महामीडिया न्यूज सर्विस
वैदिक प्रबन्धन रखने वाले बच्चे नहीं होते कभी निराश

वैदिक प्रबन्धन रखने वाले बच्चे नहीं होते कभी निराश

Admin Chandel | पोस्ट किया गया 16 दिन 4 घंटे पूर्व
04/06/2019
भोपाल (महामीडिया) महर्षि विद्या मंदिर के राष्ट्रीय कार्यालय एमसीई परिसर में तीन दिन से चल रहे 10 दिवसीय महर्षि वैदिक जीवन प्रशिक्षण शिविर में प्रातः काल सूर्याध्र्य एवं सूर्य नमस्कार योग, प्राणायाम, भावातीत ध्यान एवं सिद्धि कार्यक्रम के साथ विद्यार्थियों को वैदिक ज्ञान प्रदान कर जीवन को कैसे आनंदमय बनाया जा सकता है इस संबंध में बताया गया। महर्षि इन्स्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट भोपाल के निदेशक कर्नल डाॅ. तेजेन्दर प्रताप सिंह कान्द्रा ने कहा कि आज विद्यार्थियों में वैदिक ज्ञान की कमी देखी जा रही है जिसके चलते बड़ी संख्या में बच्चे जीवन में हताशा एवं निराशा महसूस कर रहे हैं। बच्चों को शिक्षा के साथ-साथ प्रकृति के सिस्टम को समझने की जरूरत है। जो बच्चे प्रकुति के साथ समन्वय स्थापित कर अध्ययन कार्य करते हैं वे असफल होने पर भी निराश न होकर निरंतर रहते हुए प्रगति हासिल कर लेते हैं। 
महर्षि विद्या मंदिर समूह के संचार व जनसम्पर्क राष्ट्रीय निदेशक व्ही. आर. खरे ने प्रशिक्षण के दौरान विद्यार्थियों से कहा कि वेद भारतीय संस्कृति के मूल हैं, विद्यार्थियों को वेदों का ज्ञान होना चाहिए। वैदिक ज्ञान के पढ़ने से बच्चों में अच्छे संस्कारों का विकास होता है। हमारे ऋषि-मुनियों ने मानव जीवन को पवित्र एवं मर्यादित बनाने के लिये संस्कारों का अविष्कार किया। वेद मंत्रों, यज्ञीय वातावरण एवं संस्कार सूत्रों की प्रेरणाओं से शिशु के मानस पर श्रेष्ठ प्रभाव पड़ता है। 
विश्व विख्यात ज्योतिषाचार्य विजय कुमार द्धिवेदी जी ने आधुनिक युग में विद्यार्थियों को ज्योतिष की जानकारी रखने एवं उसका जीवन में क्या महत्व है इस संबंध में जानकारी प्रदान की। आचार्य द्विवेदी ने कहा कि वेद को समझने के लिए ज्योतिष शास्त्र को जानना अति आवश्यक है। वेद चार है एवं उपवेद के छः अंग -1 ज्योतिष 2. व्याकरण 3. शिक्षा 4. निरुक्त 5. कल्प 6. छंद हैं। शुद्ध समय के लिए पंचांग को जाना जाता हैं। आचार्य द्धिवेदी जी द्वारा तिथियों एवं नक्षत्रों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। भावातीत ध्यान की विद्यार्थियों से चेकिंग की गई। 
ध्यान शिक्षिका कल्पना श्रीवास्तव, जाग्रति सोनी एवं दृशिका सोनी ने ध्यान कैसे करना है एवं इसकी क्या विधियां हैं इस विषय पर विस्तार से जानकारी दी। दृशिका सोनी द्वारा भावातीत ध्यान की विधि को प्रोजेक्टर के माध्यम से प्रयोगात्मक रूप से विस्तारपूर्वक बताया गया। वैद्य बालेन्दु शेखर द्धिवेदी ने आयुर्वेद पद्धति को अपनाकर कैसे सुखी रहा जा सकता है एवं वात-पित-कप के संतुलन का हमारे जीवन में क्या महत्व है यह समझाया गया। वैद्य श्री ने बताया कि सभी विकार आहार से आते हैं जैसा अन्न ग्रहण किया जाता है वैसा ही मन बनता है। पंचतत्व ही हमारे शरीर को संतुलित रखते हैं इनके असंतुलन से मानव के शरीर का भी संतुलन बिगड़ जाता है। आकाश एवं वायु मिलकर वात का निर्माण, अग्नि एवं जल मिलकर पित का निर्माण, जल एवं पृथ्वी मिलकर कप का निर्माण करते हैं। इन सब के संतुलन को बनाए रखने के लिए वैदिक ज्ञान को समझना जरूरी है। महा मीडिया पत्रिका के संपादक नितीश परमार ने माता-पिता को सबसे अच्छा मैनेजमेंट गुरू बताते हुए कहा कि हमें अपने आस-पास रह रहे वरिष्ठ जनों से उनके अनुभव जानने चाहिए। प्रशिक्षण के दौरान अनेक उदाहरणों के माध्यम से बच्चों को विभिन्न वैदिक रहस्यों की जानकारी दी गई।

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