महामीडिया न्यूज सर्विस
अमेरिका से नौकरी छोड़ सरपंच बनी महिला बदल रही है गांव की तस्वीर

अमेरिका से नौकरी छोड़ सरपंच बनी महिला बदल रही है गांव की तस्वीर

admin | पोस्ट किया गया 11 दिन 7 घंटे पूर्व
08/06/2019
भोपाल (महामीडिया) अमेरिका में नौकरी छोड़ गांव की सरपंच बनी 'भक्ति' को पीटर्सबर्ग इंटरनेशनल इकोनॉमिक फोरम की ओर से आमंत्रित किया गया है। सरपंच 'भक्ति' देश की 100 प्रभावशाली महिलाओं में भी शामिल हो गई हैं। कोई भी सरकारी योजना को गांव में अमल करवाना हो तो कोई 'भक्ति' से सीखे। मध्य प्रदेश की बरखेड़ी अब्दुल्ला ग्राम पंचायत की युवा सरपंच 'भक्ति शर्मा' यह बात अब दुनिया को भी बताने जा रही हैं। भोपाल के नूतन कॉलेज से राजनीति विज्ञान में एमए करने वाली भक्ति शर्मा सरकारी योजनाओं के तहत पंचायत में काम करने के लिए विभाग के सचिव से लेकर राज्य और केंद्रीय मंत्रियों तक से बेहिचक मिलती हैं। कहती हैं, मैं हर योजना का बारीकी से अध्ययन करती हूं। लिहाजा, कोई भी गैर जरूरी अड़चन आए तो इसे दूर करना भी मुझे आता है। भक्ति शर्मा अपनी पंचायत की मिसाल बन चुकी हैं। भक्तिकी पंचायत में करीब-करीब हर पात्र व्यक्ति तक उससे संबंधित योजना पहुंची है। ग्रामीण इलाकों में सरकारी योजनाओं के इस क्रियान्वयन से प्रभावित होकर ही इंटरनेशनल इकोनॉमिक फोरम ने उन्हें आमंत्रित किया। रूस रवाना होने से पहले भक्ति ने बताया कि वे फोरम में बताएंगी कि किस तरह सरकारी योजनाओं का बेहतर क्रियान्वयन कर ग्रामीण विकास को अपेक्षित गति दी जा सकती है और सतत विकास लक्ष्य-2030 की दिशा में लक्षित सफलता पाई जा सकती है। 6-8 जून के बीच होने जा रहे इस सम्मेलन में भक्ति 120 देशों के प्रतिनिधियों के सामने अपनी पंचायत की बात रखेंगी और विकास यात्रा से सभी को परिचित कराएंगी। बता दें कि 2015-16 में भक्तिशर्मा अमेरिका से नौकरी छोड़कर भारत लौटी थीं और पिता के कहने पर अपनी ग्राम पंचायत में सरपंच का चुनाव जीता था। कुछ समय पहले उन्हें भारत की 100 सबसे प्रभावशाली व लोकप्रिय महिलाओं की सूची में भी शामिल किया गया। भक्ति ने गांव में नारी सशक्तीकरण की नई धारा बहा दी। जात- पात पर भी प्रहार किया और भ्रष्ट सरकारी तंत्र का भी डटकर सामना किया। भक्ति ने बताया कि उनकी पंचायत के हर घर में शौचालय है और पंचायत खुले में शौच से मुक्त घोषित हो चुकी है। हर पात्र परिवार के पास राशनकार्ड है और उसे बिना किसी बाधा राशन मिल रहा है। पंचायत में कुपोषण का नामोनिशान नहीं है। आवास योजना के तहत 200 पात्र परिवारों के पक्के मकान बन चुके हैं। सभी के पास बिजली कनेक्शन है। गांवों में स्ट्रीट लाइट व्यवस्था है। पानी की टंकी और पेयजल सप्लाई है। इसके साथ ही पंचायत में आयुष ग्राम योजना को भी लागू करने की कोशिश कर रही हैं। बता दें कि 1997 से सेंट पीटर्सबर्ग इकोनॉमिक फोरम का यह सम्मेलन हर साल होता है। 2017 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इस सम्मेलन में गए थे।
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