महामीडिया न्यूज सर्विस
सुप्रीम कोर्ट ने कश्मीर मुद्दे पर हस्तक्षेप करने से इनकार किया

सुप्रीम कोर्ट ने कश्मीर मुद्दे पर हस्तक्षेप करने से इनकार किया

Admin Chandel | पोस्ट किया गया 90 दिन 3 घंटे पूर्व
14/08/2019
भापाल (महामीडिया) सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को जम्मू-कश्मीर मुद्दे पर दखल देने तथा पाबन्दियों को हटाए जाने की मांग वाली एक याचिका पर आदेश पारित करने इनकार करते हुए कहा कि राज्य में स्थिति संवेदनशील है और केंद्र सरकार को राज्य में स्थिति को सामान्य करने के लिए समय चाहिए।  जस्टिस अरुण मिश्रा, जस्टिस एम आर शाह और जस्टिस अजय रस्तोगी की पीठ ने जम्मू और कश्मीर के मुद्दे की सवेदनशीलता को समझते हुए कहा की  रातोंरात कुछ भी नहीं किया जा सकता है इसीलिए केंद्र सरकार को  सामान्य स्थिति बहाल करने के लिए कुछ समय दिया जाना चाहिए।
लोगों की आजादी से घूमने और संचार पर रोक लगाना, राज्य में हिंसा की घटना को रोकने के लिए आवश्यक था क्योंकि शरारतीतत्वों द्वारा लोगों को उकसाने की कोशिश की जाती,  इसीलिए इस क्षेत्र के लोगों को इंटरनेट और टेलीफोनिक संचार के बिना रहने को मजबूर होना पड़ रहा हैं।  
प्रशासन ने ऐसा कदम उठाया ताकि अफवाहों, फर्जी खबरों और संदेशों को फ़ैलने से रोका जा सके। जो लोग घाटी में मानवाधिकारों के उल्लंघन की बात कर रहे हैं, उन्हें यह जरूर पता होना चाहिए कि जम्मू-कश्मीर में इस तरह का प्रतिबंध, पहली बार नहीं लगाया हैं और २०१६ में हिजबुल मुजाहिदीन के आतंकवादी बुरहान वानी की हत्या के बाद भी ऐसी ही स्थिति हो गयी थी। और उस समय अलगाववादी गुट, हुर्रियत कॉन्फ्रेंस ने हफ्तों की हड़ताल का आह्वान किया था । घाटी में प्रतिबंध हमेशा से रहा हैं।
राज्य के गवर्नर सत्यपाल मलिक ने ठीक ही कहा कि टेलीफोन और इंटरनेट दुश्मनों के हथियार हैं- जो लोग शांति में खलल डालना चाहते हैं, जो युवा पीढ़ी को उकसाना, गुमराह करना और उन्हें लामबंद करके, पाकिस्तान के इशारों पर उनका इस्तेमाल किसी उपकरण के रूप में करते हैं। गवर्नर ने प्रतिबंधों पर आगे कहा कि किसी को यह तय करना होगा कि क्या अधिक महत्वपूर्ण है।  नागरिकों का जीवन कहीं अधिक महत्वपूर्ण है। फोन या इंटरनेट पर बात करना और संवाद करना समाज का जीवन नहीं है। समाज का जीवन यह है कि वह शांति से रहे।
हम सभी चाहते हैं कि कश्मीर में स्थिति जल्द ही वापस सामान्य हो जाए । जैसा कि दुनिया ने कश्मीर में स्थिति के सामान्य होने का इंतजार करने और दूर से देखने का फैसला किया है। अंतरराष्ट्रीय शासन प्रणाली की इस अच्छी पहल से यह समझ में आता हैं कि वे इस समय इस मुद्दे पर ध्यान केंद्रित नहीं करना चाहते हैं। । इससे कश्मीर मुद्दे पर वैश्विक अस्थिरता पैदा करने की पाकिस्तान की उम्मीदों पर पानी फिर गया है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने पाकिस्तान से कहा है कि वह कश्मीर पर चर्चा की अनुमति नहीं देगा। इस्लामिक देशों ने भी चुप्पी बनाई हुई है। लेकिन सरकार को जैसे ही मुमकिन हो सबसे पहले निषेधात्मक आदेशों को बहाल करके नए चुनाव कराने पर ज़ोर देना चाहिए और कश्मीर को दुबारा राज्य का दर्जा दिया जाना चाहिए ।
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