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प्राकृतिक और आध्यात्मिक रूप से सबसे पवित्र माना जाता है पीपल का वृक्ष

प्राकृतिक और आध्यात्मिक रूप से सबसे पवित्र माना जाता है पीपल का वृक्ष

Admin Chandel | पोस्ट किया गया 495 दिन 11 घंटे पूर्व
14/06/2018
भोपाल (महामीडिया)  भारत में पेड़-पौधों की पूजा करना हमारी परंपरा का अंग रहा है. फिर भी कुछ वृक्षों की पूजा का खास महत्व है. इनमें पीपल का स्थान सबसे ऊपर है. यदि आध्यात्मि‍क रूप से देखें, तो इसे वृक्षों में सबसे अधिक पवित्र माना गया है. साथ ही पर्यावरण की रक्षा करने में इसका विशेष योगदान है। पीपल का वृक्ष हिन्दू धर्म में सबसे पवित्र माना जाता है. मुख्य रूप से इसको भगवान विष्णु का स्वरूप मानते हैं.इसके शाखाओं, पत्तों और फलों में सभी देवताओं का निवास होता है. यह प्राकृतिक और आध्यात्मिक रूप से इतना महत्वपूर्ण है कि भगवान कृष्ण गीता में कहते हैं कि, 'अश्वत्थ: सर्ववृक्षाणाम्', मतलब 'समस्त वृक्षों में मैं पीपल हूं.' ऐसा कहकर उन्होंने इस वृक्ष की महिमा स्वयं ही कह दी है. वैज्ञानिक रूप से पीपल इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह बहुत ऑक्सीजन पैदा करता है. पीपल के वृक्ष को शनि के ईष्ट श्री कृष्ण का स्वरूप माना जाता है. पीपल की वृक्ष की पूजा करने से शनि की पीड़ा शांत होती है. पीपल के वृक्ष की उपासना से अगर अल्पायु का योग है तो वह योग समाप्त होता है. वंश वृद्धि की समस्या और संतान की समस्याओं का निवारण हो जाता है. आयुर्वेद में भी पीपल का महत्व बताया गया है. पीपल के पत्ते, फल, छाल आदि से कई तरह की बीमारियों का नाश होता है. पीपल के फल से पेट से जुड़ी बीमारियां खत्म हो जाती है. पीपल की छाल के अंदर के भाग से दमा की दवा बनती है. इसके कोमल पत्ते चबाकर खाने और इसकी छाल का काढ़ा बनाकर पीने से चर्म रोगों में आराम मिलता है. सांस संबंधी किसी भी प्रकार की समस्या में पीपल का पेड़ आपके लिए बहुत फायदेमंद हो सकता है। इसके लिए पीपल के पेड़ की छाल का अंदरूनी हिस्सा निकालकर सुखा लें। सूखे हुए इस भाग का चूर्ण बनाकर खाने से सांस संबंधी सभी समस्याएं दूर हो जाती है। इसके अलावा इसके पत्तों का दूध में उबालकर पीने से भी दमा में लाभ होता है। पीलिया हो जाने पर पीपल के 3-4 नए पत्तों के रस में मिश्री मिलाकर बनाए गए शरबत को पीना बेहद फायदेमंद होता है। इसे 3-5 दिन तक दिन में दो बार देने से लाभ होता है। पीपल के पके हुए फलों को सुखाकर बनाए गए चूर्ण को शहद के साथ सेवन करने से हकलाने  की समस्या दूर होती है और वाणी में सुधार होता है।
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