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महर्षि महेश योगी जी ने ही योग-ध्यान को फैलाया है दुनिया भर में: ब्रह्मचारी गिरीश

महर्षि महेश योगी जी ने ही योग-ध्यान को फैलाया है दुनिया भर में: ब्रह्मचारी गिरीश

admin | पोस्ट किया गया 120 दिन 23 घंटे पूर्व
21/06/2019
भोपाल (महामीडिया) महर्षि महेश योगी संस्थान के प्रमुख ब्रह्मचारी गिरीश जी ने 'अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस' के उपलक्ष्य में सभी लोगों को योग-ध्यान के प्रति शुभकमानाएं देते हुए कहा कि महर्षि महेश योगी जी ने ही अपने प्रयासों से भावातीत ध्यान और योग को 124 देशों में फैलाया है। यही वजह है कि अब 'अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस' एक उत्सव के रूप में मनाया जाने लगा है।
ब्रह्मचारी गिरीश जी ने अपने एक संदेश में यह भी बताया कि संयुक्त राष्ट्र संघ की बैठक में किसी भी प्रस्ताव को पास कराना बहुत कठिन होता है लेकिन हमारे देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने महर्षि जी की योग-ध्यान की महत्ता को समझते हुए इसको अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर एक 'योग दिवस' के रूप में मनाने का निर्णय लिया और उसे संयुक्त राष्ट्र संघ में एक मत के साथ 'अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस' के रूप में पास करवाया। ब्रह्मचारी जी ने बताया कि जिन-जिन देशों में महर्षि जी ने वेद ज्ञान के साथ भावातीत ध्यान और योग को अवगत कराया था उन सभी देशों ने महर्षि जी के ज्ञान को स्वीकार किया और अब जाकर सबने एकजुट होकर 'अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस' पर सहमति दी।
महर्षि संस्था के रतनपुर स्थित महर्षि विद्या मंदिर में 'अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस' पर आज एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें ब्रह्मचारी गिरीश जी का संदेश लोगों तक पहुंचाया गया। कार्यक्रम में स्कूल के छात्र-छात्राओं और शिक्षकों ने सर्वप्रथम सूर्य नमस्कार के साथ योग किया फिर विभिन्न आसनों का प्रदर्शन योग गुरु सी.आर. सोनी जी के मार्गदर्शन में हुआ। इस अवसर पर योग गुरु ने योग आसनों के बारे में विस्तृत जानकारी भी दी। इसके बाद भावातीत ध्यान कार्यक्रम आरंभ हुआ। भावातीत ध्यान और योग के बारे में महर्षि वैदिक विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. भुवनेश शर्मा ने भी विस्तृत प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आज कल 'योग' की गलत व्याख्या समझ ली जाती है। जबकि वास्तविक योग केवल योगासन ही नहीं है बल्कि योग सिर्फ भावातीत ध्यान से ही प्रेरित होता है, जिसका उल्लेख श्रीमद्भगवत गीता में भी है। उन्होंने बताया कि महर्षि पातांजलि के सूत्रों का किस प्रकार उपयोग किया जाता है, वह भी महर्षि महेश योगी जी ने ही विश्व को बताया है।
श्री शर्मा ने यह भी बताया कि महर्षि विद्यालय एवं महर्षि वैदिक विश्वविद्यालय में अध्ययन किए हुए लोगों को विदेशों में बहुत सम्मान मिलता है। उन्होंने यह भी बताया कि विदेशों में नौकरी के लिए इंटरव्यू में योग-ध्यान के सम्बन्ध में भी प्रश्न पूछे जाते हैं। जब इन देशों को पता चलता है कि प्रतिभागी ने महर्षि संस्थान से शिक्षा ली है तो उसे तुरंत लाभ मिल जाता है। उन्होंने बताया कि ऐसे कई लोग विदेशों में कार्य कर रहे हैं।
महर्षि संस्थान के डायेरेक्टर (सीपीआर) व्ही.आर. खरे ने एक अच्छी जानकारी देते हुए बताया कि महर्षि के वेद-विज्ञान में अगर किसी ने भी पीएचडी की है तो उसे संस्था में ही समुचित वेतन पर तुरंत सेवा में रख लिया जावेगा। 
कार्यक्रम में एमसीव्हीई की समन्वयक श्रीमती रीता पांडेय, टी.एम. सिद्धि कार्यक्रम के राष्ट्रीय संयोजक राम विनोद सिह गौर, मध्यप्रदेश की विश्व शांति आंदोलन की अध्यक्षा श्रीमती रीता प्रकाशम, महर्षि विश्व शांति आंदोलन की राष्ट्रीय संचार सचिव श्रीमती आर्यानंद कुमार सहित महर्षि विद्या मंदिर रतनपुर के प्राचार्य बी.एस. गुलेरिया मंच पर उपस्थित थे।
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