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नरसिंहपुर में ढाई सौ साल से ज्यादा प्राचीन हैं भगवान गणेश की श्वेतार्क प्रतिमा

नरसिंहपुर में ढाई सौ साल से ज्यादा प्राचीन हैं भगवान गणेश की श्वेतार्क प्रतिमा

Admin Chandel | पोस्ट किया गया 98 दिन 2 घंटे पूर्व
02/09/2019
नरसिंहपुर [ महामीडिया ] नगर के किसानी वार्ड स्थित श्रीदेव गणेश देवस्थानम में विराजित भगवान गणेश की पूर्वामुखी श्वेतार्क प्रतिमा ढाई सौ साल से ज्यादा प्राचीन है। सुखासन में बैठे गणेशजी की यह प्रतिमा इसलिए भी दुर्लभ है क्योंकि दक्षिणावृत्त सूंढ़ है। वर्ष 1997 में मंदिर बनने के बाद यहां विभिन्न् स्थानों से भगवान गणेश की पूजन करने श्रद्धालु पहुंचते हैं। सिद्धपीठ के संस्थापक पं. कृष्णकुमार पुरोहित द्वारा स्वप्रेरणा से मंदिर निर्माण कराने के साथ ही यहां गणेश चतुर्थी पर 11 दिवसीय अनुष्ठान की जो शुरुआत तीन दशक पूर्व की गई थी वह अब भी जारी हैं, जिसमें नियमित अभिषेक पूजन के साथ ही अनुष्ठान के अंतिम दिन भगवान गणेश के 1020 नामों का स्मरण कर आहुति यज्ञ किया जाता है।गणेश भक्तों के लिए यह सिद्धपीठ किसी तीर्थ से कम नहीं है, प्रतिमा की प्राचीनता को लेकर यह किवदंती भी है कि सन 1763 के करीब भगवान गणेश की यह दुर्लभ प्रतिमा जिले की पहचान भगवान नरसिंह के मंदिर में विराजित करने लाई गई थी जिसे खुले स्थान पर खेत में रखा गया था। जिसे वर्ष 1997 में पं. कृष्णकुमार पुरोहित ने देखा तो उन्होंने विधि विधान से प्रतिमा को पूजन कराने के साथ ही मंदिर बनाकर विराजित किया। राज्य के गजेटियर में भी नरसिंह मंदिर के महत्व के साथ ही गणेश प्रतिमा से जुड़े तथ्यों को रेखांकित किया जाना बताया जाता है।

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