महामीडिया न्यूज सर्विस
हिन्दी दिवसः 'हिन्दी' भारत माता के माथे की बिंदी

हिन्दी दिवसः 'हिन्दी' भारत माता के माथे की बिंदी

Admin Chandel | पोस्ट किया गया 34 दिन 12 घंटे पूर्व
14/09/2019
भोपाल (महामीडिया) हिंदी विश्व की एक प्रमुख भाषा है एवं भारत की राजभाषा है। यह हिंदुस्तानी भाषा का मानकीकृत रूप है। जिसमें संस्कृत के तत्सम, तद्भव शब्दों का प्रयोग अधिक है। हिंदी भारत की सबसे अधिक बोले जाने वाली व समझने वाली भाषा है। चीनी भाषा के बाद सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा हिंदी ही है। भारत के साथ विश्व के कई देशों में हिंदी भाषा बोली जाती है। विश्व आर्थिक मंच की गणना के अनुसार यह विश्व की 10 शक्तिशाली भाषाओं में से एक है। हिंदी भारत की संपर्क भाषा होने के साथ बहुत सरल रूप से इसे समझा जा सकता है। डॉ रामकुमार चतुर्वेदी के शब्दों में
सहज है, सरल है, मृदुल भाषा हिंदी, 
सही साज संस्कृति बनाकर चले हैं।
हिंदी संवैधानिक रूप से भारत की राजभाषा है। हिंदी राजभाषा तो है, लेकिन राष्ट्रभाषा नहीं। क्योंकि हमारे संविधान में किसी भी भाषा को राष्ट्रभाषा का दर्जा नहीं दिया गया है। 
हिंदी का इतिहास : हिंदी का इतिहास लगभग 1 हजार वर्ष पुराना है। हिंदी भाषा व साहित्य के जानकार अपभ्रंश की अंतिम अवस्था अवहर से हिंदी उद्भव स्वीकार करते हैं। अपभ्रंश की समाप्ति और आधुनिक भारतीय भाषाओं के जन्म काल को संक्रांति काल कहा जा सकता है। हिंदी का स्वरूप शौर सैनी और अर्ध मागधी अपभ्रंशों से विकसित हुआ है।
हिंदी की लिपि: हिंदी की लिपि देवनागरी है। इसे नागरी नाम से भी पुकारा जाता है। देवनागरी में 11स्वर व 33 व्यंजन है। और अनुस्वार, अनुनासिक एवं विसर्ग होता है। इसे बाएं से दाएं तरफ लिखा जाता है। इसमें अधिकांशतः संस्कृत शब्दों का प्रयोग होता है।
व्याकरण : व्याकरण की दृष्टि से हिंदी और उर्दू में काफी समानता है। अन्य भारतीय भाषाओं की तरह हिंदी में भी कर्ता, कर्म, क्रिया वाला वाक्य विन्यास होता है। इसमें दो लिंग होते हैं। स्त्रीलिंग तथा पुल्लिंग। लिंग के साथ में दो वचन होते हैं एकवचन व बहुवचन। विशेषण विशेष्य से पहले लगता है। कारक चिन्हों का भी प्रयोग होता है।
हिंदी बोलने वालों की संख्या : सन 2001 की जनगणना के अनुसार भारत में 42 करोड़ 20 लाख लोगों की मूल भाषा हिंदी है। इसके अलावा पाकिस्तान एवं अन्य देशों में 14 करोड 10 लाख लोगों द्वारा हिंदी भाषा बोली जाती है। भारत में हिंदी विभिन्न भारतीय राज्यों की 14 अधिकारिक भाषा में से एक है। भाषाओं और क्षेत्र की बोलियां उपयोग करने वाले लगभग एक अरब लोगों में से अधिकांश की दूसरी भाषा हिंदी है। भारत के 9 राज हिंदी भाषी राज्य कहे जाते हैं। जिनमें छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, बिहार, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, झारखंड, हरियाणा, दिल्ली। भारत के अतिरिक्त विभिन्न देशों में भी हिंदी भाषा बोली जाती है। जिनमें फिजी, मॉरीशस, नेपाल, संयुक्त अरब अमीरात, दक्षिण अफ्रीका, पाकिस्तान आदि। फरवरी 2019 में अबूधाबी में हिंदी को न्यायालय की तीसरी भाषा के रूप में मान्यता मिली। न्यूजीलैंड में चौथी भाषा के रूप में सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा है। यह लगभग सभी ऐसे राज्यों की सह राज्य भाषा है। जिन की मुख्य भाषा हिंदी है।
