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गुरू से हमें ब्रह्मा,विष्णु,महेश का आशीर्वाद प्राप्त होता है-ब्रह्मचारी गिरीश

गुरू से हमें ब्रह्मा,विष्णु,महेश का आशीर्वाद प्राप्त होता है-ब्रह्मचारी गिरीश

Admin Chandel | पोस्ट किया गया 452 दिन 11 घंटे पूर्व
27/07/2018
भोपाल (महामीडिया) महर्षि महेश योगी जी कहा करते थे ब्रह्मानन्द अर्थात् ब्रह्म का आनन्द। जब हम ब्रह्म की बात करते हैं तो पूर्ण ज्ञान की बात करते हैं। ज्ञान में क्रियाशक्ति शामिल है। क्रिया शक्ति जागृत हो जाती है तो ज्ञान का अविरल प्रवाह होने लगता है। हमारे लिए एक तरफ ब्रह्म है तो दूसरी तरफ उनके प्रिय शिष्य महेश। इस तरह हमें अपने गुरू ब्रह्मानन्द सरस्वती जी से ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनों का गुंरू रूपी आशीर्वाद प्राप्त होता है। यह सारे गुण हमारी चेतना में जागृत हो जाते हैं। परा प्रकृति में कर्म करने की शक्ति भी जागृत हो जाती है यह सब हमें गुरू परम्परा से अर्जित हुआ है। उक्त उद्गार आज महर्षि विद्यालय समूह के अध्यक्ष ब्रह्मचारी गिरीश ने ब्रह्मानन्द सरस्वती आश्रम स्थित महर्षि उत्सव भवन छान में गुरू पूर्णिमा महोत्सव एवं महर्षि विश्व शान्ति आन्दोलन की स्थापना के 10वें वर्ष पर आयोजित समारोह में व्यक्त किये। इस दो दिवसीय समारोह का आयोजन महर्षि उत्सव भवन भोजपुर मन्दिर मार्ग पर स्थित ग्राम छान में किया जा रहा है। 
महर्षि जी के तपोनिष्ठ शिष्य ब्रह्मचारी गिरीश ने आगे कहा कि एक साधे सब साधे अर्थात् हमें मास्टर की मिल गई है यह समूचे अखिल ब्रह्माण्ड की चाभी है। उनका कहना था कि गुरूदेव ब्रह्मानन्द सरस्वती जी के बारे में इतनी बातें हैं कि एक पूरा मानव जीवन कम पड़ जाये। उन्होंने 9 वर्ष की आयु में घर छोड़ दिया था एवं 14 वर्ष की आयु में सन्यास ले लिया था। वह 71 वर्ष की आयु में 1941 में शंकराचार्य बनें और जो अद्वितीय कार्य उन्होंने किये वह सदैव अविस्मरणीय रहेंगे। 1942 में गुरूदेव ने नई दिल्ली में यमुना के किनारे यज्ञ किया जिसमें 10,000 से अधिक वैदिक पंडितों ने हिस्सा लिया इसके पश्चात् फिर भारत को स्वतंत्रता प्राप्त हुई और इसी गुरू ने पूरे विश्व को एक अमूल्य भेंट दिया वह है गुरू महर्षि महेश योगी के रूप में जो सम्पूर्ण विश्व को आलोकित किया। इन्हीं महर्षि महेश योगी जी ने 26 मई 1986 को घोषित किया था कि भारत तो ज्ञान के मामले में जगत्गुरू है लेकिन हम सब मिलकर विश्व का सर्वाधिक शक्तिशाली राष्ट्र बनायेंगे। वह सच्चे अर्थों में महर्षि, राजर्षि एवं देवर्षि भी थे। आज 32 वर्षों में इस वृक्ष में फूल आने लगे हैं लेकिन फल आने में अभी समय लगेगा। तब तक हम सभी मालियों का कार्य है कि हम उस वृक्ष को खाद पानी एवं रख रखाव करते रहें। 32 वर्ष पूर्व महर्षि द्वारा कही गई बात आज सार्थक एवं साकार होते दिख रही है। यही कारण है कि आज भारत के प्रधान मंत्री द्वारा कही गई प्रत्येक बात को पूरा विश्व समुदाय गम्भीरता से लेता है और उन्हें ऐसा ही सम्मान देता है। इस अवसर पर महर्षि महेश योगी वैदिक विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर भुवनेश शर्मा जी ने कहा कि गुरू की तिथि पूर्णिमा अर्थात् पूर्ण है गुरू अन्धकार का निवारण करते हैं जो गुरू ज्ञान देता है वह पूर्ण ज्ञान देता है इसलिए हम सभी को अपने गुरू महर्षि महेश योगी जी द्वारा दिये गये ज्ञान भावातीत ध्यान एवं सिद्धि कार्यक्रम का अभ्यास करके उस ज्ञान को प्राप्त करना चाहिए और उसे आगे बढ़ाना चाहिए। उन्होंने विश्व विद्यालय द्वारा वर्ष 2017-2018 में 1410 नियमित एवं 42000 दूरस्थ शिक्षा से स्नातक उत्तीर्ण करने वालों की उपलब्धियों को रेखांकित करते हुए गुरू चरणों में समर्पित किया एवं आगामी वर्ष की कार्य योजनाओं के लिए गुरू का आशीर्वाद प्राप्त किया। ठीक इसी तरह महर्षि विद्या मन्दिर विद्यालय समूह के कार्यपालक निदेशक डॉ. प्रकाश जोशी महर्षि यूनिवर्सिटी ऑफ मैनेजमेंट एण्ड टेक्नॉलॉजी के कुलपति प्रो. पंकज चाँदें भावातीत ध्यान एवं सिद्धि कार्यक्रम के राष्ट्रीय संयोजक एन.डी. तिवारी महर्षि विश्व शाँति आन्दोलन के राष्ट्रीय महा सचिव व्ही. आर. खरे ने अपने अपने संस्थान एवं विभाग की उपलब्धियों को श्री गुरूदेव के श्रीचरण कमलों में अर्पित किया एवं आगामी वर्ष की योजनाओं की सफलता के लिए आशीर्वाद प्राप्त किया।

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