महामीडिया न्यूज सर्विस
ग्लोबल टाइगर डे

ग्लोबल टाइगर डे

admin | पोस्ट किया गया 129 दिन 17 घंटे पूर्व
29/07/2019
भोपाल (महामीडिया) आज 29 जुलाई को पूरी दुनिया 'इंटरनेशनल टाइगर डे' मना रही है। जिसे ग्लोबल टाइगर डे के रूप में भी जाना जाता है।  बाघ संरक्षण के काम को प्रोत्साहित करने और उनकी घटती संख्या के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए 2010 में रूस के सेंट पीटर्सबर्ग में आयोजित एक शिखर सम्मेलन में अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस मनाने की घोषणा हुई थी।
एक सदी से भी कम समय पहले लगभग 100,000 बाघ एशिया के जंगलों में घुमा करते थे, लेकिन आज की सच्चाई यह है कि केवल 4000 बाघ ही अपने प्राकृतिक प्रवास में जीवित बचे हैं।
वर्तमान में भारत लगभग 3000 बाघों का घर है, चार साल पहले की गई जनगणना से बाघों की जो संख्या प्राप्त हुयी थी,  उसमे 33% की उछाल आई है।
2018 में चौथे दौर की बाघ जनगणना के अनुसार, वर्तमान में भारत में 2967 बाघ हैं।  2014 में यह आंकड़ा 2226 था। यह केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा संरक्षण की पहल के कारण ही संभव हो पाया है कि पिछले चार वर्षों में लगभग 741 बाघों की वृद्धि हुई है। 2006 में जब वैज्ञानिक तरीके से बाघों की गिनती का काम शुरू हुआ था, तब उनकी संख्या दोगुनी हो गई थी. तब बाघों की संख्या 1411 थी ।
2006 से ही हर चार साल में एक बार भारत सरकार ऑल इंडिया टाइगर एस्टीमेशन की रिपोर्ट पेश करती है।एस्टीमेशन के तीन चरण 2006, 2010 और 2014 में पहले ही पूरे हो चुके हैं। पिछली जनगणना के अनुसार, कर्नाटक सबसे ज्यादा 406 बाघों का घर था, उसके बाद  उत्तराखंड में 340 और मध्य प्रदेश में 308 बाघ थे ।
भारत ने 1973 में प्रोजेक्ट टाइगर लॉन्च किया था, हालांकि उसके काफी साल बाद 2006 में राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) की स्थापना की गई। सरिस्का और पन्ना टाइगर रिजर्व में बाघों के संख्या में भरी कमी देखी गयी थी जिसके बाद यह फैसला किया गया।  
बाघों के अवैध शिकार और उसके शरीर के भागों की अवैध तस्करी जैसे गंभीर मुद्दों से निपटने के अलावा, बाघ संरक्षण के संबंध में उनके प्राकृतिक क्षेत्र को बढ़ाना और उन्हें संरक्षित रखना सबसे बड़ी चुनौती है , जिस पर तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता है।
संरक्षित क्षेत्रों में अतिक्रमण, वनों की कटाई और बफर ज़ोन का खेतों में तब्दील होना बाघों के अस्तित्व के लिए खतरनाक बनता जा रहा है। इसके परिणामस्वरूप टाइगर रिजर्व्स का दायरा भी लगातार छोटा होता जा रहा है।
देश की सबसे ज्यादा बाघों की आबादी महाराष्ट्र में नहीं होने के बावजूद भी, यहाँ इस साल अब तक सबसे ज्यादा बाघों की मौतें हुई हैं और उसके शरीर के भागों को तस्करों द्वारा जप्त किया गया है। आज भारत में बाघों की संख्या एक दशक के आंकड़ों की तुलना में  दोगुना हैं। हालाँकि भारत की इन बड़ी बिल्लियों के लिए खतरे अभी भी हमेशा की तरह बने हुए  हैं। 
वर्ल्ड वाइल्डलाइफ फंड-इंडिया के मुताबिक, 2016 में अवैध शिकार की घटनाएं अपने चरम पर थी । वाइल्डलाइफ प्रोटेक्शन सोसाइटी ऑफ इंडिया के अनुसार अवैध शिकार से लगभग 50 बाघों की मौत हुई जो 15 वर्षों में सबसे अधिक थी । 
जिसने भी अंग्रेजी साहित्य का अध्ययन किया होगा वो प्रख्यात ब्रिटिश कवि विलियम ब्लेक की बाघ पर लिखी उनकी प्रसिद्ध कविता के बारे में जरूर जानता होगा । इस कविता में उन्होंने बाघ के शरीर के एक-एक भाग का और उसके भयानक स्वरूप का बहुत खूबसूरती से वर्णन किया है।  
विलियम ब्लेक एक महान कवि होने के साथ चित्रकार और दूरदर्शी भी थे उन्होंने सामाजिक व्यवस्था और पुरुषों के मन में परिवर्तन लाने का महत्वपूर्ण काम किया। ब्लेक ने इस कविता को 1774 में लिखा था, तब इस पृथ्वी पर लगभग 100 हजार बाघ प्राकृतिक रूप से विचरण करते थे।  इस कविता की दूसरी पंक्ति में, कवि लिखते हैं "फॉरेस्ट ऑफ द नाइट" जो इस बाघ का घर है।  उस समय पृथ्वी पर मुश्किल से एक अरब लोग थे और तब कोई वैश्विक बाघ दिवस समारोह भी नहीं मनाया जाता था।
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