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महर्षि महेश योगी जी के विचार समाज में आनंद, ऊर्जा एवं उत्साह के प्रवाहक

महर्षि महेश योगी जी के विचार समाज में आनंद, ऊर्जा एवं उत्साह के प्रवाहक

Admin Chandel | पोस्ट किया गया 85 दिन 6 घंटे पूर्व
27/05/2019
नई दिल्ली (महामीडिया) वर्तमान राजनीतिक एवं आर्थिक-सामाजिक परिस्थितियों के प्रभाव से विश्व के प्रायः सभी व्यक्तियों के मन में अशांति की स्थिति के रहते यह आभास होना स्वभाविक है कि जीवन कठिन है, संघर्षमय है, दुःखमय है। ऐसे में भारत के महान संत परम पूज्य महर्षि महेश योगी जी के इस संदेश का सहज स्मरण हो जाता है कि जीवन सरल है, जीवन आनंदमय है।? संभवतः महर्षि जी पूरे विश्व में प्रथम संत थे जिन्होंने भारतीय वैदिक ज्ञान-विज्ञान, योग तथा ध्यान का परिचय पूरे विश्व से वृहद् स्तर पर कराया तथा 35 देशों के 235 शोध संस्थाओं तथा विष्वविद्यालयों में किये गये 700 से भी अधिक अनुसंधानों के परिणामों यह ने सिद्ध किया कि आधुनिक विज्ञान एवं तकनीक की जड़ें वेद एवं वैदिक ज्ञान-विज्ञान में ही निहित हैं। साथ ही उन्होंने मन, बुद्धि, चेतना और शरीरिक क्रियाओं में सामन्जस्यता तथा शान्ति स्थापित करने वाली प्रायोगिक भावातीत ध्यान, सिद्धि कार्यक्रम तथा उन्नत तकनीकें भी प्रदान की। जब मन शाँत होगा तब तनाव नहीं होगा, व्याग्रता नहीं होगी, मानव जीवन आनंद की अनुभूति अवश्य ही करेगा। उपरोक्त उद्गार परम पूज्य महर्षि जी के तपोनिष्ठ शिष्य एवं महर्षि महेश योगी वैदिक विश्वविद्यालय जबलपुर मध्यप्रदेश के कुलाधिपति ब्रह्मचारी गिरीश जी ने नई दिल्ली में महर्षि टीवी., महर्षि रेडियो, महर्षि समाचार एवं महामीडिया पत्रिका के सीएमएच ग्लोबल ओटीटी प्लेटफार्म पर प्रारंभ करते हुए व्यक्त किये। ब्रह्मचारी गिरीश जी ने कहा कि महर्षि जी ने ही प्रत्येक मानव में चेतना जागृत करने और उसे स्थायित्व देने हेतु भावातीत ध्यान की एक सरल, सहज एवं प्रयास रहित पद्धति विश्व को प्रदान की। इसके प्रतिदिन प्रातः एवं संध्या मात्र 20 मिनट अभ्यास करने से अभ्यासकर्ता को बहुत अधिक शारीरिक व मानसिक लाभ प्राप्त होते हैं। । साथ ही कई अभ्यासकर्ताओं के समूह द्वारा भावातीत ध्यान एवं सिद्धि कार्यक्रम का अभ्यास करने से समाज की सामूहिक चेतना में सकारात्मकता की वृद्धि होती है और नकारात्मकता का विलोप होता है।ब्रह्मचारी जी ने आगे बतलाया कि महर्षि जी ने सदैव जीवन आनंद है के ब्रह्यवाक्य के उद्घोष कर समस्त मानवता को आशा, उत्साह व सकारात्मकता की सुगंध से सुवासित कर दिया था। उनके द्वारा लिखित पुस्तक साइंस आफ बीईंग एण्ड आर्ट आफ लिविंग में उन्होंने बतलाया कि प्रत्येक मनुष्य मं अपार आंतरिक क्षमता होती है जो कि वह अपने विद्यार्थी जीवन में उचित रूप से विकसित कर सकता है और यदि ऐसा होता है तो विश्व का प्रत्येक नागरिक एक उच्च विकसित व्यक्तित्व होगा जो कि अपने पूरे सामथ्र्य का उपयोग स्वयं के एवं दूसरों के उत्थान के लिए करेगा।ब्रह्मचारी गिरीश जी ने एक बतलाया कि परम पूज्य महर्षि जी के ज्ञान, दर्शन एवं शिक्षा के प्रचार प्रसार हेतु देश में कई शैक्षणिक एवं आध्यात्मिक संस्थायें स्थापित की गई हैं जो अपने अपने क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करते हुए विद्यार्थियों एवं अन्य नागरिकों में सतोगुण की वृद्धि हेतु प्रयासरत् हैं।  इसके साथ ही साथ प्रत्येक व्यक्ति को वैदिक तकनीकों जैसे आयुर्वेद, स्थापत्यवेद, गंधर्ववेद,ज्योतिष एवं यज्ञ की सुविधा उपलब्ध कराने हेतु भी महर्षि संस्थान व्यवस्था निर्मित की गई हैपरमपूज्य महर्षि जी के विचारों, कार्यो एवं दर्शन से अवगत कराने तथा महर्षि संस्थान की विभिन्न इकाईयों द्वारा समाज के उत्थान हेतु किए जा रहे कार्यों से भारत देश एवं विश्व के अन्य देशों के नागरिकों को सतत् रूप अवगत कराने हेतु देश की राजधानी नईदिल्ली में आज महर्षि रेडियो, महर्षि समाचार एवं महामीडिया पत्रिका को सीएमएच ग्लोबल ओटीटी प्लेटफार्म पर प्रारंभ किया गया। इस अवसर पर ब्रह्मचारी गिरीश जी ने विश्वास प्रगट किया कि परमपूज्य महर्षि जी द्वारा प्रणीत विचारों से भारत देश के समस्त विद्यार्थियों तथा नागरिकों में अत्यंत आनंद, उत्साह एवं ऊर्जा का संचार होगा। साथ ही इस ज्ञान से इन सभी को भविष्य में उचित मार्ग के चुनाव करने में सहायता मिलेगी एवं हम सभी मिलकर महर्षि जी के ब्रह्मवाक्य 'जीवन आनंद है' का उद्घोष करते हुए उनकी कल्पना 'भूतल पर स्वर्ग' को साकार करने में समर्थ होंगे। इस अवसर पर ब्रह्मचारी गिरीश के अलावा व्ही. आर. खरे निदेशक संचार एंव जनसंपर्क महर्षि संस्थान एवं टी.पी. कुन्द्रा डारेक्टर एम. सी. ई. ई. और सीएमएच ग्लोबल से संबंन्धित लोग उपस्थित थे। 

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