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चंद्रयान -2: निराश होने की जरूरत नहीं है, हमें आप पर गर्व है!

चंद्रयान -2: निराश होने की जरूरत नहीं है, हमें आप पर गर्व है!

Admin Chandel | पोस्ट किया गया 8 दिन 20 घंटे पूर्व
07/09/2019
भोपाल [ महामीडिया ]भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के चंद्रयान -2 मिशन को उस समय झटका लगा, जब विक्रम-लैंडर ने शनिवार सुबह 2.1 किलोमीटर की ऊंचाई पर चंद्रमा की सतह पर सॉफ्ट-लैंडिंग करने का प्रयास करते हुए ग्राउंड स्टेशनों के साथ अपना संपर्क खो दिया। बेंगलुरु के मिशन सेंटर में ख़ामोशी को चीरते हुए मिशन के विफल होने की खबर आई। विक्रम-लैंडर से संपर्क टूटने के कई कारण हो सकते हैं जिसमे सेंसर का फेल होना, ऑन-बोर्ड सॉफ्टवेयर गड़बड़ी आना और गति में नियंत्रण ना रख पाना । इसरो के पूर्व अध्यक्ष जी माधवन नायर ने कहा कि चंद्रयान -2 ने अपने मिशन के उद्देश्यों में से 95 प्रतिशत हो हासिल कर लिया है, गौरतलब है कि  लैंडर ?विक्रम' का चांद पर  उतरने की असफल कोशिश में स्टेशन से संपर्क टूट गया था।  इस मिशन की शुरुआत 22 जुलाई को चंद्रयान -2 अंतरिक्ष यान के सफल  प्रक्षेपण के साथ चरणबद्ध तरीके से एक के बाद एक मील का पत्थर हासिल किया। इसके विक्रम मॉड्यूल का नाम महान वैज्ञानिक स्वर्गीय विक्रम साराभाई पर रखा गया था।  लैंडिंग मॉड्यूल, जो चाँद पर मिट्टी के विभिन्न परीक्षणों को करने के लिए माना जाता था, ने योजनाबद्ध तरीके से ?रफ ब्रेकिंग? पूरा किया और 2.1 किमी की ऊंचाई तक अच्छी तरह से ?फाइन ब्रेकिंग? के चरणों में सफलतापूर्वक प्रवेश किया। लेकिन चंद्रयान -2 मिशन के आखिरी और सबसे महत्वपूर्ण ?सॉफ्ट लैंडिंग? चरण के दौरान, गड़बड़ी आने से चंद्र लैंडर (विक्रम) और ऑर्बिटर के बीच संचार लिंक टूट गया, जिससे तनावपूर्ण स्थिति उत्पन्न हो गयी और मिशन के भाग्य पर कुछ संदेह गहरा गया ।
मोदी चांद पर ?सॉफ्ट लैंडिंग? का सीधा नजारा देखने के लिए बेंगलुरु स्थित इसरो के टेलीमेट्री ट्रैकिंग एंड कमांड नेटवर्क (ISTRAC) केंद्र पहुंचे थे, और आगंतुकों की गैलरी में बैठे हुए थे। बाद में, इसरो के वैज्ञानिकों को संबोधित करते हुए, प्रधानमंत्री मोदी ने कहा ?जीवन में उतार-चढ़ाव आते हैं। यह कोई छोटी उपलब्धि नहीं है। राष्ट्र को आप पर गर्व है। मेरी तरफ से आप सभी को बहुत बधाई. आपने देश की और विज्ञान की बहुत बड़ी सेवा की है. उन्होंने आगे कहा की ?भारत को हमारे वैज्ञानिकों पर गर्व है! उन्होंने अपना सर्वश्रेष्ठ दिया है और हमेशा भारत को गौरवान्वित किया है। उन्होंने इसरो को "सफलताओं का विश्वकोश" कहा और कहा कि भले ही कुछ रुकावटे आई हैं, लेकिन हमारा हौसला कमजोर नहीं पड़ना चाहिए और 21 वीं सदी में कोई भी बाधा भारत को अपने सपनों और आकांक्षा को साकार करने से नहीं रोक सकती।

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