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राष्ट्रपति ट्रम्प का 'प्रस्ताव' और पक्षपाती पाकिस्तानी मीडिया

राष्ट्रपति ट्रम्प का 'प्रस्ताव' और पक्षपाती पाकिस्तानी मीडिया

admin | पोस्ट किया गया 44 दिन 22 घंटे 11 सेकंड पूर्व
02/08/2019
भोपाल (महामीडिया) अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दुबारा वही किया। कश्मीर मुद्दे पर मध्यस्थता करने की पहल को भारत द्वारा अस्वीकार करने के बावजूद, ट्रम्प ने गुरुवार को एक बार फिर कश्मीर विवाद सुलझाने में मध्यस्थ की भूमिका निभाने के अपने प्रस्ताव को दोहराया। पिछले महीने ही पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान की अमेरिका यात्रा के दौरान, राष्ट्रपति ट्रम्प ने एक टिप्पणी करके पूरी दुनिया में (विशेष रूप से पाक और भारतीय मीडिया में) सुर्खियां बना ली थीं कि भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनसे पाकिस्तान के साथ कश्मीर विवाद को सुलझाने में मदद करने के लिए कहा था। जब उनके इस बयान से भारत में खूब आलोचनाओं का सामना करना पड़ा, तो ट्रम्प के एक सहायक को ही सामने आकर इसका खंडन करना पड़ा कि अमेरिकी राष्ट्रपति "मनगढ़ंत बातें नहीं करते हैं"।
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने शुक्रवार को अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोंम्पियो को स्पष्ट किया कि कश्मीर मुद्दे पर कोई भी चर्चा केवल पाकिस्तान के साथ ही होगी और केवल द्विपक्षीय रूप से होगी। जयशंकर, आसियान-भारत मंत्रिस्तीय बैठक, नौवें पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन में विदेश मंत्रियों की बैठक, 26वें आसियान क्षेत्रीय मंच और 10वें मेकोंग गंगा निगम मंत्रिस्तरीय बैठक समेत कई सम्मेलनों में भाग लेने के लिए थाईलैंड की राजधानी, बैंकॉक आये हैं।
कश्मीर मुद्दे पर भारत और पाकिस्तान के बीच मध्यस्थता पर राष्ट्रपति ट्रम्प के विवादास्पद बयानों के बाद भारत-अमेरिका के दो शीर्ष अधिकारियों के बीच यह पहली आधिकारिक बैठक है।
भारत ने इस बात से इनकार किया कि प्रधानमंत्री मोदी ने कभी ट्रम्प से मध्यस्थता करने के लिए कहा था और भारत का पक्ष सभी जानते हैं कि पाकिस्तान के साथ सभी मुद्दों को द्विपक्षीय रूप से तभी हल किया जा सकता है जब पाकिस्तान, आतंकवाद और सीमा पार से गोलीबारी का समर्थन करना बंद कर देगा ।
भारत यह कहता रहा है कि कश्मीर में आतंकवाद के लिए पाकिस्तान ही जिम्मेदार है और उसने अतीत में कई सबूत भी पेश किए हैं। दूसरी ओर, पाकिस्तान और उनकी पक्षपाती मीडिया ने दक्षिण एशिया में आतंकवाद के लिए भारत को दोषी ठहराने में कोई कसर नहीं छोड़ी है।
पाकिस्तान के एक प्रमुख समाचार पत्र डॉन ने अपने संपादकीय में लिखा है कि "पाकिस्तान को ट्रम्प के प्रस्ताव को मान लेना चाहिए। कश्मीर मुद्दा सात दशकों से पाकिस्तान और भारत के बीच तीखी तनातनी का मुद्दा रहा है, फिर भी भारतीय अपने हठी रवैये के कारण मुख्य मुद्दे को समझने को तैयार नहीं हैं। आउट-ऑफ-द-बॉक्स समाधानों को अपनाने से हो सकता है कि पुराने घाव फिर भर जाएं।"
अखबार ने आगे लिखते हुए कहा कि, "जबकि नई दिल्ली लगातार दक्षिण एशिया में उग्रवाद को बढ़ावा देता रहता है। घाटी में मानवाधिकारों की स्थिति को देखते हुए ऐसा लग रहा है जैसे वो अंधे हो गए हैं। पाकिस्तानी मीडिया को यह भी समझना चाहिए कि अभी हाल ही में उनके प्रधानमंत्री इमरान खान ने अपने बयान में खुलासा किया था कि पाकिस्तान की धरती पर अभी भी 30,000 से 40,000 आतंकवादी हैं जो अफगानिस्तान और कश्मीर में लड़े थे।"
अख़बार ने आगे कहते हुए यह भी लिखा कि, "अमेरिका, दुनिया की एकमात्र महाशक्ति है और भारत खुद को मजबूत समझने और अपनी स्वतंत्र विदेश नीति के नाटक से अमेरिका को नाराज करने का जोखिम नहीं उठा सकता है।" पाकिस्तान और उसकी पक्षपाती मीडिया का भारत के आंतरिक मामले में कोई दखल नहीं है। कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है और हमें अपनी किसी समस्या को हल करने के लिए किसी भी ?महाशक्ति? की कोई आवश्यकता नहीं है।
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