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रिज़र्व बैंक की पूंजी का उपयोग सावधानी से करने की आवश्यकता है!

रिज़र्व बैंक की पूंजी का उपयोग सावधानी से करने की आवश्यकता है!

Admin Chandel | पोस्ट किया गया 75 दिन 13 घंटे पूर्व
28/08/2019
भोपाल (महामीडिया) रिजर्व बैंक के बोर्ड ने सोमवार को सरकार को 1,76,051 करोड़ रुपये की बड़ी रकम हस्तांतरित करने का फैसला किया, जिसमें पिछले कई वर्षों से जमा की गई आपात निधि से 52,637 करोड़ रुपये की राशि शामिल है। रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर बिमल जालान की अगुआई वाली कमेटी की सिफारिशों को स्वीकार करते हुए सरकार को सरप्लस फंड हस्तांतरित करना तय किया है।  
रिजर्व बैंक के केंद्रीय बोर्ड ने समिति की सभी सिफारिशों को स्वीकार किया है । यहां यह भी ध्यान दिया जाना चाहिए कि आरबीआई के दो पूर्व गवर्नर-रघु राजन और उर्जित पटेल ने इस कदम का विरोध किया था और दोनों ने इन्हीं मुद्दों को लेकर ही प्रतिष्ठित पद से इस्तीफा दे दिया था।
अर्थशास्त्रियों का कहना है कि यह नैतिक रूप से अस्वीकार्य है कि कोई भी सरकार इस धन के एक हिस्स्से का भी इस्तेमाल अपने खर्चों को पूरा करने के लिए मदद ले ।   लेकिन वित्तीय संकट और मंदी की आशंका के मद्देनज़र, केंद्र सरकार को वह मिल ही गया जिसका वह लंबे समय से हासिल करने की कोशिश कर रही थी। बिमल जालान की कमेटी की सिफारिशों को मानते हुए भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा इस चालू वित्त वर्ष में सरप्लस फंड का हस्तांतरित होना सरकार के लिए एक बहुत राहत की बात हैं।  पिछले वित्त वर्ष में रिजर्व बैंक  द्वारा केंद्र सरकार को 28,000 करोड़ रुपये का अंतरिम लाभांश, जो पिछले वित्त वर्ष में पहले ही दिए जा चूका  हैं शामिल नहीं है, और इस चालू वित्त वर्ष में 1,48,051 करोड़ रुपये ट्रांसफर किया जाएगा, इससे आयकर के संग्रह में आई कमी को काफी हद तक दूर कर सकता है।
यह तर्क भी दिया जा सकता है कि रिजर्व बैंक एक स्वाधीन व्यापारिक संस्था है, जिसका मालिक पूरी तरह से भारत सरकार ही होती है, इसलिए संस्था के लाभ पर उसका पूर्ण अधिकार है, तो इसमें कुछ गलत नहीं हैं। फिर भी, यह दुर्भाग्यपूर्ण है क्योंकि ये भंडार अंतरजनपदीय इक्विटी दर्शाता  हैं जो कई वर्षों में इकठ्ठा होता  हैं।
भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने चेतावनी देते हुए कहा  कि सरकार को अतिरिक्त रिजर्व के हस्तांतरण से केंद्रीय बैंक की रेटिंग में कमी आ सकती  है। उन्होंने कहा कि रेटिंग जो अभी  'एएए? हैं, इसके घटने से आरबीआई से उधार लेना महंगा हो जाएगा और पूरी अर्थव्यवस्था पर इसका असर होगा। हालाँकि, उनका यह भी कहना था कि यह इस बात पर निर्भर करेगा कि सरकार इन निधियों का उपयोग कैसे करती है।
नवंबर 2018 में सरकार ने इस मुद्दे पर काम करते हुए रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर बिमल जालान के अनुसार एक समिति का गठन किया था। उस समिति ने अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की, और हालिया हस्तांतरण को उनकी  सिफारिशों के आधार पर किया गया है।
हमें उम्मीद है कि सरकार इन फंडों का  उपयोग सावधानीपूर्वक करेगी!
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