महामीडिया न्यूज सर्विस
बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है दशहरा पर्व

बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है दशहरा पर्व

admin | पोस्ट किया गया 395 दिन 14 घंटे पूर्व
18/10/2018
भोपाल (महामीडिया) बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है दशहरा पर्व। दशहरा आश्विन मास की शुक्ल पक्ष की दशमी को मनाया जाता है। भगवान राम के रावण का वध करने और असत्य पर सत्य की विजय की खुशी में इस पर्व को मनाया जाता है। ऐसी मान्यता है कि रावण का वध करने कुछ दिन पहले भगवान राम ने आदि शक्ति मां दुर्गा की पूजा की और फिर उनसे आशीर्वाद मिलने के बाद दशमी को रावण का अंत कर दिया। ऐसी भी मान्यता है कि दशमी को ही मां दुर्गा ने महिषासुर नामक राक्षस का वध किया था। इसलिए इसे विजयादश्मी के रूप में मनाया जाता है। 'राम सकल नामन्ह तें अधिका' यानी राम-नाम सब नामों से श्रेष्ठ है। भक्त कहते हैं कि राम से बड़ा राम का नाम है। भगवान राम के जीवन का हर पक्ष आदर्श था। उन्होंने ये आदर्श एक साधारण मानव के रूप में, पुत्र के रूप में एक भाई के रूप में, युवराज के रूप में, राजा के रूप में, धर्मरक्षक के रूप में, तो निभाए ही, वे एक आदर्श एवं नीति पालक शत्रु के रूप में भी वे लोक मानस में स्थापित हैं। राम का धर्मरक्षक स्वरूप तो सर्वत्र दृष्टिगोचर होता है। ताड़का, खरदूषण से लेकर रावण तक का वध उन्होंने धर्म रक्षा के लिए ही किया। रावण द्वारा सीता का अपहरण करने के बाद भी वे एक नीतिपालक शत्रु होने का परिचय देते हैं। वानरों और रीछों की भारी सेना होने के बाद भी वे लंका पर एकाएक आक्रमण नहीं करते हैं, बल्कि रावण को समझाने के लिए अंगद को भेजते हैं। इस सबके बीच वे एक आदर्श मानव का परिचय देते हुए सामाजिक समरसता का भी संदेश देते हैं। शबरी के जूठे बेर खाना, भील-निषादों के प्रति सहृदयता दिखाना तथा वानरों को अपना मित्र बनाना एवं उन्हें बंधु के समान मानना भी एक आदर्श मनुष्य के गुण हो सकते हैं। नीतिपालक शत्रु के रूप में उन्होंने जहां मेघनाद की पत्नी सती सुलोचना को आदर दिया, वहीं उन्होंने अपने भाई लक्ष्मण को रावण से राजनीति की शिक्षा लेने का परामर्श दिया। 
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