महामीडिया न्यूज सर्विस
विश्वभर ने 'योग' की सार्थकता को स्वीकार किया है

विश्वभर ने 'योग' की सार्थकता को स्वीकार किया है

admin | पोस्ट किया गया 58 दिन 21 घंटे पूर्व
20/06/2019
भोपाल (महामीडिया) भागमभाग वाली जिंदगी और बदलती जीवनशैली के कारण आज हम किसी न किसी रोग से ग्रस्त हैं। लगभग 90 फीसदी भारतीय आज की बदलती जीवनशैली के कारण तनाव के शिकार हैं। सुविधाएं आपको स्वस्थ नहीं बना सकतीं। दुनिया के बड़े चिकित्सक, शोध संस्थान भी यह मान रहे हैं कि विचारों को सकारात्मक दिशा देकर स्वास्थ्य में बड़ा बदलाव किया जा सकता है जो कि योग और ध्यान से संभव है।  योग से न सिर्फ आपका मानसिक संतुलन ठीक रहता है, बल्कि आपका तन- मन भी पूरी तरह फिट रहता है। यही कारण है कि विश्वभर ने इसकी सार्थकता को स्वीकार किया है। यदि योग करते हैं तो आप महसूस कर सकते हैं कि महज अपनी सांस पर ध्यान केंद्रित करने से यानी प्राणायाम करने से शरीर का दर्द भी दूर हो जाता है। अगर दर्द भी रहता है तो वह सामान्य होता जाता है। यदि योग नियमित करते रहें तो आप पाएंगे कि एक दिन तनाव पैदा करने वाले दैनिक जीवन के कारक खुद-ब-खुद आपसे दूर जाने लगे हैं। योग दवा की तरह काम नहीं करता। यह आपके जीवन में बदलाव लाता है। मन को शांत कर सरल बनाता है ताकि आप विपरीत परिस्थितियों में भी संयमित रह सकें। तनाव की स्थिति में सांसें धीरे या तेज हो जाती हैं। कभी रुक- रुक कर चलती हैं। जो चीज संभव नहीं या जो नियंत्रण में नहीं, आपका दिमाग उस पर टिक जाता है। यही तनाव, चिंता के कारण हैं। योग से इस स्थिति पर नियंत्रण पाया जा सकता है। 
योग करते हुए प्रसन्नता उत्पन्न करने वाले हार्मोन का स्राव होता है। योग मस्तिष्क में कुछ रसायनों के स्तर को बढ़ाकर अवसाद की गंभीरता को कम करने में मदद करता है। योग से तनाव पैदा करने वाले हार्मोन कॉर्टिसोल में कमी होती है। तनाव बढ़ाने वाले हार्मोन और मस्तिष्क में सूजन बढ़ाने वाले अणुओं का स्तर कम हो जाता है। दवाएं और मनोवैज्ञानिक उपचार पद्धतियां अवसाद को ठीक करने के लिए एक तरीका हो सकती है लेकिन योग उनमें सबसे बेहतर उपाय है।
यदि आपको किसी तरह की शारीरिक परेशानी है, हाई बीपी या हाइपरटेंशन आदि की शिकायत है, तो आप किसी प्रशिक्षित योग विशेषज्ञ की निगरानी या निर्देश में रहकर योग करें। ऐसे मरीज को ज्यादा जोर से सांस लेने या छोड़ने आदि को लेकर सतर्क रहना होता है। इसी तरह, पीठ दर्द की समस्या है तो शरीर को मोड़ने या झटके देकर योग करने की प्रक्रिया को छोड़ना ही श्रेयस्कर है। याद रखें, हर आसन अलग है, हर व्यक्ति भी अलग है, उसे उसी अनुसार आसन का चयन करना चाहिए। याद रहे, आसन वही हो, जो आसान हो। आपको कोई दिक्कत न हो। यदि आपको लगता है कि आप कोई खास आसन नहीं कर सकते या आपका शरीर उसके लिए तैयार नहीं तो जबर्दस्ती न करें। शरीर के साथ एक रिश्ता बनाएं, आपको तब उसका प्रभाव भी दिखेगा। अक्सर लोग योग का असर कितने दिन में दिखेगा, जैसे सवाल करते हैं। यह स्वाभाविक है। अगर आप यदि सही तरीके से ओम का उच्चारण भी करें तो आप 10 से 11 दिन बाद बाद ही अच्छा महसूस करने लगेंगे। भ्रस्त्रिका और अनुलोम-विलोम प्राणायाम का प्रभाव 20 से 25 दिनों में दिख जाता है। हालांकि यह व्यक्ति-व्यक्ति पर निर्भर करता है।  
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