महामीडिया न्यूज सर्विस
आशीर्वाद के अधिकारी मुख्यमंत्री शिवराज

आशीर्वाद के अधिकारी मुख्यमंत्री शिवराज

admin | पोस्ट किया गया 310 दिन 19 घंटे पूर्व
14/07/2018
भोपाल (महामीडिया) "कई बार तो लगता है कि शिवराज दिनभर परिश्रम करने के बाद रात में सोते हैं या नहीं! यदि सोते भी हैं तो शायद उनके सपने में जन कल्याण की योजनाएं ही चलती रहती हैं। तभी तो सवेरे जागते ही एक नए प्रकार के जन कल्याण के साथ प्रदेश के सामने प्रस्तुत होते हैं। राजनीतिक विरोधाभास के लिए कोई भी टीका-टिप्पणी कर सकता है, लेकिन कभी एकांत में बात करो तो विरोधी दलों के नेताओं को भी यह एहसास है कि शिवराज के कार्यकाल के दौरान मध्यप्रदेश शून्य से शिखर की ओर पहुंचा है।" गत 13 जून की सुबह की बात है। मैं किसी कार्य से मुख्यमंत्री से मिलने उनके आवास गया था, विषय कुछ और था लेकिन मुख्यमंत्री अचानक भावुक स्वर में बोले उठे ??आज मेरे जीवन का सर्वाधिक महत्वपूर्ण दिन है, शायद परमात्मा ने मुझे इसी दिन के लिए यह जिम्मेदारी सौंपी होगी।?? दरअसल मुख्यमंत्री थोड़ी देर बाद ही हरदा जिले के टिमरनी पहुंचकर असंगठित श्रमिक कल्याण योजना 'संबल' का शुभारंभ करने वाले थे। 'संबल' यानी एक ऐसी योजना जिसने मानवता के गर्भ में आने से लेकर जीवन के अंतिम पायदान तक गरीब को जीने की गारंटी दी है। मैं अपनी बात की शुरुआत इस छोटे लेकिन अत्यंत भावुक वार्तालाप से इसलिए करना चाहता हूं कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह के हृदय की गहराई को नापने का यह एक पैमाना है। सनातन काल से हमारा समाज सहकार के आधार पर चलता रहा है। सहकार बिना सत्कार के प्राप्त नहीं होता और विकार रहित सत्कार बिना संवेदनशील हृदय के नहीं किया जा सकता। जब व्यक्ति विकार रहित सत्कार करने की शक्ति प्राप्त कर लेता है तो परमात्मा उसे उपहार में विनम्रता प्रदान करता है। तभी वह जन आशीर्वाद का अधिकारी बनता है। इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि कोई व्यक्ति कितने बड़े खानदान में, कितनी ऊंची जाति में या कितने प्रभावी समाज में पैदा हुआ। फर्क इस बात से पड़ता है कि उसके जीवन की दिशा कैसी है? और प्रभुता प्राप्त करने के बावजूद उसे अपना मूल धर्म याद रहता है या नहीं? शिवराज की ओर जब हम देखते हैं तो पाते हैं कि उनके व्यक्तित्व में आज भी वही गरीब किसान का बेटा बसता है। शिवराज सिंह का जन्म सीहोर जिले के छोटे से गांव जैत में हुआ था। गांव में पैदा होकर जो अभाव के बीच पलता है, उसके भीतर संवेदनशीलता और संघर्ष दोनों समानांतर रुप से विकसित होते हैं। संवेदनशीलता इसलिए विकसित होती है कि उसे दायित्वों का निर्वहन विरासत में प्राप्त हो जाता है और संघर्ष इसलिए कि उसके पास परिश्रम के अलावा आगे बढ़ने का कोई रास्ता नहीं होता। आज भी हमारी संस्कृति गांव में ही बसती है। हमारी संस्कृति से तात्पर्य सहकार, सरोकार स्वावलंबन, सत्कार और संवेदनशीलता का एक समुच्चय। शिवराज ऐसा ही समुच्चय है। शिवराज सिंह जी ने बाल्य काल से संघर्ष किया है। मजदूरों को उचित मजदूरी मिले, इसके लिए आंदोलन करते करते अपने ही परिवार के लोगों की यातना