महामीडिया न्यूज सर्विस
भारतीय संस्कृति के संवाहक डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन

भारतीय संस्कृति के संवाहक डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन

Admin Chandel | पोस्ट किया गया 95 दिन 5 घंटे पूर्व
05/09/2019
नई दिल्ली (महामीडिया) हर साल 5 सितंबर को देशभर में शिक्षक दिवस मनाया जाता है। हर बच्चे का अपने शिक्षक के साथ एक अनोखा रिश्ता होता है। कहते हैं कि माता-पिता के बाद आपका शिक्षक ही होता है जो आपकी सफलता को देख खुद भी आपके साथ सातवें आसमान में उड़ने लगता है। आपके अध्यापक ही आपको जिंदगी जीने का तरीका सिखाता हैं और आने वाली परेशानियों का सामना करने के लिए तैयार करते हैं।  शिक्षक और छात्र का रिश्ता ऐसा है जो सालों से चलता आ रहा है, जहां एक ओर गुरु अपने शिष्य को हर घड़ी में डटकर खड़े रहना सिखाता है, तो वहीं शिष्य भी अपना अंगूठा काटकर देने से भी पीछे नहीं हटता है। 
5 सितंबर 1888 को भारत के पूर्व उप राष्ट्रपति और दूसरे राष्ट्रपति डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन का जन्म  दक्षिण भारत के तिरुत्तनि स्थान में हुआ था। उसी उपलक्ष्य में देश में इस दिन शिक्षक दिवस मनाया जाता है। एक बार उनके कुछ विद्यार्थियों ने उनसे कहा था कि वो लोग उनका जन्मदिन मनाना चाहते हैं, इस पर उन्होंने कहा था कि अलग से जन्मदिन मनाने की जगह अगर इस दिन को शिक्षक दिवस के तौर पर मनाओ तो मुझे ज्यादा खुशी होगी। तभी से इस दिन को शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाने लगा। सर्वपल्ली राधाकृष्णन भारतीय संस्कृति के संवाहक, प्रख्यात शिक्षाविद् और महान दार्शनिक थे। डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन को 27 बार नोबेल पुरस्कार के लिए नामांकन मिला था। साल 1954 में डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन को भारत रत्न से सम्मानित किया गया। 
इस दिन सभी स्टूडेंट्स अपने-अपने तरीके से अपने शिक्षक को सम्मान देते हैं। कई स्कूलों में बच्चे अपने शिक्षक के लिए सांस्कृतिक कार्यक्रम करते हैं, उन्हें तोहफे देते हैं, कार्ड्स देते हैं और कुछ तो केक भी काटते हैं। वहीं इस दिन देशभर के मशहूर शिक्षकों को राष्ट्रीय पुरस्कार से भी नवाजा जाता है। यह पुरस्कार हर साल देश के राष्ट्रपति द्वारा दिया जाता है।
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