महामीडिया न्यूज सर्विस
चमकी बुखार से 24 देश परेशान

चमकी बुखार से 24 देश परेशान

admin | पोस्ट किया गया 65 दिन 9 घंटे पूर्व
18/06/2019
पटना (महामीडिया) बिहार के मुजफ्फरपुर में अभी भी चमकी बुखार का कहर जारी है। मुजफ्फरपुर में अब तक 108 बच्चों की मौत हो चुकी है जबकि सैंकड़ों बच्चे अभी भी जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे हैं। केंद्र और राज्य सरकार दोनों ही बच्चों की सुरक्षा के लिये ताकत लगा रहे हैं, लेकिन हर कोशिश नाकाफी साबित हो रही है। चमकी बुखार ऐसी महामारी बनकर सामने आई है जिसके सामने विज्ञान भी बौना नजर आ रहा है। 
चमकी बुखार से सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि दुनिया के 24 देश भी परेशान हैं। इस बीमारी से हर साल दुनिया के 24 देशों में 13600 से 20400 बच्चों की मौत होती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट के अनुसार इन 24 देशों के करीब 300 करोड़ लोगों पर इसके संक्रमण का खतरा रहता है। अगर सिर्फ भारत की बात करें तो राष्ट्रीय वैक्टर जनित रोग नियंत्रण कार्यक्रम के अनुसार 2011 से अब तक यानी आठ साल में एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम और जैपेनीज इंसेफेलाइटिस यानी चमकी बुखार के 91968 मामले सामने आए हैं। इनमें से 11254 लोगों की मौत हो चुकी है. इनमें से 99% पीड़ित 15 साल से कम उम्र के बच्चे थे।  देश के 20 राज्यों में 178 जिलों में एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम और जैपेनीज इंसेफेलाइटिस का प्रकोप करीब-करीब हर साल फैलता है।  ये राज्य है - आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, असम, बिहार, दिल्ली, गोवा, हरियाणा, झारखंड, कर्नाटक, केरल, महाराष्ट्र, मणिपुर, मेघालय, नगालैंड, पंजाब, त्रिपुरा, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पश्चिम बंगाल। 
मुजफ्फरपुर में हर गुजरते दिन के साथ मौत का आंकड़ा बढ़ता जा रहा है। कल भी चमकी बुखार से मजफ्फरपुर के दो अस्पतालों में 5 बच्चों की मौत हो गई। सरकार से लेकर डॉक्टर तक चमकी बुखार के सामने लाचार नजर आ रहे हैं। सबसे हैरान करने वाली बात ये है कि अबतक ये पता नहीं लग सका है कि चमकी बुखार का कारण क्या है। डॉक्टरों का कहना है कि एकबार बारिश शुरू हो जाए तो फिर इस बीमारी का असर धीरे धीरे कम हो जाएगा। मुख्यमंत्री नीतिश कुमार ने भी आज अस्पताल का दौरा किया। 
दरअसल, जेई क्यूलेक्स मच्छर के काटने से होता है। यह रात में काटता है। यह सब मानसून से पहले और मानसून के बाद जब खेतों में पानी जमा हो जाता तब होता है। इसका इलाज भी अन्य एईएस की तरह ही होता है। इसके अलावा जिन बच्चों का इम्यून सिस्टम कमजोर होता है उन्हें भी इसका खतरा अधिक है।
स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी की गई गाइडलाइन के अनुसार, इस बीमारी की शुरूआत बुखार से होती है, जो धीरे-धीरे बढ़ने लगता है और फिर गंभीर रूप ले लेता है। इसके अलावा इस बीमारी में ओर कई लक्षण दिखाई देते हैं जैसे- शुरुआत तेज बुखार, शरीर में ऐंठन महसूस होना, तंत्रिका संबंधी कार्यों में रुकावट आना, मांसपेशियों और हड्डियों में दर्द, कमजोरी, थकान और बेहोशी, सुनने और बोलने में परेशानी, दौरे पड़ना,घबराहट महसूस होना, बच्चे का चिड़चिड़ा होना।डॉक्टर्स का कहना है कि इस तरह के लक्षण दिखने पर तुरंत जांच करवाएं क्योंकि सावधानी से बच्चे की जान बचाई जा सकती है। 

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