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कारगिल विजय दिवस की 20वीं वर्षगांठ

कारगिल विजय दिवस की 20वीं वर्षगांठ

Admin Chandel | पोस्ट किया गया 58 दिन 9 घंटे पूर्व
26/07/2019
भोपाल (महामीडिया) हम लोग तभी अपने घरों में आराम से सुरक्षित होकर सो पाते हैं क्योंकि सीमा पर हमारे बहादुर सैनिक जागकर, पूरी सतर्कता के साथ पहरा देते हैं। 26 जुलाई, 2019 को, पूरा देश पाकिस्तानी सैनिकों की घुसपैठ के खिलाफ ऑपरेशन विजय में भारतीय सशस्त्र बलों की सफलता की 20वीं वर्षगांठ मना रहा है।
इस वार्षिकोत्सव को देश भर में हर साल कारगिल विजय दिवस के रूप में मनाया जाता है, जिसमें उन बहादुर सैनिकों के प्रति सम्मान और आभार व्यक्त किया जाता है, जिन्होंने पाकिस्तानी सेना द्वारा धोखे से कब्जा किये गये हमारे सभी ठिकानों को फिर से छुड़ाने के लिए अपना सर्वस्व लगा दिया था।
1999 में इसी दिन, भारत ने सफलतापूर्वक ऊँची चोटियों पर स्थित चौकियों पर दुबारा अपनी कमान संभल ली थी, जिन पर पाकिस्तान ने कब्जा कर लिया था। कारगिल युद्ध 60 से अधिक दिनों तक लड़ा गया था, जिसमे दोनों तरफ के कई लोगों ने अपनी जान गंवा दी थी। रिपोर्ट के अनुसार, इस युद्ध में भारत की ओर से 527 लोगों की मौत हुई।
इसमें कोई संदेह नहीं है की कारगिल युद्ध अपनी तरह का एकमात्र युद्ध हैं जिसमे दो परमाणु-सक्षम देशों ने एक-दूसरे का सामना किया था। अंत में, पाकिस्तान के तत्कालीन प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने दोनों देशों के बीच संघर्ष को पूर्ण रूप से समाप्त करने के लिए अमेरिका से राजनयिक रूप से हस्तक्षेप करने की गुहार लगाई थी।   
हाल में हुई घटनाओं को देखकर लगता हैं कि पाकिस्तान ने कारगिल युद्ध से कोई सबक नहीं सीखा है और वह अभी भी यह मानता है कि भारतीय क्षेत्रों में तनाव पैदा करके वो कश्मीर मुद्दे का अंतर्राष्ट्रीयकरण कर पायेगा जिससे उसे इस मुद्दे को तेजी से हल करने में मदद मिलेगी। अपनी धरती पर सक्रिय आतंकवादियों के प्रशिक्षण शिविर को नियंत्रित करने के बजाय पाकिस्तान कश्मीर मुद्दे का अंतर्राष्ट्रीयकरण करने में ही लगा रहता  है।
लेकिन अपनी हालिया अमेरिका यात्रा में, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने चौंकाने वाला खुलासा किया कि पाकिस्तान की धरती पर अभी भी 30,000 से 40,000 आतंकवादी हैं जो अफगानिस्तान और कश्मीर में लड़ रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी पिछली सरकार ने इस मुद्दे पर अमेरिका को धोखा दिया है। तत्कालीन नवाज शरीफ सरकार पर आरोप लगाते हुए, इमरान ने कहा की 'पाकिस्तान ने कभी भी अमेरिका को ज़मीनी हक़ीक़त नहीं बताई।'
इमरान को इस बात के लिए श्रेय मिलना चाहिए की कम से कम उन्होंने यह स्वीकार तो किया कि पाकिस्तान अपनी धरती पर आतंकवादियों को पनाह देता है। इमरान का यह कथन उनके देश के पारंपरिक रुख के विपरीत है कि पाकितान केवल कश्मीरी आतंकवादियों को मनोबल और कूटनीतिक समर्थन प्रदान करता है। दूसरी ओर, भारत ने हमेशा ही कहा है कि कश्मीर में आतंकवाद, सीमा पार की मदद से ही चल रहा हैं। युद्ध कभी भी आतंकवाद को समाप्त करने का हल नहीं हो सकता है। हालांकि, कारगिल दिवस की 20 वीं वर्षगांठ पर, हमें अपने बहादुर सैनिकों को श्रद्धांजलि देनी चाहिए।

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