महामीडिया न्यूज सर्विस
पर्यावरण दिवस आज : कचरे का ढेर बनता एवरेस्ट

पर्यावरण दिवस आज : कचरे का ढेर बनता एवरेस्ट

Admin Chandel | पोस्ट किया गया 12 दिन 17 घंटे पूर्व
05/06/2019
 नई दिल्ली [महामीडिया] हिमालय की गोद में समाया माउंट एवरेस्ट दुनिया का सबसे ऊंचा शिखर है. सफेद बर्फ की चादर ओढ़े सदियों से खड़े इस विशालकाय शिखर की ऊंचाई करीब 29,029 फीट है. एक जमाने में श्वेत और स्वच्छता का प्रतीक कहा जाने वाला एवरेस्ट आज कूड़े का ढेर बनता जा रहा. पर्यावरण दिवस के मौके पर जानते हैं कि आखिर एवरेस्ट पर इतनी गंदगी फैलने की असली वजह क्या है.दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट पर जाने वाले धनी पर्वतारोहियों की संख्या में हर साल इजाफा होता है. इस वर्ष भी 600 से ज्यादा लोग इस चोटी तक पहुंच चुके हैं. यहां जाने वाला प्रत्येक पर्वतारोही अपनी सुरक्षा की पूरी व्यवस्था होने के बाद ही ऊपर जाता है. एवरेस्ट पर चढ़ने वाले पर्वतारोही तो सुर्खियों आते हैं, लेकिन उनके द्वारा फैलाए गए कचरे का कोई जिक्र नहीं होता.एवरेस्ट पर जाने के बाद पर्वतारोही अपने टेंट, उपकरण, खाली गैस सिलंडर, प्लास्टिक की बोतल और जंक फूड के पैकेट आदि जैसी तमाम चीजें वहीं छोड़ आते हैं. 18 बार एवरेस्ट की चढ़ाई करने वाली पेम्बा दोरजे शेरपा खुद इसके समर्थन में नहीं है. पर्वतारोहियों की इस लापरवाही की वजह से आज एवरेस्ट एक कचरे का ढेर बन गया है.इसी वर्ष नेपाल में 14 अप्रैल से शुरू हुए महत्वकांक्षी सफाई अभियान के तहत माउंट एवरेस्ट से करीब 3000 किलोग्राम ठोस कचरा हटाया गया था. इसके बाद भी एवरेस्ट पर काफी ज्यादा कचरा फैला हुआ है. कचरे की सफाई का जिम्मा सोलुखुंबु जिले का खुम्बु पासाडल्हामु नगर निकाय उठाया है. इसका लक्ष्य माउंट एवरेस्ट से करीब 10,000 किलोग्राम कचरा हटाना है. इस अभियान में नेपाल सरकार ने करीब 2.3 करोड़ नेपाली रुपये खर्च किए थे.पर्वतारोहियों को एवरेस्ट पर भेजने वाली संस्थाओं को इसे सुरक्षित रखने की पहल करनी होगी. चढ़ाई से पहले उन्हें स्वच्छता को लेकर सख्त निर्देश देने चाहिए. जंक फूड या पैकिंग फूड की बजाए दूसरे विकल्पों पर विचार किया जाना चाहिए. इसे लेकर सख्त नियम बनाने चाहिए ताकि लोग कचरा फेंकना बंद करें.

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