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सेवा, समर्पण की कूची, अनुशासन के धरातल पर

सेवा, समर्पण की कूची, अनुशासन के धरातल पर

Admin Chandel | पोस्ट किया गया 371 दिन 22 घंटे पूर्व
13/08/2018
भोपाल (महामीडिया) राजनैतिक दलों में प्रशिक्षण और सम्मेलनों का लंबा इतिहास है, लेकिन प्रौद्योगिकी के विकास और आशुफलदायी राजनीति ने इस क्रम के कदम थाम दिए है। फिर भी कुछ अपवाद है जहां प्रशिक्षण और सम्मेलन राजनैतिक दल की अपरिहार्यता बनी हुई है। भारतीय जनता पार्टी ने प्रशिक्षण, सम्मेलन के साथ यात्रा को दल की विचारधारा रीति नीति के पोषण का अनिवार्य तत्व बना लिया है। ऐसे में ये कार्यक्रम परस्पर एक दूसरे के पूरक बन चुके है। यह कम लोग ही जानते है कि आगामी नवाचार में प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव की तैयारी के रूप में भारतीय जनता पार्टी ने सभी 230 विधानसभा क्षेत्रों के कार्यकर्ताओं के सम्मेलनों की श्रृंखला आरंभ की है जो मुख्यमंत्री श्री शिवराजसिंह चैहान की जनआशीर्वाद यात्रा की सफलता की पटकथा लिख रही है। विधानसभा क्षेत्र सम्मेलन की संरचना के शिल्पकार प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह और प्रदेश संगठन महामंत्री सुहास भगत ने जिस क्रम में सम्मेलन की व्यूहरचना की है और सम्मेलन के अपेक्षित कार्यकर्ताओं का समावेश किया है। हर सम्मेलन में औसतन पांच से छः हजार कार्यकर्ता भाग लेते है। विष्णुदत्त शर्मा सम्मेलनों का सुनियोजन कर रहें है। अब तक प्रदेश विभिन्न अंचलों में सत्तर से अधिक विधानसभा सम्मेलन सफलतापूर्वक संपन्न हो चुके है जिनमें कठोर अनुशासन के साथ चार पांच घंटा बैठकर विधानसभा चुनाव में कार्यकर्ता की भूमिका, बूथ प्रबंधन से लेकर मतदाता संवाद और संपर्क की निरंतरता रेखांकित की गयी है। जहां-जहां शिवराजसिंह चैहान के नेतृत्व में जनआशीर्वाद यात्रा पहंुचती है। विधानसभा क्षेत्र सम्मेलन यात्रा की सफलता की पटकथा लिख चुका होता है। जनआशीर्वाद यात्रा में उमड़ता जनसैलाब पार्टी की रीति नीति, पार्टी की सरकार की उपलब्धियोेें का दर्पण बन जाती है। जनआशीर्वादयात्रा से मुख्यमंत्री और जनता के बीच जो तादात्म्य स्थापित हो रहा है उससे भारतीय जनता पार्टी का जनसरोकार भी साबित हो रहा है। विधानसभा सम्मेलनों में पार्टी का प्रदेश नेतृत्व अपनी प्रतिबद्धता के साथ कार्यकर्ताओं के बीच वरिष्ठ कार्यकर्ता की भूमिका में प्रस्तुत होता है जिसका दावा होता है कि काम तो कार्यकर्ता ही आगे बढकर करेगा नेता तो उसके सहचर होंगे। इससे पार्टी नेतृत्व में वरिष्ठता और कनिष्ठता की दूरी समाप्त हो जाती है। परिवार भाव की सृष्टि होती है। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह, प्रदेश संगठन महामंत्री सुहास भगत, केन्द्रीय मंत्री नरेन्द्रसिंह तोमर, थावरचन्द गेहलोत, प्रदेश महामंत्री मनोहर उंटवाल, बंशीलाल गुर्जर, विष्णुदत्त शर्मा, अरविन्द कवठेकर, विनोद गोटिया, रामेश्वर शर्मा, प्रदेश शासन के मंत्री डाॅ. नरोत्तम मिश्रा, विजय शाह, लालसिंह आर्य, पार्टी के प्रदेश मंत्री पकंज जोशी, कृष्णा गौर सहित अन्य पदाधिकारी और मंत्री सम्मेलनों में मार्गदर्शन देते हुए क्षेत्रीय विधायक को अपना रिपोर्ट कार्ड सार्वजनिक करने, अपनी भूमिका को अधिक सेवा केन्द्रित बनाने की दिशा में प्रोत्साहित कर रहे है।
विधानसभा सम्मेलन के एक दिवसीय आयोजन को इस तरह संयोजित किया गया है कि कार्यकर्ता की जिज्ञासा का अंत नहीं होता और सुनने, समझने की चाहत बनी रहती है। आगामी दिन क्षेत्र में पहुंच रही जनआशीर्वाद यात्रा का सफलतापूर्वक पूर्वाभ्यास होता चलता है। जनआशीर्वाद यात्रा की सफलता की कहानी लिखने में पार्टी के कार्यकर्ताओं का अकथनीय योगदान होता है। जनआशीर्वाद यात्रा में उमड़ते जनसैलाब को देखकर लोग दांत तले अंगुली दबाकर रह जाते है। चुनाव के दौरान जनता राजनेताओं पर गौर कम करती है लेकिन जनआशीर्वाद यात्रा ने अनूठा नजारा पेश किया है। लोग यात्रा के लिए घंटों इंतजार करते है और दूर-दूर से पैदल चलकर आ रहे है। यह कुछ लोग