महामीडिया न्यूज सर्विस
महर्षि वेद विज्ञान परिचय प्रशिक्षण पूर्ण

महर्षि वेद विज्ञान परिचय प्रशिक्षण पूर्ण

Admin Chandel | पोस्ट किया गया 12 दिन 9 घंटे पूर्व
04/06/2019
भोपाल (महामीडिया) महर्षि वैदिक प्रशासक प्रशिक्षण संस्थान एवं महर्षि विश्व शाँति आन्दोलन द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित सात दिवसीय महर्षि वेद विज्ञान परिचय प्रशिक्षण आज शाम भव्य समापन समारोह के साथ पूर्ण हुआ। महर्षि सेंटर फॉर एजुकेशन एक्सीलैंस भोपाल के सभागृह में आयोजित इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में 8 प्रांतो के प्रशिक्षणार्थियों ने भाग लिया। इसमें दिल्ली, उत्तर प्रदेश, उत्तराखण्ड, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, तमिलनाडू, आन्ध्रप्रदेश और छत्तीसगढ़ के प्रतिभागी सम्मिलित थे।
समापन समारोह की अध्यक्षता करते हुए महर्षि विश्व शाँति आन्दोलन के अध्यक्ष ब्रह्मचारी गिरीश जी ने अपने उदबोधन में कहा कि "वेद विज्ञान में जीवन के समस्त क्षेत्रों का ज्ञान उपलब्ध है। हमारे भारतीय ऋषियों-महर्षियों, ब्रह्मऋषियों ने अपनी दिव्य दृष्टि व चेतना से वेद के दर्शन किये और उनकी ऋचाओं व मंत्रों  को वैसा ही लिपिबद्ध कर लिया। इस युग में परम पूज्य महर्षि महेश योगी जी ने अपने गुरुदेव स्वामी ब्रह्मानन्द सरस्वती जी महाराज के श्री चरणों में साधनारत होकर वेद विज्ञान का पूर्ण ज्ञान प्राप्त किया और उसे अत्यन्त सरल रूप में सम्पूर्ण विश्व को उपलब्ध करा दिया। वेद.विज्ञान के जीवनपरक सिद्धांत एवं वैदिक प्रायोगिक तकनीक सहज ही उपहार स्वरुप महर्षि जी ने हम सबको दे दी है। आज का जीवन अत्यन्त तनावपूर्णए चिंताग्रस्त हैए नागरिकों की बड़ी संख्या अवसाद में और रोगमय है। महर्षि जी प्रणीत भावातीत ध्यान योग की सरलए स्वाभाविकए प्राकृतिक तकनीक के नित्य प्रातः एवं संध्या 15.20 मिनिट के अभ्यास से जीवन की समस्त समस्याओं का शमन होकर सकारात्मकता का उदय होता हैए स्वभ्यासकर्ता के स्वयं की एवं समाज की सामूहिक चेतना में सतोगुण की अभिवृद्धि होती है।"
ब्रह्मचारी जी ने सभी को स्मरण कराया कि जीवन में साधना का यही समय है। यदि अभी साधना कर लेंगे तो वृद्धावस्था में स्वस्थ रहेंगेए अन्यथा वृद्धावस्था में रोगग्रस्त हो जाने पर भगवद साधनाए भजनए पूजनए श्रद्धाए भक्ति आदि का अवसर प्राप्त नहीं हो पायेगा। उन्होंने कहा कि ष्मानव जीवन आवागमन से मुक्ति.मोक्ष.निर्वाण के लिए है। हम सब माया के प्रभाव में पढ़कर अपने जीवन का परम लक्ष्य विस्मृत कर देते हैं। ब्रह्मचारी जी ने सभी का आवाहन किया कि जो ब्रह्मचर्य और गृहस्थ जीवन की आयु पार कर चुके हैं वे अब वानप्रस्थी होकर अपना अधिक समय भगवद साधना में व्यतीत करें।
इस अवसर पर प्रशिक्षण के संयोजक द्वय श्री विजय रत्न खरे, महर्षि विश्व शाँति आन्दोलन के महासचिव तथा श्री सुनील ओखदे, महर्षि विद्या मंदिर समूह के संयुक्त निदेशक ने प्रशिक्षणार्थियों को बधाई दी और ब्रह्मचारी जी को मार्गदर्शन के लिए धन्यवाद दिया।
प्रशिक्षण के दौरान विषय विशेषज्ञों में वैद्यराज श्री बालेंदु शेखर द्विवेदी, ज्योतियाचार्य पंडित परशुराम दीक्षित, स्थापत्यवेद आचार्य डॉ. शिवकुमार वर्मा, गंधर्ववेद संगीत शिक्षक प्रमोद पटेरिया तथा योगाचार्य श्री चितरंजन सोनी ने अपने-अपने विषयों का ज्ञान दिया।
महर्षि महेश योगी वैदिक विश्वविद्यालय के माननीय कुलपति प्रो. भुवनेश शर्मा ने इन सात दिनों में प्रशिक्षणार्थियों को महर्षि वेद विज्ञान, वैदिक गुरु परम्परा का इतिहास एवं महत्व व महर्षि संस्थान के वर्तमान कार्यक्रमों व भविष्य की योजनाओं से अवगत कराया। अंत में प्रशिक्षणार्थियों ने अपने-अपने अनुभव व पिछले सात दिनों में प्राप्त ज्ञान की व्याख्या अपने-अपने शब्दों में और मातृ भाषा में की।

और ख़बरें >

समाचार