महामीडिया न्यूज सर्विस
हड्डियों और जोड़ों के दर्द को नहीं करें अनदेखा

हड्डियों और जोड़ों के दर्द को नहीं करें अनदेखा

Admin Chandel | पोस्ट किया गया 36 दिन 6 घंटे पूर्व
17/12/2018
भोपाल (महामीडिया) कई बार हम हड्डियों और जोड़ों के दर्द को अनदेखा कर देते हैं। यह एक गंभीर बीमारी ऑस्टियोपोरोसिस का संकेत भी हो सकता है। समय रहते हम इस बीमारी से बच सकते हैं। भारत में लगभग पांच करोड़ लोग ऑस्टियोपोरोसिस से ग्रसित हैं। ऑस्टियोपोरोसिस आम तौर पर कशेरुकी और कूल्हों के फ्रैक्चर के रूप में सामने आता है। ऑस्टियोपोरोसिस तब होता है, जब नई हड्डी बनने और पुरानी हड्डी के अवशोषण में असंतुलन होता है। इससे हड्डी का घनत्व कम हो जाता है। ऐसे में हड्डी कमजोर हो जाती है तथा हड्डी टूटने या फ्रैक्चर होने का जोखिम बढ़ जाता है। हड्डी का कमजोर होना धीरे-धीरे होता है और बढ़ता जाता है। हड्डी बनाने के लिए शरीर कैल्शियम और फॉस्फेट खनिजों का उपयोग करता है। हृदय और मस्तिष्क जैसे महत्वपूर्ण अंगों को चालू रखने के लिए शरीर हड्डियों में रहने वाले कैल्शियम को फिर से जज्ब कर लेता है, ताकि खून में कैल्शियम का स्तर बनाकर रखा जा सके। ऐसे में भोजन में कैल्शियम की मात्रा कम हो या शरीर खाद्य पदार्थों से पर्याप्त कैल्शियम न प्राप्त करे तो अस्थि निर्माण या अस्थि टिश्यू प्रभावित हो सकता है। नतीजतन हड्डियां कमजोर, भंगुर या नाजुक हो सकती हैं। ऑस्टियोपोरोसिस पुरुषों और महिलाओं में 40 साल के बाद होता है। ऑस्टियोपोरोसिस अकसर उम्र बढ़ने पर होता है, क्योंकि बोन टिश्यू के नष्ट होने की रफ्तार बढ़ती जाती है।  ऑस्टियोपोरोसि के कई कारण भी हो सकते हैं। गोरी त्वचा, छोटी अस्थि संरचना, परिवार में इसका इतिहास, शरीर का कम वजन, कम कैल्शियम वाला भोजन, निष्क्रिय जीवनशैली, अत्यधिक अल्कोहल का सेवन, तंबाकू का उपयोग, स्टेरॉयड आदि का उपयोग भी इसका कारण हो सकते हैं। बोन डेन्सिटी कम होने का पता लगाने के लिए बोन मिनरल डेन्सिटी टेस्ट एक सुरक्षित और दर्द हीन तरीका है। यदि आपको भी यह लक्षण दिखाई दें तो समय रहते तुरंत किसी अच्छे चिकित्सक से इसकी जांच करवायें।
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