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बौद्ध और हिंदू संस्कृति के समन्वय का प्रतीक है नेपाल

बौद्ध और हिंदू संस्कृति के समन्वय का प्रतीक है नेपाल

admin | पोस्ट किया गया 487 दिन 15 घंटे पूर्व
20/05/2018
भोपाल (महामीडिया) यदि आप प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर नेपाल में गर्मियों के मौसम में जाते हैं तो आप अपनी छुट्टियों को अच्छे से इंजॉय कर सकते हैं। इसका कारण यह है कि नेपाल का उत्तरी भाग हिमालय से घिर हुआ है जिसके कारण वहां के वातावरण में ठंडक बनी रहती है।
पोखरा नेपाल में दूसरी सबसे ज्यादा घूमे जाने वाली जगह है। यह 827 मीटर ऊंचाई पर स्थित है और ट्रेकिंग और रैफ्टिंग के लिए भी प्रसिद्ध है। पोखरा धौलागिरी, मनासलू, माछापुछे, अन्नपूर्णा जैसा महत्वपूर्ण चोटियों और अन्य हिमालयी दृश्यों का आनंद प्रदान करता है। फेवा झील नेपाल की दूसरा सबसे बड़ा झील है जो पोखरा के आकर्षण का केंद्र है। उसका पूर्वी किनारा जो बैडैम या लेकसाइड के नाम से लोकप्रिय है। यह पर्यटकों के पसन्द का निवास स्थल है जहां अधिकतर होटल, रेस्तरां और हैंडिक्राफ्ट की दुकानें अवस्थित हैं। बेगनास और रूपा झील दोनों झील पोखरा से 15 किमी दूरी पर स्थित हैं और अपने चारों ओर स्वच्छ वातावरण के कारण पूर्णतया नैसर्गिक अनुभूति प्रदान करते हैं। नेपाल में आपको बौद्ध और हिन्दू संस्कृति का समन्वय देखने को मिलता है। पशुपतिनाथ मंदिर यूनेस्को विश्व सांस्कृतिक विरासत की सूची में नामांकित है। यह मंदिर बागपति नदी के किनारे स्थित है। हिन्दू लोगों के 8 मुख्य मंदिरों में से एक है यह मंदिर। यह भगवान शिव का मंदिर है और यह न सिर्फ धार्मिक स्थल है बल्कि यह एक पर्यटक स्थल के रूप में भी जाना जाता है। लुंबिनी गौतम बुद्ध की जन्म स्थली है। यह स्थान बौद्ध धर्म का प्रमुख स्थल है। भारत-नेपाल सीमा रुमिनोदेई गांव को ही लुंबिनी कहा जाता है। यह स्थान सम्राट अशोक के स्मारक स्तंभ के लिए भी जाना जाता है। यहां पर गौतम बुद्ध की मां माया देवी के नाम पर मायादेवी मंदिर भी है। देवघाट धाम काली गंडकी तथा त्रिशुली नदियों के संगम स्थल पर स्थित है। मुक्तिनाथ हिन्दू धर्म के वैष्णव संप्रदाय का प्रमुख स्थान माना जाता है। यहां पर मुक्तिनाथ शालिग्राम भगवान की उपासना की जाती है। इस क्षेत्र के बारे में ऐसी मान्यता है कि यहां पर आकर मुक्ति को प्राप्त किया जा सकता है। चांगुनारायण मंदिर को नेपाल का सबसे पुराना और प्राचीन मंदिर कहा जाता है। यह मंदिर 4 वीं शताब्दी में निर्मित किया गया था। 1702 ई. में इस मंदिर का दोबारा से निर्माण किया गया। यह मंदिर शिवपुरी की पहाड़ियों पर बना है। इस मंदिर में आपको विष्णु भगवान के अलावा शेषनाग की प्रतिमा देखने को मिलती है। भारतीयों को नेपाल जाने के लिए किसी वीजा की जरूरत नहीं होती। उन्हें वहां जाने के लिए एक फोटो पहचान पत्र जरूरी होता है जो पासपोर्ट भी हो सकता है और पासपोर्ट भी न हो तो मतदाता पहचान पत्र या अन्य किसी सरकारी फोटो पहचान पत्र से भी काम चलाया जा सकता है। 
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