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शिमला में भीषण जल संकट के मायने

शिमला में भीषण जल संकट के मायने

admin | पोस्ट किया गया 346 दिन 13 घंटे पूर्व
08/06/2018
शिमला देश और विदेश के सैलानियों का ग्रीष्म़ ऋतु में सैरगाह हुआ करता है। सफेद बर्फ की चादर से ढके रहने एवं ग्रीष्म ऋतु में मौसम में ठंडक एवं सुहावना होने के कारण भारत देश का एक प्रमुख स्थल है। लेकिन अचानक आऐ मौसम के बदलाव में आजकल शिमला को भीषण जल संकट का सामना करना पड़ रहा है। पीने के पानी की लंबी-लंबी कतारें मानो शिमला की जीवनचर्या ही बदल गई है। स्थानीय नागरिकों को पर्यटकों से अनुरोध करना पड़ा कि वह भीषण जल संकट के मद्देनजर शिमला न आयें। बर्फ की चादर एवं पहाड़ियों से घिरे शिमला की तासीर में अचानक आए बदलाव से सभी हैरान-परेशान हैं। निश्चित तौर पर भूजल के अंधाधुंध दोहन एवं क्लाईमेंट चेंज से इन परिस्थितियों का सामना करना पड़ रहा है। यदि हम पिछले एक दशक में आए बदलाव पर नजर डालें तो प्रतीत होता है कि पूरे शिमला सहित आसपास के गांवों में लोगों ने कांक्रीट के इतने भवन निर्मित कर डालें हैं जिसका परिणाम हमें भोगना पड़ रहा है। पूरे देश के कई लोगों ने इस ठंडे स्थान शिमला में आवास एवं फार्म हाऊसों का निर्माण बहुत तेजी से किया है। दूसरी शिमला की भौगोलिक दशाओं को भी सूखे की मार से जोड़कर देखा जा सकता है। पहाड़ियों से घिरे होने के कारण यहां वर्षा जल संचयन व्यवस्था का भी अभाव है उसका सबसे महत्वपूर्ण कारण यह है कि निरंतर बर्फबारी एवं ठंडा होने की वजह से कभी किसी का ध्यान इस ओर गया ही नहीं। आज भीषण जल संकट से जूझते शिमला को आये के प्रमुख स्रोत पर्यटन से होने वाली आमदनी से नुकसान उठाना पड़ रहा है जिसका भले ही तात्कालिक प्रभाव न हो किन्तु भविष्य में इसका असर शहर की अर्थव्यवस्था पर स्पष्ट रूप से परिलक्षित होगा। भीषण जल संकट के चलते स्कूल कॉलेज अप्रत्याशित तौर पर बंद करने पड़े हैं। लोगों को पीने के पानी की बोतलों की कीमत बीस रुपये से पचास रुपये में भी खरीदनी पड़ रही है। नहाने के पानी की व्यवस्था स्थानीय निवासियों सहित पर्यटकों के लिए जी का जंजाल बनी हुई है। इसका सहज ही अनुमान लगाया जा सकता है कि जब पीने के पानी की कीमत पचास रुपये चुकानी पड़ रही है तो नहाने के पानी की व्यवस्था कितना बड़ा दुष्कर कार्य होगा। बहराल  शिमला को आज भीषण जल संकट का सामना करते देख देश के अन्य हिस्सों के लिए खतरे की घंटी बज चुकी है। यदि व्यवस्था ने इससे सीख लेकर कोई त्वरित कदम नहीं उठाये तो हमें इसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। शिमला ग्रीष्म ऋतु में सर्वाधिक ठंडा एवं बर्फ से आच्छादित रहने वाला शहर यदि भीषण जल संकट की चपेट में आ सकता है तो फिर दूसरे शहरों की क्या बिसात। शिमला को भीषण जल संकट से कैसे निजात दिलाई जाए इसको लेकर रणनीतिकार चुनौतियों का सामना करने के लिए त्वरित एवं दीर्घकालिक उपायों पर विचार कर रहे हैं। लेकिन सिर्फ इतना ही पर्याप्त नहीं होगा। देश के अन्य शहरों में ऐसी स्थिति निर्मित न हो इसके लिए ठोस प्रयास कार्य योजनायें एवं नीतियां आज देश के समक्ष चुनौतियां बनकर उभर रही है।
- राजकुमार शर्मा 
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