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महिला हाॅकी का रोल मॉडल बनी कश्मीर की बेटी

महिला हाॅकी का रोल मॉडल बनी कश्मीर की बेटी

Admin Chandel | पोस्ट किया गया 73 दिन 4 घंटे पूर्व
13/06/2019
श्रीनगर (महामीडिया) वह कश्मीर की वादियों में पली-बढ़ी, कॉलेज तक पहुंचते-पहुंचते उसका कभी किसी खेल से नाता नहीं रहा। हां, यह जरूर था कि वह कालेज में कुछ लड़कियों को हॉकी खेलते हुए टकटकी लगाये देखा करती थी। धीरे-धीरे उसे ऐसा लगा कि हॉकी का मैदान उसे बुला रहा है। एक बार उसने स्टिक हाथ में थामी तो फिर सब कुछ बदल गया। कश्मीर की अलगाववादी सियासत का केंद्र बन चुके लालचौक की भीड़ से मात्र 12 किलोमीटर दूर करालपोरा की यह बेटी इनायत फारुक अब सिर्फ साधारण छात्रा नहीं रही। हॉकी अब इनायत की पहचान बन गई और उस पहचान ने रुढि़यों को तोड़कर आगे बढ़ने की चाह रखने वाली कश्‍मीर की बेटियों काे एक सपना दे दिया। इनायत आतंकवाद, कट्टरपंथियों के तालिबानी फरमान से सबसे ज्यादा प्रभावित कश्मीर की महिलाओं की उस पीढ़ी का नेतृत्व कर रही है, जो रुढि़वाद की बेड़ियों को तोड़ आगे बढ़ने के लिए तैयार खड़ी हैं। वह कश्‍मीर में महिला हाॅकी का रोल मॉडल बन गई है, क्योंकि 25 साल में घाटी से नेशनल हाकी के किसी कैंप और सीनियर हॉकी प्रतियोगितयों में हिस्सा लेने वाली वह एकमात्र लड़की है। इनायत बताती है कि यह बदलाव अचानक सा उसकी जिंदगी में आया। हॉकी के इस जुनून के बारे में वह बताती हैं- कालेज ग्राउंड में कुछ लड़कियों को हाॅकी खेलते देखा। लगा ग्राउंड उसे भी बुला रहा है। बस थाम ली स्टिक। उसके बाद फिर बहुत कुछ बदल गया। यह बदलाव इतना आसान भी नहीं था। पहली लड़ाई घर से ही थी। इनायत बताती हैं कि कालेज के भीतर तो ठीक था लेकिन घर में बात बिगड़ गई। पिता नाराज हुए कि यह कौन सा खेल है। उनका मानना था कि हॉकी लड़कियों के लिए नहीं है। परिवार, पड़ोस और समाज के सवालों की फेहरिस्‍त थी। घर से हॉकी लेकर निकलती थी तो लोग हैरानी से देखते हुए आपस में बात करते थे।लेकिन मैं नजर अंदाज कर देती थी। पेशे से लोहार उसके पिता फारुक अहमद ने कहा कि मैंने ख्वाब में भी नहीं सोचा था कि इनायत हमारा नाम यूंं रोशन करेगी। डरता था कि क्या खेल खेल रही है। मैने खुद कभी हॉकी नहीं पकड़ी थी। बाकी यहां के हालात आप समझ सकते हैं। खुदा का शुक्र है कि वह मेरी बेटी को कामयाब कर रहा है।
इनायत ने कहा कि मेरे खेल को देखते हुए डिवीजनल स्पोर्ट्स आफिसर व अन्य खेल अधिकारियों ने मुझे प्रोत्साहित किया। दो साल पहले वर्ष 2017 में मैने पटियाला में नेताजी सुभाष इंस्टीच्यूट आॅफ स्पाेर्ट्स में आयोजित कैंप में हिस्सा लिया। वहां से हेल्थ एंड फिटनेस में सर्टिफिकेट कोर्स किया। मैने बंगलुरु में राष्ट्रीय प्रतियोगिता में अपनी राज्य का प्रतिनिधित्‍व किया। उसके बाद बीते साल मैंने रांची में भी खेला। कश्मीर में खेल सुविधाओं का जिक्र करते हुए वह बताती हैं कि यहां सुविधाओं का अभाव है। अभ्यास करने के लिए एक सिंथेटिक टर्फ भी नहीं है। उसने कहा कि मैं एक दिन राष्ट्रीय टीम का अंतरराष्‍ट्रीय स्‍तर पर प्रतिनिधित्व करने की तैयारी कर रही हूं। मैं चाहती हूं कि यहां हाॅकी खेलने वाली दुनिया की सबसे बेहतर लड़कियां तैयार करने वाली कोच बनूं।

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