ही जानते है कि जनआशीर्वाद यात्रा में प्रदेश की जनता के आकर्षण में मुख्यमंत्री की लोकप्रियता के साथ कार्यकर्ता भी नेपथ्य में कार्य करने वाला नायक है। विधानसभा सम्मेलनों के प्रभारी पार्टी के प्रदेश संगठन महामंत्री विष्णुदत्त शर्मा के लिए ये सम्मेलन दिवस की चिंता और रात्रि का स्वप्न बने हुए है और वे सम्मेलनों को सुव्यवस्थित संपन्न कराने के लिए अपनी मिलन सारिता का बखूबी उपयोग करते हुए पार्टी हितचितंकों और तटस्थ विचारधारा के व्यक्तियों को भी शामिल करने का प्रयास करते है। विष्णुदत्त शर्मा का मानना है कि भले व्यक्ति पार्टी की विचारधारा से भिन्न मत रखता हो, हमारी संगत में आकर वह हितचिंतक बनेगा और आगे चलकर वह हमारा मतदाता भी बन जायेगा। यही संगठन का मूलमंत्र है।
विधानसभा सम्मेलन की विषय वस्तु का चयन भी इस बुद्धिमत्ता के साथ किया गया है कि सम्मेलन का वातावरण विचारोत्तेजक होते हुए भी बोझिल नहीं होता। विधानसभा सम्मेलन में वांछित और सम्मिलित होने वाले कार्यकर्ता ही वास्तव में पार्टी के कार्यक्रमों और उपलब्धियों के प्रचार के लिए संदेश वाहक, ध्वजवाहक होता है इसलिए सम्मेलन में क्षेत्रीय विधायक और पार्टी पदाधिकारी, विभागीय मंत्री, विधानसभा क्षेत्र में आए सुखद बदलाव, विकास कार्य संवरती अधोसंरचना का हिसाब देते है और आने वाले समय में क्षेत्र को विकास के चरण शिखर पर ले जाने का रोडमैप प्रस्तुत करते है। लोककल्याणकारी राज्य में जनसामान्य, गरीब, मजदूर, युवा, किसान, सरकारी योजनाओं की धुरी बन चुके है। सम्मेलन में किसानोन्मुखी कार्यक्रम का विशेष रूप से परिज्ञान कराया जाता है। केन्द्र और राज्य सरकारों की उपलब्धियां जन-जन तक पहंुचाने से जनसहयोग के लिए जनता प्रोत्साहित होती, इसलिए इस दिशा में कार्यकर्ता सम्मेलन में सज्जित होते है। लोकतंत्र में जनता को सूचना का अधिकार है। सम्मेलन उसकी पूर्ति कर रहे है। बूथ स्तर की संरचना का व्यवहारिक ज्ञान देने साथ मतदाता से संपर्क करने वाले पन्ना प्रमुखों की भूमिका भी दिग्दर्शन कराया जाता है। सही मायने में सम्मेलन कार्यकर्ता के उसकी भूमिका का आभास करा देते है। सोशल मीडिया और आईटी का प्रजेंटेशन होने से कार्यकर्ता प्रौद्योगिकी में दक्षता और उसका समुचित लाभ उठाने की दिशा में आगे बढने के लिए मानक के रूप में सज्जित होता है। दो सौ तीस विधानसभाओं में सम्मेलन का महत्वाकांक्षी लक्ष्य देखने में जितना जटिल लगता है लेकिन नेतृत्व और कार्यकर्ताओं के बीच परिवार भाव से हंसी खुशी से संपन्न होने जा रहा है। राजनीतिक दलों में जो कार्यक्रम सिद्धांत के रूप में यदि किए जाते है उन पर अमल भाजपा की दैनंदिन अभ्यास के विषय है।
पं. दीनदयाल उपाध्याय ने एकात्म मानव दर्शन के रूप में जो विरासत पार्टी को सौंपी है उसको धरातल पर उतारने के लिए भाजपा सरकारों ने अंत्योदय को अपना मिशन बनाया है। सम्मेलन में अंत्योदय की दिशा में किए गए कार्यो और उपलब्धियों की प्रदर्शनी आकर्षण का केन्द्र होती है। इससे लगता है कि भाजपा के लिए भावना से कत्र्तव्य श्रेष्ठ है। अपना जीवन दर्शन बना चुकी है। आजादी के बाद गांधीजी का बसेरा वर्धाग्राम हो गया था। तब वर्धा में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का शिविर लगा था। जिसमें अकस्मात गांधी जी पहुंच गए। शिविर में जाति विहीन खान, पान, अनुशासन देखकर वे भौचक्के रह गए और उन्होंने कहा था कि संघ ने भारतीय समाज की श्रेष्ठता आत्मसात की है। तब से 70 साल गुजर गए है और कांग्रेस महासचिव दीपक बावरिया ने कांग्रेस में अनुशासनहीन भीड़ को यदि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का अनुकरण करने को कहा तो यही माना जायेगा कि भारतीय जनता पार्टी जो राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ का राजनैतिक अवतार है। मनसा वाचा कर्मणा स्थित प्रज्ञ अनुशासित और राष्ट्रीय ध्येय निष्ठ दल है जिसका मानसिक विकास अभ्यास वर्ग, प्रशिक्षण, सम्मेलनों की निरंतरता से पुष्ट होता है।
- भरतचन्द्र नायक

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