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श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का महत्व

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का महत्व

admin | पोस्ट किया गया 25 दिन 23 घंटे पूर्व
23/08/2019
भोपाल (महामीडिया) देश में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का त्योहार बड़ी धूमधाम से मनाया जा रहा है। भगवान श्रीहरि विष्णु के सर्वकलामयि अवतार, यशोदा-नन्द के लाला और देवकी-वसुदेव के पुत्र कन्हैया का जन्म रोहिणी नक्षत्र में भाद्रपद माह की अष्टमी तिथि को मध्य रात्रि वृष लग्न में हुआ था। इस दिन भक्तजन उपवास रखते हैं, मंगल गीत गाते हैं और नंद के आनंद भयो जय कन्हैया लाल की गाने के साथ भगवान का जन्म करते है। 
क्यों मनाया जाता है जन्माष्टमी का पर्व
मामा कंस के अत्याचारों से परेशान होकर, उनके विनाश के लिए, भगवान कृष्ण ने भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को जन्म लिया था। कृष्ण भगवान का जन्म मथुरा में आधी रात को हुआ था। मथुरा भगवान की जन्म-भूमि है, इसलिए इस त्यौहार को मथुरा में बहुत ही ज़्यादा धूम-धाम के साथ मनाया जाता है। शास्त्रों के अनुसार, 5 हज़ार 243 साल पहले भगवान कृष्ण का जन्म मथुरा की भूमि पर हुआ था।
कहा जाता है कि जब कृष्ण का जन्म हुआ था तब कारागार के सभी पहरेदार सो गए थे देवकी-वसुदेव की बेड़ियाँ स्वत: ही खुल गई थीं और कारागार के दरवाजे स्वत: ही खुल गये थे। फिर आकाशवाणी ने वसुदेव को बताया कि वे अभी कृष्ण को गोकुल पहँचा दें। तत्पश्चात् कृष्ण के पिता वसुदेव कृष्ण को सूप में सुलाकर वर्षा ऋतु में उफनती हुई नदी पार कर के गोकुल ले गए और नंद के यहाँ छोड़ आए। सभी लोग इसे कृष्ण का ही चमत्कार मानते हैं। वर्ना कंस ने तो कृष्ण के सात भाइयों को जन्म होते ही मार दिया था। फिर कृष्ण ने बचपन से युवावस्था तक कंस सहित अनेक राक्षसों का वध किया और अपने भक्तों का उद्धार किया। यही कारण है कि लोग उन्हें ईश्वर का अवतार मानकर उनकी पूजा- अर्चना एवं भक्ति करते हैं। इस प्रकार कृष्ण जन्माष्टमी का त्योहार आनंद, सांप्रदायिक सद्भाव और अनेकता में एकता का त्योहार है।
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का महत्व -
मान्यता है कि भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की कृपा पाने के लिए श्रीकृष्ण जन्माष्टमी मनाई जाती है। क्योंकि भगवान कृष्ण को भगवान विष्णु के ही अवतार हैं। इसके अलावा भगवान कृष्ण का ध्यान, व्रत और पूजा  करने से भक्तों को उनकी विशेष कृपा प्राप्ति होती है। भगवान कृष्ण के बड़े भाई बलराम या बलदाऊ जी का पालन पोषण भी नंदबाबा के घर में हुआ। वासुदेव जी की एक पत्नी थीं रोहिणी जिनके पुत्र बलदाऊ जी महाराज थे। कंस ने देवकी को वासुदेव के साथ जेल में डाला तो रोहिणी को नंद बाबा के यहां भेज दिया गया। वैष्णव पंथ को मानने वाले हिन्दु धर्म के उपासक भगवान कृष्ण को अपना आराध्य मानते हैं ऐसे में आराध्य को याद करने लिए भी प्रति वर्ष लोग उनका जन्मोत्सव मनाते हैं।
जन्माष्टमी के दिन बहुत सारे लोग व्रत भी रखते हैं। बाल गोपाल का जन्म रात में 12 बजे के बाद होगा। सबसे पहले आप दूध से उसके बाद दही, फिर घी, फिर शहद से स्नान कराने के बाद गंगाजल से अभिषेक करें, ऐसा शास्त्रों में माना जाता है। इसके बाद भगवान को श्रद्धा भाव से नए वस्त्र पहनाने चाहिए। कृष्णजी को आसान पर बैठाकर उनका श्रृंगार करना चाहिए। भगवान को झुला पर बिठाकर झुला झुलाएं और नंद के आनंद भयो जय कन्हैया लाल की का गाएं। फिर निम्न मंत्र से पुष्पांजलि अर्पण करें- 
'प्रणमे देव जननी त्वया जातस्तु वामन:।
वसुदेवात तथा कृष्णो नमस्तुभ्यं नमो नम:।
सुपुत्रार्घ्यं प्रदत्तं में गृहाणेमं नमोऽस्तुते।'
अंत में प्रसाद वितरण कर भजन-कीर्तन करते हुए रात जागरण करें।
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