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विपक्ष की एकजुटता से हारी भाजपा

विपक्ष की एकजुटता से हारी भाजपा

Admin Chandel | पोस्ट किया गया 445 दिन 15 घंटे पूर्व
31/05/2018
भोपाल (महामीडिया) देश में उपचुनावों का परिणाम कोई करिश्माई परिणाम नहीं बल्कि सामान्य परिणाम रहा। विपक्ष के एकजुट होने से वोटों का वितरण रूका जिसका परिणाम विपक्ष की जीत के रूप में सामने आया। उत्तरप्रदेश के कैराना लोकसभा में जिस तरह विपक्ष ने भाजपा की घेराबंदी की थी उससे स्पष्ट हो चला था कि विपक्षी मतों का ध्रुवीकरण भाजपा को रोक देगा और वही हुआ। अजीत सिंह की परंपरागत सीट पर सपा एवं बसपा ने मिलकर मुस्लिम वोटों का बिखराव रोक दिया परिणामस्परूप् यह सीट रालोद के खाते में आ गिरी। यदि सपा प्रत्याशी ने ऐन वक्त पर रालोद के पक्ष में अपने उम्मीदवार को नहीं हटाया होता तो संभवतः जीत का सेहरा विपक्ष के नाम पर नहीं होता ठीक इसी तरह भंडारा-गोंदिया लोकसभा क्षेत्र में एनसीपी उम्मीदवार का जीतना लगभग तय था। यह प्रफुल्ल पटेल के प्रभाव वाली परंपरागत सीट है जिसमें भाजपा को अपने चार विधानसभा विशेषकर तुमसर आरएसएस का गढ़ वाला विधानसभा के कारण जीत मिलती थी किन्तु भाजपा सांसद के कांग्रेस में शामिल हो जाने एवं कुनबी बाहुल्य सीट में एनसीपी द्वारा कुनबी प्रत्याशी घोषित कर देने से यह बाजी मार ली थी। पालघर में शिवसेना, भाजपा एवं बहुजन अघाड़ी के बीच कांटे की टक्कर का अनुमान चुनावी विश्लेषकों के बीच कांटे की टक्कर का अनुमान चुनावी विश्लेषकों को पहले से ही था। शिवसेना एवं बहुजन अघाड़ी को समान वोट प्रतिशत के चलते सत्ताधारी भाजपा की जीत तय थी भले ही वह एक हजार मतों से ही हो। विधानसभा चुनावों में जो जीत विपक्ष को हासिल हुई है वह विपक्षी एकता एवं सूबे एवं सत्ता में भाजपा के अलग-थलग पड़ जाने के कारण हासिल हुई है। कर्नाटक का परिणाम प्रत्याशित था जबकि बिहार विधानसभा का चुनाव परिणाम अप्रत्याशित। बिहार में जो कुछ भी हुआ वह यादव समाज के लालू यादव से सहानुभूति रखने वाले समाज के लोगों के कारण हुआ। हालांकि, नीतिश यादव ने इसका ठीकरा केंद्रीय नेतत्व पर फोड़ा जो कि बिल्कुल जायज नहीं है। उप चुनावों में मोदी या अमित शाह के लिए जनादेश का न मिलना उनकी असफलता नहीं बल्कि विपक्ष का एकजुट हो जाना विपक्ष की जीत का कारण है। जहां तक सेमीफाईनल का प्रश्न है यदि सारा विपक्ष एकजुट हो जाये तो भाजपा को रोकना संभव है लेकिन सारे विपक्ष का तात्पर्य कांग्रेस नहीं है यदि आगामी लोकसभा में ऐसी स्थितियां बनती भी हैं तो कांग्रेस का फायदा तय है। फिलहाल राजनैतिक पंडित अपनी सुविधानुसार इसका विश्लेषण करेंगे और निष्कर्ष निकालेंगे लेकिन यह हार भाजपा की है और जीत विपक्ष की है। 

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