महामीडिया न्यूज सर्विस
अब मर्जी से किराया नहीं बढ़ा सकेगा मकान मालिक

अब मर्जी से किराया नहीं बढ़ा सकेगा मकान मालिक

Admin Chandel | पोस्ट किया गया 42 दिन 19 मिनट पूर्व
12/07/2019
नई दिल्ली [ महामीडिया ] मकान मालिक और किरायएदार के झगड़ों को निपटाने के लिए केंद्र सरकार ने नए कानून की तैयारी कर ली है। इसके बाद अब ना सिर्फ मकान मालिक पर कानून का पहरा बल्कि किराएदार की मनमानी पर भी शिकंजा कसेगा। नए कानून के लिए बनाए गए ड्राफ्ट के तहत यह प्रावधान है कि मकान मालिक किराये की अवधि के दौरान अपनी मर्जी से किराया नहीं बढ़ा सकेंगे। वहीं मकान मालिक को घर के जायजा, रिपेयर से जुड़े काम या किसी दूसरे मकसद से आने के लिए 24 घंटों का लिखित नोटिस एडवांस में देना होगा।इसके अलावा अब किरायेदार और मकान मालिक के बीच विवाद का निपटारा 60 दिन के भीतर हो जाएगा। इसके लिए राज्य और केंद्र शासित प्रदेश अपने-अपने यहां स्पेशल रेंट कोर्ट अथवा रेंट ट्रिब्यूनल स्थापित करेंगे। केंद्र के नए कानून के प्रस्ताव के मुताबिक मकान मालिक या भूस्वामी किराये की समीक्षा करने से पहले तीन महीने का लिखित नोटिस देगा। प्रस्तावित कानून जिला कलेक्टर को किराया प्राधिकार के तौर पर नियुक्त करने और निर्धारित समय सीमा से अधिक वक्त तक रहने पर भारी जुर्माना लगाए जाने की भी हिमायत करता है। इसके मुताबिक यदि किरायेदार निर्धारित समय सीमा से अधिक वक्त तक रहता है तो उसे दो महीने तक दोगुना किराया और उसके बाद चार गुना किराया अदा करना होगा। किरायेदार द्वारा अग्रिम राशि के तौर पर मकान मालिक के पास जमा की जाने वाली राशि अधिकतम दो महीने का किराया होगी।केंद्रीय आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय ने परामर्श के लिए "द मॉडल टेनेंसी एक्ट, 2019" का मसौदा सार्वजनिक किया है। इसमें कहा गया है कि मकान मालिक और किरायेदार को किरायानामा  की एक प्रति जिला किराया प्राधिकरण को सौंपनी होगी, जिसके पास भूस्वामी या किरायेदार के अनुरोध पर किराये की समीक्षा करने या उसे तय करने की शक्तियां होंगी। इसमें कहा गया है कि भूमि के "राज्य सूची" का विषय होने के चलते इस कानून को स्वीकार करने के लिए राज्य स्वतंत्र होंगे। हालांकि, राज्यों को स्पेशल रेंट कोर्ट और रेंट ट्रिब्यूनल गठित करने की जरूरत होगी।

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