का शिकार भी हुए, लेकिन उन्होंने अधिकार मांगना नहीं छोड़ा। बाद में विद्यार्थी परिषद से होते हुए आपातकाल की काल कोठरी का जुल्म सहते हुए, उन्हें जब भारतीय जनता युवा मोर्चा की कमान सौंपी गई तो उन्होंने युवा नेतृत्व के नए आयाम स्थापित किए। भारतीय जनता पार्टी में अन्य दायित्वों पर रहते हुए मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री बने। सामान्य तौर पर समाज में व्यक्ति के ठाठ बाट देखकर धारणाओं का निर्माण होता है। इसलिए शिवराज सिंह जी को भी देखकर कुछ लोगों को उस समय ऐसा लगा होगा कि यह दुबला पतला सा आदमी क्या सरकार चलाएगा? लेकिन मध्य प्रदेश के इतिहास में पहली बार इस दुबले-पतले गांव के लड़के ने ऐसे ऐसे काम किए हैं ,जिनकी कल्पना भी कोई कर नहीं सकता। किसने सोचा था कि एक किसान का बेटा कृषि को लाभ का धंधा बनाने की दिशा में क्रमबद्ध योजनाएं बनाता जाएगा । राजा, नवाब, अंग्रेज और कांग्रेस लगाकर मध्य प्रदेश में 7 लाख हेक्टेयर सिंचाई की व्यवस्था कर सके थे, लेकिन शिवराज सरकार ने मात्र 12 -13 वर्षों में इस सिंचाई की छमता को 40 लाख हेक्टेयर के ऊपर पहुंचा दिया। यह आंकड़े हैं, कोई नकार नहीं सकता। सिंचाई की क्षमता के बढ़ने से ही मध्यप्रदेश में बंपर पैदावार हुई और सरकार की पॉलिसी तथा किसान के पसीने के चलते मध्यप्रदेश को पांच कृषि कर्मण पुरस्कार मिले। आज मध्य प्रदेश कृषि उत्पादन के क्षेत्र में टॉप पर हैं। शिवराज जी अभी रुके नहीं है, थके नहीं हैं ।उनके अंदर किसानों के उत्थान के लिए नित्य  नई नई योजना जन्म ले रही है। यह बात कल्पना से भी परे है कि जिस फसल को आप एक साल पहले बेच चुके हैं, उस पर भी अतिरिक्त राशि देने का काम कोई सरकार करे। किसानों को लेकर अनेक बातें बताई जा सकती है, लेकिन एक पंक्ति में कहें तो किसानों को एक साल में 30 हजार करोड रुपए से अधिक की सहायता का अनुमान कौन लगा सकता है। शिवराज सिंह जी उन गिनती के राजनेताओं में शामिल हैं जिन्होंने मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठने के बाद उसने मूल परिवेश से संबंध तोड़े नहीं, बल्कि उससे जीवंत संवाद और संबंध बनाए रखे। यही वजह है कि मुख्यमंत्री की अधिकतर घोषणा गांव और गरीब के लिए होती हैं। उन्हें न सिर्फ खेती किसानी की गहरी समझ है, बल्कि खेती में पैदा होने वाली समस्याएं, किसानों का जीवन और उनकी परेशानी इन सब का व्यवहारिक ज्ञान भी है, कृषकों की बहुलता वाले इस प्रदेश में उनके जैसी खेती की समझ रखने वाले नेता उंगलियों पर गिनने लायक हैं। क्योंकि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह की पारिवारिक पृष्ठभूमि राजनीतिक नहीं है। एक सामान्य कार्यकर्ता से मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुंचे हैं। इसलिए उनकी सोच पर छल कपट और राजनीतिक हथकंडे बाजी की छाया दिखाई नहीं देती। उनका परिश्रम उन्हें हवा हवाई नेताओं की जगह पके हुए राजनीतिज्ञ के रूप में स्थापित करता है। वे एक समन्वयवादी नेता हैं, जो सबको साथ लेकर चलने में विश्वास करते हैं। बुजुर्ग नेताओं और युवा कार्यकर्ताओं के बीच अपनी समझ से यथायोग्य व्यवहार करना और सर्वस्वीकार्य