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गुरु के प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करने का पर्व है 'गुरु पूर्णिमा'

गुरु के प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करने का पर्व है 'गुरु पूर्णिमा'

Admin Chandel | पोस्ट किया गया 95 दिन 8 घंटे 56 सेकंड पूर्व
14/07/2019
भोपाल (महामीडिया) 16 जुलाई को गुरु पूर्णिमा है। हमारी संस्कृति में गुरु को ईश्वर के तुल्य माना गया है। वेद, उपनिषद और पुराणों में भी वेद व्यास जी को समस्त मानव जाति का गुरु माना गया है। गुरु के प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करने का पर्व है गुरु पूर्णिमा। हमें अपने जीवन का अर्थ और सही मार्गदर्शन हमारे गुरु ने ही दिया है। गुरु ने ही हमारे जीवन का सृजन किया है, इसीलिए गुरु को ब्रह्मा कहा गया है। इस दिन बहुत से मठों और आश्रमों में लोग ब्रह्मलीन संतों की मूर्ति या समाधी या उनकी पादुका का धूप, दीप, पुष्प, अक्षत, चंदन, नैवेद्य आदि से विधिवत पूजन करते हैं। गुरु की महिमा अपरंपार है। गुरु के बिना ज्ञान की प्राप्ति नहीं हो सकती। गुरु पूर्णिमा के दिन सुबह स्नान ध्यान करके भगवान विष्णु, शिवजी की पूजा करने बाद गुरु बृहस्पति, महर्षि वेदव्यास की पूजा करें। इसके बाद इस मंत्र का उच्चारण करें- 'गुरुपरंपरासिद्धयर्थं व्यासपूजां करिष्ये'। अब अपने गुरु की पूजा करें। यदि गुरु सामने ही हैं तो सबसे पहले उनके चरण धोएं. उन्हें तिलक लगाएं और फूल अर्पण करें। उन्हें भोजन कराएं। नए वस्त्र एवं धन देकर उनसे आशीर्वाद ग्रहण करें। गुरु पूर्णिमा के दिन चन्द्रग्रहण लग रहा है। इसलिए सूतक काल से पहले गुरु की पूजा कर लेंवे। 

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