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नाम में क्या रखा है? फिर क्यों विजय गोयल दिल्ली का नाम बदलकर डिल्ली करना चाहते हैं?

नाम में क्या रखा है? फिर क्यों विजय गोयल दिल्ली का नाम बदलकर डिल्ली करना चाहते हैं?

Admin Chandel | पोस्ट किया गया 132 दिन 19 घंटे पूर्व
26/07/2019
भोपाल (महामीडिया) राज्यसभा सांसद विजय गोयल राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के नाम को बदलकर डिल्ली करना चाहते हैं - जैसा कि हम इसे हिंदी में उच्चारित करते हैं। वास्तव में, वह चाहते हैं कि दिल्ली के अंग्रेजी नाम की स्पेलिंग बदलकर डिल्ली कर दी जाए। बुधवार को उन्होंने उच्च सदन के प्रश्नकाल सत्र के दौरान अपनी यह मांग उठाई, जिस पर केंद्रीय गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय ने कहा कि अगर सरकार को इस संबंध में कोई प्रस्ताव मिलता है तो वह इस विषय पर विचार करेंगे।
बाद में, मीडियाकर्मियों को संबोधित करते हुए, गोयल ने कहा कि डेल्ही नाम में दिल्ली की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत की झलक नहीं मिलती है, इसलिए अंग्रेजी में भी इस शहर के नाम की स्पेलिंग दिल्ली ही होनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि दिल्ली को इंद्रप्रस्थ या हस्तिनापुरा के नाम से बदलने की मांग पहले भी उठाई गई थी, लेकिन अगर दिल्ली नाम में बदलाव नहीं करना हैं तो कम से कम इसे सही ढंग से लिखा जाना चाहिए।
लेकिन यह तर्क समझ से परे है। दिल्ली के नाम को डिल्ली में बदलकर या इसे सही तरीके से वर्तनी करके लोगों को क्या मिल जाएगा? क्या दिल्ली के नागरिकों को बुनियादी सुविधाओं के नाम पर अधिक सुविधाएं मिलने लगेगी, या उन्हें भ्रष्टाचार, लालफीताशाही, यातायात-जाम, खराब सड़कों, बिजली-कटौती, जल संकट आदि से राहत मिल जायेगी? वास्तव में, इस तरह के किसी भी कदम से सिर्फ नागरिकों पर अधिक बोझ ही बढ़ेगा ।
पिछले सात दशकों में, हमने दो दर्जन से अधिक शहरों के नाम सिर्फ संस्कृति, ऐतिहासिक कारणों  या मातृभाषाओं के प्रति लगाव के नाम पर बदल दिये हैं। उन शहरों की सूची देखें जिनके नाम अतीत में बदल दिए गए हैं - प्रयागराज (इलाहाबाद), वाराणसी  (काशी), वड़ोदरा (बड़ौदा), बेलागावी (बेलगाम), मुंबई (बॉम्बे), बेंगलुरु (बैंगलोर), चेन्नई (मद्रास) (कोलकाता) ), पुणे (पूना), तिरुवनंतपुरम (त्रिवेंद्रम) आदि इस सूची में और भी नाम शामिल हो सकते हैं। यह कभी ना ख़त्म होने वाली मांग है। ब्रिटिशों ने दो शताब्दियों तक हमारे देश पर राज किया और उन्होंने अपने उच्चारण के अनुसार कई शहरों के नाम में बदल दिये थे ।
ऐतिहासिक और पौराणिक धर्मग्रंथों के अनुसार, इंद्रप्रस्थ? पांडवों की राजधानी  थी, जिसे अक्सर दिल्ली के रूप में जाना जाता रहा है। जिसकी कई अलग-अलग राजधानी, शहर रहे हैं। जिन्हें किला राय पिथौरा, सिरी, तुगलकाबाद-आदिलाबाद, फिरोजाबाद, दीनपनाह, शाहजहांनाबाद और नई दिल्ली कहा जाता है।
हाल ही में, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इलाहाबाद का नाम बदलकर प्रयागराज कर दिया, जो कि इसका प्राचीन नाम माना जाता है। यह बेहतर होगा कि हमारे नेता शहरों का नाम सिर्फ संस्कृति, ऐतिहासिक विरासत, या मातृभाषा के प्रति प्रेम के लगाव के नाम पर बदलने की बजाय, वहां रहने वाले लोगों के विकास और बेहतरी के बारे में सोचें ।

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