रास्ता निकलना मुख्यमंत्री जी के व्यक्तित्व की विशेषता है। उनकी एक विशेषता और है कि वह धीर गंभीर प्रकृति के व्यक्ति हैं। किसी छोटी सी उपलब्धि पर उछलते नहीं, अपनी जिम्मेदारियों को भूलते नहीं  हैं और न पराजय के क्षणों में अंतर्मुखी होकर छुईमुई सा व्यवहार करते हैं। स्वयं के प्रति कठोर और समाज के प्रति संवेदनशील रहकर जनकल्याण का ताना-बाना बुनते रहते हैं। लगातार तीन बार मुख्यमंत्री रहते हुए भी आम आदमी जैसी सोच और व्यवहार प्रदेश की जनता को अपनेपन का एहसास कराती है, यही वजह है कि मुख्यमंत्री अपने दौरों पर जब लोगों के बीच होते हैं, तो सबको ऐसा लगता है कि वे उनके ही परिवार के सदस्य हैं। वह अपने परिवार के मुखिया से ही बात कर रहे हैं। समाज का शायद ही कोई ऐसा तबका बचा हो, जिसके लिए शिवराज सिंह के अंतर्मन में कल्याण की हूक न उठी हो।
मध्यप्रदेश में लाडली लक्ष्मी योजना बनाई तो सारे देश ने धीरे-धीरे उसे अपनाया। व्यक्तिगत जीवन में बेटियों के प्रति उनकी जो संवेदनशीलता है वह इसी बात से प्रकट रूप में सामने आती है कि कुछ बेटियों को उन्होंने न सिर्फ गोद ले रखा है, बल्कि उनकी जीवन की संपूर्ण जिम्मेदारियों का निर्वहन आज भी कर रहे हैं। उनका लालन-पालन, पढ़ाई-लिखाई से लेकर शादी-ब्याह तक का जिम्मा शिवराज दंपत्ति सगे माॅ-बाप की तरह उठाते हैं। बेटियों का सम्मान और सुरक्षा उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता में है। यही कारण है कि अबोध बच्चियों के साथ दुराचार करने वालों के विरुद्ध कठोरतम सजा फांसी के लिए उन्होंने सबसे पहले पहल की। देशभर में आज बेटियों की ओर आंख उठाने से पहले दरिंदों को फांसी का फंदा दिखाई देने लगा है। मेधावी बच्चों की संपूर्ण शिक्षा का खर्च उठाने का जो  निर्णय उन्होंने किया है, वह मध्य प्रदेश को एक शिक्षित और आधुनिक प्रदेश बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा। कभी किसी ने सोचा था कि 40 लाख रुपए तक की फीस भरने का काम कोई सरकार अपने सिर पर लेगी। आज मध्यप्रदेश में कोई भी ऐसा बच्चा जो पढ़ना लिखना चाहता है और उसके माता-पिता के पास फीस के लिए पैसे नहीं है, तो उसको चिंता करने की आवश्यकता है। शिवराज सिंह रोज किसी न किसी वर्ग के लिए योजनाएं तो बना ही रहे थे, लेकिन इसी बीच शायद अचानक परमात्मा ने उन्हें नई प्रेरणा दी होगी कि ?संबल? जैसी बहुआयामी योजना बनाएं। उन्होंने सारी दुनिया को समाज कल्याण का एक अभिनव संदेश दिया है। ?संबल? योजना एक ऐसी दक्ष योजना है, जो मानवता को पूरी निश्चिंतता के साथ जीवन जीने की गारंटी देती है। स्वाभाविक है जब कोई नेता इस प्रकार से चिंतन करता है और ना सिर्फ चिंतन करता है, बल्कि चिंता का समाधान खोजता है, तो समाज उसके साथ खड़ा हो जाता है। हमारे समाज में आशीर्वाद एक बड़ी ताकत है। आशीर्वाद उसे ही प्राप्त हो सकता है, जो ईमानदारी से समाज को अपना परिवार मानकर कार्य करता है। जीवन का क्षण-क्षण, पल-पल समाज को देता है। गिनाने को कई बातें हो सकती हैं, लेकिन एक विशेष बात यह है कि सामाजिक सरोकारों की दिशा में शिवराज जी का कोई तोड़ नहीं है। राजनीति में जो लोग