महामीडिया न्यूज सर्विस
देश में भीषण गर्मी

देश में भीषण गर्मी

admin | पोस्ट किया गया 450 दिन 7 घंटे पूर्व
29/05/2018
भोपाल (महामीडिया) मध्यप्रदेश सहित संपूर्ण भारत में भीषण गर्मी का कहर जारी है। नौतपा प्रारंभ होने के चौथे दिन भी सूरज सुबह से ही आग उगल रहा है। कमोवेश संपूर्ण भारत में अपवाद राज्यों को छोड़ दें तो ऐसी विकट स्थिति का सामना करना पड़ रहा है। उत्तर भारत में यह स्थिति और भी भयावह है। संपूर्ण मध्यप्रदेश, राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, उत्तरप्रदेश लगातार गर्म हवाओं की चपेट में है। इस भीषण गर्मी के चलते उत्तर भारत के कई राज्यों में पीने के पानी की समस्या से दो-चार होना पड़ रहा है। लंबी दूरी तय करके पीने के पानी की व्यवस्था करना ग्रामीणों को अतिरिक्त श्रम के लिए बाध्य कर रहा है। आए दिन देश एवं प्रदेश से पानी की समस्या से जूझते आम नागरिकों की बदहाल दिनचर्या लगातार समाचार बन रही है। देश में भीषण गर्मी का यह कहर कई लोगों ने अपने संपूर्ण जीवन में पहली बार देखा है। गाहे-बगाहे आम नागरिकों के मुंह से यह सुनाई पड़ रहा है। नवतपा के दौरान जारी भीषण गर्मी से शहरी एवं ग्रामीण जीवन की दिनचर्या में गंभीर असर पड़ रहा है। बेहतर मानसून की प्रत्याशा में नौतपा में गर्मी का जारी रहना जरूरी है किन्तु गर्मी का स्वरूप इस स्तर का होगा इसका पूर्वानुमान मौसम विज्ञान के पास भी नहीं था, वरना एडवाइजरी जारी हो जाती और नहीं तो कुछ साधन संपन्न लोग बचाव के लिए कुछ जतन तो कर ही सकते थे। पर्यावरणविदों की अपनी चिंतायें हैं वह तो वर्षों से जलवायु परिवर्तन के भयावह खतरों से आम जनता को समय-समय पर आगाह करते रहे हैं लेकिन शायद ऐसे मुद्दों पर पढ़कर टाल देने की हमारी प्रवृत्ति ने ही ऐसे विस्फोटक वातावरण निर्मित कर दिये हैं। यदि हम समय रहते वर्षा जल संचयन की उन्नत प्रौद्योगिकियों का इस्तेमाल करते तो गर्मी में पीने के पानी की समस्या से निजात मिलने के साथ-साथ ऐसी भीषण गर्मी से बचाव किया जा सकता था। जंगलों की अंधाधुंध कटाई और पर्यावरण को पहुंचाये जा रहे नुकसान देश में भीषण गर्मी का सीधा कारक है इसका ज्ञान प्राथमिक एवं माध्यमिक स्तर के स्कूली शिक्षा में ही दे दिया जाता है किन्तु कितने लोग इस पर अमल करते हैं? यह कुछ गंभीर विषय हैं जिनको जीवन में उतारने के लिए हम देशों में कानून चाहते हैं किन्तु जब राज्य की अवधारणा व्यवस्था में नहीं थी तो हम सुखद जीवन क्यों जीते थे और कैसे जीते थे इस समाजशास्त्रीय विमर्श पर हमारा चिंतन लगभग मृतप्राय है और उसी का खामियाजा देश और व्यवस्था को उठाना पड़ रहा है। यदि एक व्यंग्यकार के नजरिए से देखा जाए तो कहा सकता है कि देश में राजनैतिक व्यवस्था की गर्मी का असर भीषण गर्मी के रूप में सामने है किन्तु इसका वैज्ञानिक पहलू यह नहीं है बल्कि हमें जिस दिनचर्या को अपनाना चाहिए हम उसे भूलकर मशीनी युग में जी रहे हैं। मसलन यदि घर में एसी या फ्रिज है तो हमें इसकी फ्रिक्र क्यों करनी चाहिए। इसी मूलवृत्ति ने हमें प्रकृति से दूर किया है और उसका खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। अमूमन पूरे देश में तापमान 45 डिग्री से अधिक बना हुआ है और नवतपा के दौरान मौसम का मिजाज नहीं बदलता तो इसके लगातार बने रहने के संकेत हैं। 
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