महामीडिया न्यूज सर्विस
370 खत्म होने से भारत-पाक बैठक की शर्तें भी बदल जाएंगी

370 खत्म होने से भारत-पाक बैठक की शर्तें भी बदल जाएंगी

Admin Chandel | पोस्ट किया गया 42 दिन 9 घंटे पूर्व
06/08/2019
नई दिल्‍ली (महामीडिया) पीएम नरेंद्र मोदी के जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 को खत्म करने के  फैसले ने राजनीतिक और कूटनीतिक मोर्चे पर एकसाथ कई चीजों को बदलकर रख दिया है।अब जब जम्‍मू-कश्‍मीर का भारतीय संघ के साथ पूरी तरह से एकीकरण हो गया है ऐसी स्थिति में भारत और पाकिस्‍तान के बीच भविष्‍य में होने वाली आधिकारिक बातचीत की शर्तें एकदम बदल जाएंगी। अब भारत की कोई मजबूरी नहीं रहेगी कि कश्‍मीर को बातचीत की सूची में शामिल किया जाए। इसके अलावा, लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा मिलने से भारत इस क्षेत्र को और अधिक रणनीतिक महत्‍व दे पाएगा। यह क्षेत्र पाकिस्‍तान के नियंत्रण वाले गिलगित-बालटिस्‍तान और चीन के नियंत्रण वाले अक्‍साई चिन से सटा हुआ है। इस लिहाज से यह क्षेत्र भारत की सुरक्षा की दृष्टि से बहुत अहम है। 
पूर्व विदेश सचिव श्‍याम सरन ने पहले भी कहा था कि जम्‍मू-कश्‍मीर को विशेष राज्‍य का दर्जा देकर भारत ने चुपचाप मान लिया कि जम्‍मू-कश्‍मीर पर 'विवाद' है। लेकिन अब, भारत पाकिस्‍तान के साथ बातचीत में कश्‍मीर के मुद्दा को शामिल नहीं करेगा। पूर्व विदेश सचिव का कहना है कि इससे भारत-पाकिस्‍तान के भविष्‍य के संबंधों पर व्‍यापक असर पड़ेगा। सरन कहते हैं, 'रणनीति बनाते समय भारत ने पाकिस्‍तान की प्रतिक्रिया को भी ध्‍यान में रखा होगा। पाक अधिकृत कश्‍मीर और गिलगित-बालटिस्‍तान पर हमारा दावा अभी भी है।' साल 1994 में संसद से पास प्रस्‍ताव के अनुसार यह भारत के आधिकारिक दावे का हिस्‍सा भी है। यह अस्‍पष्‍ट है कि क्‍या भारत इस पर चर्चा करना चाहेगा। अभी तक भारत का फोकस पाकिस्‍तान प्रायोजित आतंकवाद पर रहा है, जबकि पाकिस्‍तान का जोर कश्‍मीर पर। 
पाकिस्‍तान संयुक्‍त राष्‍ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्‍तावों को लागू करने से बचता रहा है, इसे देखते हुए भारतीय सूत्रों का कहना है कि उक्‍त प्रस्‍ताव की पहली दो शर्तों को लागू करने से पाकिस्‍तान ने इनकार कर दिया है। इस लिहाज से बाकी के प्रस्‍ताव को लागू करना बेमानी है। 
जिस तरह से पाकिस्‍तान पर अफगानिस्‍तान में कार्रवाई करने का दबाव बढ़ रहा है पश्चिमी जगत से भारत पर जोर पड़ सकता था कि वह कश्‍मीर मसले पर पाकिस्‍तान से बातचीत शुरू करे। खासकर जब अमेरिका में ट्रंप जैसा राष्‍ट्रपति हो। लेकिन सोमवार को लिए गए इस फैसले से यह परिस्थिति भी टल गई। 

और ख़बरें >

समाचार