राजनीतिक लाभ के लिए समाज सेवा का ढोंग रचते हैं, वह ढोंग ज्यादा दिन छुपता नहीं है। एक न एक दिन सत्य समाज के सामने आता ही है। सार्वजनिक जीवन जीने वालो में समाज गौर से देखता है कि वह व्यक्ति कैसे उठता है, कैसे बैठता है, कैसे खाता है, कैसे बोलता है, कैसे देखता है और कैसे मिलता है? इन सभी चीजों का महत्व है। सामान्य तौर पर बड़ी कुर्सी प्राप्त होने के बाद लोगों का व्यक्तिगत डील-डौल बदल जाता है। ऐश्वर्य और पद का मद उसके चेहरे पर दिखाई देने लगता है, लेकिन शिवराज सिंह ऐसे बिरले नेताओं में शामिल हैं, जिनके चेहरे पर मुख्यमंत्री पद होते हुए भी जिम्मेदारियों का भाव निरंतर परिलक्षित होता है। प्रदेश में कहीं भी ओले पड़े, सूखा पड़े, दुर्घटना हो जाए, कोई घृणित अपराध हो जाए, प्रदेश वासियों ने ऐसे कष्ट और दुख की घड़ी में सबसे पहले यदि किसी को खड़े पाया है, तो वह एक शिवराज सिंह ही हैं। यह सही है की 14 जुलाई से प्रारंभ होने वाली यात्रा का नाम जन आशीर्वाद यात्रा है, लेकिन यदि मुख्यमंत्री जी को हम व्यवहार रूप में प्रवास करते देखे तो वह रोजाना ही एक जनआशीर्वाद यात्रा करते हैं। यह जन आशीर्वाद यात्रा नवंबर में होने वाले विधानसभा चुनाव से ठीक पहले हो रही है, इसलिए इस यात्रा का अर्थ स्पष्ट है। पिछली तीन जनआशीर्वाद यात्राएं जिन लोगों ने देखी हैं, वह जानते हैं कि मुख्यमंत्री जो करते जाते हैं, वह समाज के हृदय में स्थापित होता जाता है, स्थान बनाता जाता है। यही कारण रहा कि पिछली यात्राओं में रात के 2.00 बजे से लेकर 4.00 बजे तक हजारों की भीड़ अपने लाडले नेता से मिलने सड़कों पर उमड़ती रही। 2008 का चुनाव हो या 2013 का, भारतीय जनता पार्टी की सरकार स्पष्ट बहुमत से और भारी बहुमत से बनती चली गई। शिवराज सिंह जी की जगह कोई सामान्य व्यक्ति होता तो उसे दंभ हो सकता था और उसके कारण वह अपने कार्यों में पूर्णता देख सकता था, लेकिन मुख्यमंत्री के वार्तालाप को जब हम सुनते हैं तो पाते हैं कि उनके मन में अभी भी जाने क्या-क्या करने की ललक हिलोंरे ले रहीं हैं। उन्होंने हाल ही में किसान चौपालों के माध्यम से संदेश दिया है कि किसान भाई सरकार को सलाह दें कि अगले 5 साल में और क्या करना है? मुझे लगता है कि आने वाले दिनों में युवाओं से, माता-बहनों से, बुजुर्गों से भी वे ऐसी कुछ सलाह मांग सकते हैं कि बताइए आपकी सरकार आपके लिए क्या कर सकती है? सही अर्थों में यह जनआशीर्वाद यात्रा मध्यप्रदेश के अपने साढ़े सात करोड़ परिवार से मिलने का एक अभिनव अभियान जैसा है। मुख्यमंत्री सड़क मार्ग से अपनी यात्रा पूरी करने वाले हैं, यह वही राजनेता कर सकता है, जिसको पता है कि उसके कार्यकाल में गांव गांव तक पक्की सड़कें पहुंचा दी गई हैं। हमारे यहां विकास का अर्थ है, तन, मन, बुद्धि और आत्मा का सुख। मानवता का यह समग्र विकास शिवराज की कार्य पद्धति में हम देखते हैं। छोटे-छोटे बच्चों की किलकारी सुनने से लेकर बुजुर्गोंं को तीर्थ कराने की तड़प तक शिवराज के अपनो से लगाव के कारण ही उन्हें जन-जन का आशीर्वाद मिल रहा है।
- लोकेन्द्र पाराशर
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