महामीडिया न्यूज सर्विस
भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक "रक्षाबंधन"

भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक "रक्षाबंधन"

admin | पोस्ट किया गया 36 दिन 4 घंटे पूर्व
13/08/2019
भोपाल (महामीडिया) रक्षाबन्धन हिंदुओं का प्रसिद्ध त्योहार है जो प्रतिवर्ष श्रावण मास की पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है। श्रावण में मनाये जाने के कारण इसे श्रावणी भी कहते हैं। रक्षाबंधन का त्योहार 15 अगस्त को मनाया जाएगा। रक्षाबंधन पर इस बार भद्राकाल नहीं रहेगा। इसलिये बहनें भाइयों की कलाई पर सूर्योदय से लेकर सूर्यास्त के बीच किसी भी समय पर राखी बांध सकती हैं। 
शुभ महूर्त-
रक्षा बंधन तिथि - 15 अगस्त 2019, गुरुवार
पूर्णिमा तिथि आरंभ 14 अगस्त -15:45 
पूर्णिमा तिथि समाप्त 15 अगस्त- 17:58
भद्रा समाप्त- सूर्योदय से पहले
रक्षाबंधन भाई बहन के रिश्ते का प्रसिद्ध त्योहार है, रक्षा का मतलब सुरक्षा और बंधन का मतलब बाध्य है। रक्षाबन्धन में राखी या रक्षासूत्र का सबसे अधिक महत्त्व है। बरसों से चला आ रहा यह त्यौहार आज भी बेहद हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। रक्षाबंधन पर बहनें भाइयों की दाहिनी कलाई में राखी बांधती हैं, उनका तिलक करती हैं और उनसे अपनी रक्षा का संकल्प लेती हैं। इस दिन भाई अपनी बहन को उसके दायित्वों का वचन अपने ऊपर लेते है।
रक्षा बंधन का पर्व विशेष रुप से भावनाओं और संवेदनाओं का पर्व है। एक ऎसा बंधन जो दो जनों को स्नेह की धागे से बांध ले। मान्यता है कि सावन माह की पूर्णिमा के दिन शुभ मुहूर्त में बाँधा गया रक्षासूत्र का प्रभाव बहुत शक्तिशाली होता है, बहनो द्वारा अपनी भाइयों की कलाई में बाँधी गयी इस राखी के प्रभाव से भाइयों की हर संकटो से निश्चय ही रक्षा होती है, उन्हें देवताओं का आशीर्वाद मिलता है। विभिन्न युगो, कालखंडो में भी इस पर्व के मनाये जाने के बारे में पता चलता है।
एक अन्य प्रसंग मृत्यु के देवता भगवान यम और यमुना नदी का भी मिलता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार यमराज और यमुना जी भगवान सूर्य देव की संतान है। यमुना जी बहन के रूप में अपने भाई यम से स्नेह पाना चाहती थी। कहते है इसीलिए यमुना जी ने एक बार यमराज की कलाई पर धागा बांधा था। भगवान यम, यमुना की इस बात से इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने यमुना की रक्षा का वचन देने के साथ ही यमुना को अमरता का वरदान भी दे दिया। यमराज जी ने अपनी बहन यमुना को यह भी वचन दिया कि जो भी बहन सावन की पूर्णिमा के दिन अपने भाई को शुभ मुहूर्त में रक्षा सूत्र बांधेगी और भाई अपनी बहन की मदद के लिए वचन देगा, उसका कल्याण होगा, वह उसे लंबी आयु का वरदान देंगे, उससे अकाल मृत्यु दूर रहेगी। इसीलिए मान्यता है कि जो भी बहन रक्षाबंधन के दिन अपने भाई को प्रेम पूर्वक राखी बाँधती है उसकी सभी आपदाओं से रक्षा होती है। 
विष्णु पुराण के एक और प्रसंग में कहा गया है कि श्रावण की पूर्णिमा के दिन भगवान विष्णु ने हयग्रीव के रूप में अवतार लेकर समस्त वेदों को ब्रह्मा जी के लिये फिर से प्राप्त किया था। शास्त्रों में हयग्रीव को विद्या और बुद्धि का प्रतीक माना जाता है। 
रक्षाबंधन के बारे में हिन्दुओं के प्रमुख ग्रन्थ महाभारत में भी उल्लेख है। महाभारत के युद्द से पहले कौरवो की बड़ी सेना देखकर जब धर्मराज युधिष्ठिर ने भगवान कृष्ण से पूछा कि मैं कौरवो की विशाल सेना पर कैसे विजय प्राप्त कर सकता हूँ, सभी संकटों को कैसे पार कर सकता हूँ तब भगवान कृष्ण ने धर्मराज युधिष्ठिर को उनकी तथा उनकी सेना की रक्षा, युद्द में विजय के लिये रक्षाबन्धन का पर्व मनाने की सलाह दी। भगवान श्रीकृष्ण ने कहा कि राखी के इस रेशमी धागे, इस रक्षा सूत्र में वह शक्ति है जिससे आपकी सेना विजयी होती तथा आप लोगो की सभी आपत्तियों से रक्षा होगी। महाभारत में द्रौपदी द्वारा भगवान कृष्ण को राखी बाँधने के भी कई उल्लेख मिलते हैं। 
महाभारत में ही रक्षाबन्धन से सम्बन्धित कृष्ण और द्रौपदी की एक कथा के अनुसार जब भगवान श्री कृष्ण ने सुदर्शन चक्र से शिशुपाल का वध किया तब उनकी तर्जनी में चोट आ गई और खून बहने लगा। यह देखकर द्रौपदी ने उसी समय बिना समय गँवाये अपनी साड़ी को फाड़कर श्रीकृष्ण जी की उँगली पर पट्टी बाँध दी। वह श्रावण मास की पूर्णिमा का ही दिन था। द्रोपदी के इसी स्नेह को देखकर वासुदेव ने द्रोपदी को उसकी रक्षा का वचन दिया। यह सर्व विदित है कि श्रीकृष्ण जी ने द्रोपदी के इस उपकार का बदला बाद में भरी सभा में दुःशासन द्वारा द्रोपदी के चीरहरण के समय उनकी साड़ी को बढ़ाकर चुकाया। और महाभारत के युध्द में भी पांडवो का ही साथ दिया मान्यता है। की एक दूसरे की रक्षा और सहयोग की भावना यहीं से रक्षाबन्धन के पर्व में प्रारम्भ हुई थी।
इस दिन बहनों में इस दिन गजब का उल्लास देखने को मिलता है। अपने भाई के हाथ पर राखी बांधे बिना अन्न तक ग्रहण नहीं करती। वे प्रात: साफ सफाई कर घर में सजावट करती हैं। स्नान-ध्यान कर अगरबत्ती व धूप जलाती हैं एवं स्वादिष्ट व्यंजंन बनाती हैं। फिर फल, फूल, मिठाई, रोली, चावल और राखी एक थाल में रखकर उसे सजाती हैं। इसके बाद शुभ मुहूर्त के समय अपने भाई की लंबी उम्र और मुसीबतों से भाई की रक्षा की कामना करते हुए दायें हाथ पर राखी बांधती हैं। बदले में भाई भी अपनी बहन को हर संभव सुरक्षा के वचन के साथ-साथ उपहार देता है।
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