी इस दौरान शादी, सगाई, लगन, गृह प्रवेश, नए घर का निर्माण आदि जैसे काम नहीं होते. यह आध्यात्मिक महीना है, इसलिए इसमें भौतिक जीवन से संबंधित कार्य करने की मनाही होती है. लेकिन जो काम पहले से ही तय है वह काम आप कर सकते हैं. इस महीने में उपवास, पूजा-पाठ, ध्यान, भजन, कीर्तन, मनन करना बहुत लाभकारी होता है. मान्यता यह भी है कि इस महीने में जो भी जातक यज्ञ- हवन, श्रीमद् देवीभागवत, श्री भागवत पुराण, श्री विष्णु पुराण, भविष्योत्तर पुराण आदि का श्रवण, पठन, मनन करता है, उसे विशेष फल की प्राप्ति होती है. इस महीने में भगवान विष्णु की पूजा करने और भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप करने से मनचाहा आशीर्वाद मिलता है और पापों का नाश होता है.
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