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विश्व प्रसिद्ध जगन्नाथ रथ यात्रा की तैयारियां जोरों पर

विश्व प्रसिद्ध जगन्नाथ रथ यात्रा की तैयारियां जोरों पर

Admin Chandel | पोस्ट किया गया 177 दिन 6 घंटे पूर्व
17/06/2019
भुवनेश्वर (महामीडिया) पुरी में निकलने वाली विश्व प्रसिद्ध जगन्नाथ रथ यात्रा की तैयारियां जोरों पर चल रही हैं। चार जुलाई से यह रथयात्रा प्रारंभ होगी। इस रथ यात्रा में विश्व के कोने-कोने से श्रद्धालु शामिल होंगे। भगवान जगन्नाथ, भाई बलदेव और बहन सुभद्रा तीन रथों पर सवार होकर श्रद्धालुओं पर अपनी कृपा दृष्टि बरसाने दर्शन देंगे। बता दें कि अक्षय तृतीया पर नए रथों का निर्माण शुरू हो चुका है। तीन विशाल रथों के निर्माण के लिये लगभग 200 कारीगर रात-दिन कार्य पर जुटे हुए हैं। रथयात्रा वाले दिन भगवान इसी रथ पर सवार होते हैं। वहां का राजा स्वर्ण झाड़ू लगाकर रथयात्रा का शुभारंभ करवाता है। 
जगन्नाथ मंदिर से रथयात्रा शुरू होकर पुरी नगर से गुजरते हुए ये रथ गुंडीचा मंदिर पहुंचते हैं। यहां भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा सात दिनों के लिए विश्राम करते हैं। गुंडीचा मंदिर में भगवान जगन्नाथ के दर्शन को ?आड़प-दर्शन? कहा जाता है। गुंडीचा मंदिर को 'गुंडीचा बाड़ी' भी कहते हैं। यह भगवान की मौसी का घर है। इस मंदिर के बारे में पौराणिक मान्यता है कि यहीं पर देवशिल्पी विश्वकर्मा ने भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी की प्रतिमाओं का निर्माण किया था। कहते हैं कि रथयात्रा के तीसरे दिन यानी पंचमी तिथि को देवी लक्ष्मी, भगवान जगन्नाथ को ढूंढते हुए यहां आती हैं। तब द्वैतापति दरवाज़ा बंद कर देते हैं, जिससे देवी लक्ष्मी रुष्ट होकर रथ का पहिया तोड़ देती है और ?हेरा गोहिरी साही पुरी? नामक एक मुहल्ले में, जहां देवी लक्ष्मी का मंदिर है, वहां लौट जाती हैं। बाद में भगवान जगन्नाथ द्वारा रुष्ट देवी लक्ष्मी मनाने की परंपरा भी है। यह मान-मनौवल संवादों के माध्यम से आयोजित किया जाता है, जो एक अद्भुत भक्ति रस उत्पन्न करती है।
आषाढ़ माह के दसवें दिन सभी रथ पुन: मुख्य मंदिर की ओर प्रस्थान करते हैं। रथों की वापसी की इस यात्रा की रस्म को बहुड़ा यात्रा कहते हैं। जगन्नाथ मंदिर वापस पहुंचने के बाद भी सभी प्रतिमाएं रथ में ही रहती हैं। देवी-देवताओं के लिए मंदिर के द्वार अगले दिन एकादशी को खोले जाते हैं, तब विधिवत स्नान करवा कर वैदिक मंत्रोच्चार के बीच देव विग्रहों को पुनः प्रतिष्ठित किया जाता है। वास्तव में रथयात्रा एक सामुदायिक पर्व है। इस अवसर पर घरों में कोई भी पूजा नहीं होती है और न ही किसी प्रकार का उपवास रखा जाता है। एक अहम् बात यह कि रथयात्रा के दौरान यहां किसी प्रकार का जातिभेद देखने को नहीं मिलता है। समुद्र किनारे बसे पुरी नगर में होने वाली जगन्नाथ रथयात्रा उत्सव के समय आस्था और विश्वास का जो भव्य वैभव और विराट प्रदर्शन देखने को मिलता है, वह दुनिया में और कहीं दुर्लभ है।
राज्य सरकार भी रथ यात्रा की तैयारियों में जुटी हुई है। सरकार ने 200 नई बसें चलाने का निर्णय लिया है। हमैंशा की तरह कुछ स्पेशल ट्रेनें भी चलाई जाएंगी। फानी तूफान के कारण श्रीमंदिर को भी क्षति पहुंची है। लगभग पांच करोड़ की क्षति का अनुमान लगाया गया है। बता दें कि पुरी स्थित जगन्नाथ मंदिर भारत के चार पवित्र धामों में से एक है।

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