महामीडिया न्यूज सर्विस
15 जुलाई को विक्रम और प्रज्ञान जा रहे हैं चंद्रयान-2 के साथ

15 जुलाई को विक्रम और प्रज्ञान जा रहे हैं चंद्रयान-2 के साथ

Admin Chandel | पोस्ट किया गया 42 दिन 19 घंटे पूर्व
11/07/2019
बेंगलूरु [ महामीडिया ]   देश में बना चंद्रयान-2 चांद पर 15 जुलाई को अलसुबह 2:15 बजे लांच किया जाएगा। इस अभियान के साथ कई नई चीजें जुड़ी हुई हैं। इसरो प्रमुख डॉ. के सिवान ने बताया कि चंद्रयान-2 को चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर भेजा जा रहा है। यह बात इसलिए अहम है क्योंकि यहां आज तक कोई भी देश नहीं पहुंच पाया है। चंद्रमा का यह हिस्सा अभी तक पूरी दुनिया के वैज्ञानिकों के लिए रहस्य बना हुआ है।लगभग एक हजार करोड़ रुपए की लागत वाले इस मिशन को जीएसएलवी एमके-3 रॉकेट से लॉन्च किया जाएगा। इस स्पेसक्राफ्ट का वजन 3800 किलो है। इसके साथ ही विक्रम और प्रज्ञान भी जा रहे हैं, जिसे लेकर लोगों में दिलचस्पी बनी हुई है कि वे आखिर क्या हैं। दरअसल, स्पेसक्राफ्ट में 3 मॉड्यूल ऑर्बिटर, लैंडर (विक्रम) और रोवर (प्रज्ञान) होंगे। बताते चलें कि रोवर ऐसे वाहन को कहते हैं जो किसी अन्य ग्रह या खगोलीय वस्तु पर घूमने-फिरने की क्षमता रखता हो।भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के जनक डॉ. विक्रम साराभाई के नाम पर चंद्रयान 2 के लैंडर का नाम विक्रम रखा गया है। यह चंद्रमा पर सॉफ्ट लैंडिंग का काम करेगा। यह एक चंद्र दिवस तक काम तक काम करेगा, जो पृथ्वी पर लगभग 14 दिन के बराबर है। विक्रम लैंडर का वजन 1,471 किलोग्राम है। यह बैंगलोर के पास बयालू में आईडीएसएन के साथ-साथ ही ऑर्बिटर और रोवर के साथ संवाद कर सकता है। यह तीन पेलोड, मून बाउंड हाइपरसेंसिटिव आयनोस्फीयर और एटमॉस्फियर , चंद्र के सरफेस थर्मो-फिजिकल एक्सपेरिमेंट  और लूनर सिस्मिक एक्टिविटी  का पता लगाने के लिए इंस्ट्रूमेंट ले जाएगा।प्रज्ञान रोवर छह पहियों वाला रोबोट वाहन है, जिसका वजन 27 किग्रा है और यह 50 वॉट की शक्ति उत्पन्न कर सकता है। यह 500 मीटर तक की यात्रा कर सकता है और केवल लैंडर के साथ संचार कर सकता है। यह अल्फा पार्टिकल एक्स-रे स्पेक्ट्रोमीटर  पेलोड ले जाएगा।यह पेलोड रॉक-फार्मिंग के लिए जरूरी सभी प्रमुख तत्वों जैसे मैग्नीशियम, एल्यूमीनियम, सिलिका, कैल्शियम, सोडियम, टाइटेनियम, आयरन और कुछ अन्य जैसे येट्रियम, स्ट्रोंटियम और जिरकोनियम जैसे तत्वों का पता लगाने के लिए एक्स-रे फ्लोरोसेंस स्पेक्ट्रोस्कोपी का उपयोग करता है। यह लेजर इंड्यूस्ड ब्रेकडाउन स्पेक्ट्रोस्कोप  भी ले जाएगा, जिसका उपयोग लैंडिंग साइट के पास प्रचुर मात्रा में मौजूद तत्वों की पहचान करने और उनका पत लगाने के लिए किया जाएगा।चंद्रयान छह या सात सितंबर को चंद्रमा के दक्षिण ध्रुव के पास लैंड करेगा। इसके साथ ही भारत चांद की सतह पर लैंडिंग करने वाला चौथा देश बन जाएगा। इससे पहले अमेरिका, रूस और चीन अपने यानों को चांद की सतह पर भेज चुके हैं। इजरायल ने भी अप्रैल 2019 में चंद्रमा पर मिशन भेजने की कोशिश की थी, लेकिन वह फेल हो गया था।इजरायल के चंद्र अंतरिक्ष यान बेरेशीट का संपर्क पृथ्वी पर स्थित नियंत्रण कक्ष टूट गया और दुर्घटनाग्रस्त हो गया।इस दुर्घटना के साथ ही पहला निजी वित्त पोषित चन्द्र मिशन इतिहास रचने में नाकामयाब हो गया। चंद्रमा पर उतरने के अंतिम चरण में अंतरिक्ष यान का संपर्क पृथ्वी पर स्थित नियंत्रण कक्ष से टूट गया।


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