महामीडिया न्यूज सर्विस
कश्मीर मुद्दा और विश्व मीडिया

कश्मीर मुद्दा और विश्व मीडिया

Admin Chandel | पोस्ट किया गया 98 दिन 16 घंटे पूर्व
05/08/2019
भोपाल (महामीडिया) भारतीय संविधान का अनुच्छेद 370, जो जम्मू-कश्मीर राज्य को विशेष दर्जा प्रदान करता है, केंद्र सरकार द्वारा राष्ट्रपति के आदेश के माध्यम से हटा दिया गया है। केंद्रीय गृह मंत्री ने सोमवार को संसद को यह सूचित किया। अमित शाह ने राज्यसभा में एक प्रस्ताव पारित किया जिसमें कहा गया था कि धारा 370 के सभी खंड अब जम्मू-कश्मीर पर लागू नहीं होंगे। पूरे देश ने इस अभूतपूर्व घोषणा की सराहना की है।
राष्ट्रपति ने संविधान (जम्मू कश्मीर में लागू) आदेश 2019 जारी किया जो तत्काल प्रभाव से लागू गया, यह जम्मू कश्मीर में लागू आदेश 1954 का स्थान लेगा। इसमें कहा गया है कि संविधान के सभी प्रावधान जम्मू कश्मीर राज्य में लागू होंगे।
इसमें कोई संदेह नहीं है कि पिछले कुछ दिनों में ऐसे संकेत मिले थे कि केंद्र सरकार इसी तरह का कोई ऐतिहासिक कदम उठा सकती है क्योंकि कश्मीर को अभूतपूर्व सुरक्षा घेरे में तब्दील कर दिया गया था, जिससे धारा 144 के बाद लोगों के इकठठा होने में भी पाबन्दी हैं। कश्मीर के शीर्ष नेताओं को कथित तौर पर घर में नजरबंद कर दिया गया है। साथ ही इंटरनेट सेवा और सभी शैक्षणिक संस्थान भी बंद हैं।
हालाँकि, अंतराष्ट्रीय मीडिया, विशेष रूप से पाकिस्तान और अमेरिका के समाचार पत्रों ने कश्मीर में पिछले कुछ दिनों से चल रहे घटनाक्रम पर अपनी पक्षपाती राय जाहिर की। आमतौर पर पक्षपाती रहने वाला पाकिस्तानी मीडिया ने कश्मीर की वर्तमान स्थिति को 'एक युद्ध की तरह' चित्रित किया है। जबकि अमेरिकी मीडिया ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प से इस मामले में जल्द से जल्द हस्तक्षेप करने का आग्रह किया।
पाकिस्तान के प्रमुख अंग्रेजी अखबार "द नेशन" ने अपने पहले पन्ने पर एक बैनर हेडलाइन लगाते हुए कहा, "भारतीय आक्रमण को कुचलने के लिए तैयार"। अखबार ने इसके आगे बढ़ते हुए अपने पहले पन्ने पर एक विज्ञापन प्रकाशित कर पाक लोगों से कश्मीरी युवकों के लिए प्रार्थना और समर्थन करने की अपील की। एक अन्य प्रमुख अंग्रेजी अखबार "द डॉन" ने लिखा की, कश्मीर को लेकर तनाव बढ़ रहा हैं,  इस मुद्दे की गंभीरता को देखते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प, पाकिस्तान और भारत के बीच मध्यस्थता कर सकते हैं।
माइकल कुगेलमैन, जो वाशिंगटन के वुडरो विल्सन सेंटर में दक्षिण एशियाई मामलों के एक अधिकारी हैं,  ने कहा कि वर्तमान स्थिति में दो परमाणु-सशस्त्र राष्ट्रों के बीच तनाव बढ़ने की संभावना है। अमेरिकी मीडिया ने रविवार को कश्मीर मुद्दे पर प्रकाश डालते हुए कहा की, भारत सरकार द्वारा पर्यटकों और हिंदू तीर्थयात्रियों की निकासी और घाटी में सैन्य टुकड़ियों को बढ़ाने के आदेश के बाद पाकिस्तान और भारत के बीच ताजा तनाव बढ़ गया है।
वाशिंगटन पोस्ट की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि भाजपा शासित सरकार, उस भारतीय संवैधानिक प्रावधान में बदल करने की योजना बना रही है जो गैर कश्मीरी को कश्मीर में जमीन खरीदने से रोकती है, इस तरह की कार्यवाही ने कश्मीर में भय की स्थिति उत्पन्न कर दी है।
न्यूयॉर्क टाइम्स ने भी इस पर एक रिपोर्ट को प्रकाशित किया, जिसमें कहा गया है कि हाल के दिनों में, ?भारत ने कश्मीर में कम से कम 10,000 सैनिकों को तैनात किया है, मीडिया सूत्रों के अनुसार और 25,000 को दुनिया के इस सबसे अधिक सैन्यीकृत क्षेत्र में भेजा जा सकता है। वाशिंगटन पोस्ट और न्यूयॉर्क टाइम्स ने अपनी रिपोर्ट्स में बताया कि हाल की हुई घटनाये में वृद्धि राष्ट्रपति ट्रम्प द्वारा कश्मीर मुद्दे को हल करने के लिए मध्यस्थता की पेशकश के बाद देखी गयी हैं।  अमेरिकी मीडिया ने बताया कि कई अन्य सरकारों ने भी यात्रा की सलाह जारी की हैं, और अपने-अपने नागरिकों को भारत अधिकृत कश्मीर को छोड़ने का आग्रह किया हैं ।
यहां यह भी ध्यान देने वाली बात है कि, पाकिस्तान ने रविवार को कश्मीर मुद्दे पर इस्लामिक सहयोग संगठन (IOC) के हस्तक्षेप की मांग की। पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने ओआईसी के महासचिव,  डॉ यूसेफ बिन अहमद अल ओथाइमेन के साथ टेलीफोन पर बातचीत की और ताज़ा स्थिति पर चर्चा की थी ।
अन्य देशों या उनके मीडिया का भारत के किसी भी आंतरिक मामले में कोई अधिकार नहीं है। भारत हमेशा ही सुनिश्चित करता रहा है कि कश्मीर उसका अभिन्न अंग है और उसे अपने आंतरिक मुद्दे से निपटाने के लिए किसी भी अन्य देशों के समर्थन की आवश्यकता नहीं है। कश्मीर पर एक ऐतिहासिक फैसला लेते हुए, भारत ने सोमवार को दुनिया को दिखा दिया है।

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