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गुरू ही सुख प्राप्ति का साधन- ब्रह्मचारी गिरीश

गुरू ही सुख प्राप्ति का साधन- ब्रह्मचारी गिरीश

Admin Chandel | पोस्ट किया गया 61 दिन 6 घंटे पूर्व
20/06/2019
भोपाल (महामीडिया) 'अपना जीवन व्यर्थ-बर्बाद करने के लिए नहीं है, बल्कि सहर्ष जीने-करने के लिये है। अर्थात आनंदपूर्वक जीवन जीने के लिए है। इसके लिए हमें दैनिक दिनचर्या को संतुलित करना चाहिए। अर्थात हमें वैदिक दिनचर्या अपनाये जाने की जरूरत है। गुरू ही सुख प्राप्ति का साधन है। यह बात हमें वैश्विक संत महर्षि महेश योगी जी के जीवन से मिलती है।' उक्त उद्गार आज महर्षि सेंटर फार एजूकेशनल एक्सीलेंस, लांबाखेड़ा, भोपाल में महर्षि चेतना आधारित प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए महर्षि विद्या मंदिर विद्यालय समूह के अध्यक्ष ब्रह्मचारी गिरीश जी ने कहे। 
ब्रह्मचारी गिरीश जी ने आगे कहा कि समय प्रबंधन इसमें महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन कर सकता है। व्यक्तिगत जीवन एवं प्रोफेशनल जीवन में आज सामंजस्य नहीं है। होना यह चाहिए कि व्यक्ति के दोनों जीवन में उत्साह, शांति एवं उल्लास बना रहे। महर्षि महेश योगी जी ने इसके लिए अलौकिक एवं ज्ञान का अथाह भंडार दिया है। इसमें से एक भावातीत ध्यान भी है। जिसको अपनाकर जीवन को आनंदित बनाने का प्रयास करना चाहिए। हम मंदिर इसलिए जाते हैं कि साकार को देखकर अंदर का निराकर जागृत हो जाये अर्थात हम भगवान को स्वयं अपने अंदर महसूस कर सकें, वह भी साकार रूप में। भावातीत चेतना में सभी देवताओं का वास है। जब हम ध्यान करते हैं तो समस्त प्राकृतिक विधि एवं देवी-देवता संपर्क में आ जाते हैं। इससे इन देवी-देवताओं के गुणों का लाभ हमें मिलता है। अर्थात हमारी चेतना में जागृत हो जाते हैं। वैदिक साहित्य को बार-बार पढ़ना चाहिए ताकि चेतना के स्तर पर समस्याओं का समाधान समय पर मिल सके। महर्षि जी एक उदाहरण देते थे कि एक मैदान में हरी घास उगी हुई है यदि उस पर अग्नि रख देंगे तो कोई फर्क नहीं पड़ेगा। किंतु यदि सूखी हुई घास हुई तो पूरे मैदान में आग फैल जायेगी। उसी तरह यदि हमारी चेतना जागृत होगी तो अपने आप हमारे समूह के लोगों में स्थानांतरित होगी और पूरे समूह को इसका लाभ मिलेगा। मौलिक चेतना कभी हटती नहीं है। समय की सीमा का निर्धारण करना यदि व्यक्ति सीख जाता है तो उसके सारे कर्म सफल होते हैं और यह व्यक्ति को स्वयं करना होता है। इसीलिए महर्षि चेतना आधारित शिक्षा को अपनाये जाने की जरूरत है।
इस पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन महर्षि विद्या मंदिर विद्यालय समूह एवं महर्षि वैदिक प्रशासन प्रशिक्षण संस्थान द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित किया गया था। इसमें महर्षि विद्या मंदिर विद्यालय समूह के नवनियुक्त 32 प्राचार्यों को प्रशिक्षण दिया गया। इस अवसर पर महर्षि विद्या मंदिर विद्यालय समूह के निदेशक संचार एवं जनसंपर्क व्ही.आर. खरे, महर्षि महेश योगी वैदिक विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. भुवनेश शर्मा, एम.सी.बी.ई की समन्वयक श्रीमती रीता पांडेय एवं रामविनोद सिंह गौर उपस्थित थे एवं अपने विचार साझा किये।

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