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आज अहिल्याबाई होल्कर जयंती है

आज अहिल्याबाई होल्कर जयंती है

Admin Chandel | पोस्ट किया गया 80 दिन 3 घंटे पूर्व
31/05/2019
भोपाल (महामीडिया)  आज महान शासक और मालवा प्रांत की महारानी अहिल्याबाई होल्कर की जयंती है । भारत की महान नारी लोकमाता अहिल्या बाई होल्कर ने लोक कल्याण की भावना से होलकर साम्राज्य का संचालन हृदय की विशालताए असीम उदारता तथा लोकतांत्रिक मूल्यों के आधार पर बड़ी ही कुशलतापूर्वक किया। भारत के गौरव को बढ़ाने वाली इस महान नारी लोकमाता अहिल्या बाई का जन्म 31 मई, 1725 को औरंगाबाद जिले के चैड़ी गांव, महाराष्ट्रद्ध में एक साधारण परिवार में हुआ था। अहिल्या बाई के जीवन को महानता के शिखर पर पहुंचाने में उनके ससुर महान यौद्धा मल्हार राव होलकर की मुख्य भूमिका रही है। इन्दौर जिले के आसपास के एक बड़े मालवा क्षेत्र में होल्कर साम्राज्य की स्थापना श्रीमंत मल्हार राव होल्कर ने अपने पराक्रम से की थी। मल्हार राव विशेष रूप से मध्य भारत में मालवा के पहले मराठा सुबेदार होने के लिए जाने जाते थे। महान यौद्धा मल्हार राव का जन्म 16 मार्च 1693 में तथा मृत्यु 20 मई 1766 में हुई। उनकी जीवन यात्रा एक भेड़ पालक चारवाहे के रूप में शुरू होकर एक महान यौद्धा के शिखर तक पहुंची।  अठारहवीं सदी के मध्य में मल्हारराव होल्कर ने पेशवा बाजीराव प्रथम की ओर से अनेक लड़ाइयाँ जीती थीं। मालवा पर पूर्ण नियंत्रण ग्रहण करने के पश्चातए 18 मई 1724 को इंदौर मराठा साम्राज्य में सम्मिलित हो गया था। 1733 में बाजीराव पेशवा ने इन्दौर को मल्हारराव होल्कर को पुरस्कार के रूप में दिया था। मल्हारराव ने मालवा के दक्षिण.पश्चिम भाग में अधिपत्य कर होल्कर राजवंश की नींव रखी और इन्दौर को अपनी राजधानी बनाया। उनके पति की मौत 1754 में कुंभेर की लड़ाई में हो गई थी। ऐसे में अहिल्यादेवी पर जिम्मेदारी आ गई। 1766 में रानी अहिल्यादेवी मालवा की शासक बन गईं। उन्होंने तुकोजी होल्कर को सैन्य कमांडर बनाया। उन्हें उनकी राजसी सेना का पूरा सहयोग मिला। अहिल्याबाई ने कई युद्ध का नेतृत्व किया। वे एक साहसी योद्धा थी और बेहतरीन तीरंदाज। हाथी की पीठ पर चढ़कर लड़ती थी। हमेशा आक्रमण करने को तत्पर भील और गोंड्स से उन्होंने कई बरसों तक अपने राज्य को सुरक्षित रखा। रानी अहिल्याबाई अपनी राजधानी महेश्वर ले गईंण् वहां उन्होंने 18वीं सदी का बेहतरीन और आलीशान अहिल्या महल बनवाया। पवित्र नर्मदा नदी के किनारे बनाए गए इस महल के ईर्द.गिर्द बनी राजधानी की पहचान बनी टेक्सटाइल इंडस्ट्री। उस दौरान महेश्वर साहित्यए मूर्तिकलाए संगीत और कला के क्षेत्र में एक गढ़ बन चुका था। मराठी कवि मोरोपंतए शाहिर अनंतफंडी और संस्कृत विद्वान खुलासी राम उनके कालखंड के महान व्यक्तित्व थे। एक बुद्धिमानए तीक्ष्ण सोच और स्वस्फूर्त शासक के तौर पर अहिल्याबाई को याद किया जाता है। हर दिन वह अपनी प्रजा से बात करती थी। उनकी समस्याएं सुनती थी। उनके कालखंड (1767.1795) में रानी अहिल्याबाई ने ऐसे कई काम किए कि लोग आज भी उनका नाम लेते हैं।

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