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आज शनि जयंती है

आज शनि जयंती है

Admin Chandel | पोस्ट किया गया 190 दिन 7 घंटे पूर्व
03/06/2019
भोपाल (महामीडिया) आज शनि जयंती है। सूर्य पुत्र शनि को न्यायाधीश माना गया है। ज्येष्ठ माह की अमावस्या को शनि जयंती के रूप में मनाया जाता है। शनि जयंती पर शनि दर्शन और पूजा का विशेष महत्व होता है। जिन जातकों की कुंडली में शनि की महादशा, अंतर्दशा, साढ़ेसाती और ढैय्या चल रही होती है, इस दिन उनकी पूजा करने से शनि दोष से मुक्ति मिलती है। 
'स्कन्द पुराण' की एक कथा के अनुसार सूर्य देव का विवाह राजा दक्ष की पुत्री संज्ञा से हुआ था। सूर्य देव को संज्ञा से तीन पुत्रों की प्राप्ति हुई थी। सूर्य देव ने उनका नाम यम, यमुना और मनु रखा। संज्ञा शनि देव के तेज को अधिक समय तक नहीं सहन कर पायी। इसलिए उसने अपनी छाया को सूर्य देव के पास छोड़ दिया और वहां से चली गईं। कुछ समय बाद सूर्य देव से छाया को एक पुत्र की प्राप्ति हुई जिन्हें शनि देव के नाम से जाना गया।
प्रात:काल उठकर स्नानादि से शुद्ध हों। फिर लकड़ी के एक पाट पर काला वस्त्र बिछाकर उस पर शनिदेव की प्रतिमा या तस्वीर या फिर एक सुपारी रखकर उसके दोनों और शुद्ध घी व तेल का दीपक जलाकर धूप जलाएं। शनिदेवता के इस प्रतीक स्वरूप को पंचगव्य, पंचामृत, इत्र आदि से स्नान करवायें। इसके बाद अबीर, गुलाल, सिंदूर, कुमकुम व काजल लगाकर नीले या काले फूल अर्पित करें। तत्पश्चात इमरती व तेल में तली वस्तुओं का नैवेद्य अपर्ण करें। इसके बाद श्री फल सहित अन्य फल भी अर्पित करें। पंचोपचार पूजन के बाद शनि मंत्र का कम से कम एक माला जप भी करना चाहिये। माला जपने के पश्चात शनि चालीसा का पाठ करें व तत्पश्चात शनि महाराज की आरती भी उतारनी चाहिये।
शनि जयंती के दिन पूजा-पाठ करके काला कपड़ा या दाल तथा लोहे की वस्तु दान करने से शनि देव सभी कष्टों को दूर कर देते हैं। शनि देव को प्रसन्न करने के लिए तिल, उड़द, मूंगफली का तेल, काली मिर्च, आचार, लौंग, काले नमक आदि का प्रयोग करना चाहिए। भगवान शनिदेव को श्याम यानि काली वस्तुओं से अत्यधिक प्रेम होता है। शनिदेव की पूजा में काले तिल, उड़द की दाल आदि का भोग लगाया जाता है। शनि जयंती के अवसर पर आइयें आपको बनाना सिखाते हैं मीठी पुड़ी और उड़द की दाल की खिचड़ी बनाने की विधि। इन दोनों व्यंजनों को आप भगवान शनिदेव को भोग के रूप में अर्पित कर सकते हैं।

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