हिंदी के नाम एवं परिवार: विभिन्न ऐतिहासिक काल खंडों मैं से भिन्न भिन्न नामों से पुकारा गया देसी भाखा (भाषा), देशनावचन, हिंदवी, रेखता, हिंदुस्तानी, आर्य भाषा, खड़ी बोली, दक्खिनी शब्दों का भी प्रयोग हुआ।
हिंदी यूरोपियन भाषा परिवार के अंतर्गत आती है यह हिंदी रानी शाखा की हिंदी और उप शाखा के अंतर्गत आती है हिंदी आर्य भाषा भाषा है जिसमें जो संस्कृत से उत्पन्न हुई है। उर्दू , कश्मीरी, बंगाली, उड़िया, पंजाबी, रोमनी, मराठी, नेपाली, मैथिली जैसी भाषाएं आर्य भाषाएं हैं।
साहित्य: पृथ्वीराज रासो हिंदी साहित्य की पहली पुस्तक है। भारतेंदु हरिश्चंद्र को आधुनिक हिंदी का पिता माना जाता है।
हिंदी शैलियाँ: 1. उच्च हिंदी  हिंदी का मानकीकृत रूप है। इसकी लिपि देवनागरी है। इसमें संस्कृत शब्दों का प्रयोग भी होता है। इसे शुद्ध हिंदी कहते हैं। यह खड़ी बोली पर आधारित है। यह भारतीय संघ की राजभाषा है।
2. दक्खिनी दक्षिणी शैली मूलतः हिंदी का पूर्व रूप है। इसमें उर्दू के शब्दों की अधिकता रहती है। इसमें फारसी शब्द अपेक्षाकृत कम होते हैं। अरबी शब्द भी कम होते हैं।
3. रेख्ता उर्दू का ही एक रूप है।
4. उर्दू हिंदी का वह रूप है जो देवनागरी के बजाय फारसी,अरबी में लिखा जाता है। हिंदी तथा उर्दू को मिलाकर हिंदुस्तानी भाषा कहा जाता है।
हिंदी के भेद: हिंदी के दो भेद हैं पश्चिमी हिंदी और पूर्वी हिंदी।
हिंदी की बोलियाँ:  हिंदी की प्रमुख बोलियाँ अवधी, ब्रज भाषा, कन्नौजी, बुंदेली, बघेली, भोजपुरी, हरियाणवी, राजस्थानी, छत्तीसगढ़ी, मालवी, नागपुरी, खोरठा, पंच परगनियां, कुमाऊनी मगही, मैथिली आदि।
संपर्क भाषा: भिन्न-भिन्न भाषा भाषियों के मध्य परस्पर विचार आदान-प्रदान करने वाली भाषा  संपर्क भाषा है। अपने भारत में हिंदी संपर्क भाषा है। यह अपने सीमित रूप में, प्रशासनिक भाषा के रूप में भिन्न-भिन्न भाषा भाषियों के बीच संप्रेषण का कार्य करती है। यह सरकार की राजभाषा है। पर व्यवहार में राष्ट्रभाषा है। हिंदी संपूर्ण भारत वासियों को एक सूत्र में पिरोती है। इस प्रकार हिंदी तीन दायित्वों का निर्वहन करती है। राष्ट्रभाषा, राजभाषा और संपर्क भाषा। राष्ट्रभाषा वह होती है जो संपूर्ण राष्ट्र को स्वीकृत हो, जबकि प्रशासनिक कार्यों के व्यवहार में प्रयोग होने वाली भाषा राजभाषा कहलाती है। बहुत से देशों में राष्ट्रभाषा, राजभाषा और संपर्क भाषा एक ही होती है। पर भारत में तीन अलग-अलग रूप में है। जापान, अमेरिका, इंग्लैंड, फ्रांस, जर्मनी देशों में एक ही भाषा का प्रयोग होता है ।
सही शब्द मिले सही भाव मिलते
सही शिल्पकारी रचाकर चलते हैं।
मिले छंद भाषा अलंकृत कराती,
विधा गीत क्यारी लगाकर चले हैं।
हिंदी की प्रगति: बीसवीं सदी के अंतिम दशकों में हिंदी का प्रचार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेजी से हुआ विश्व के 150 विश्वविद्यालयों में तथा सैकड़ों छोटे-बड़े केंद्रों पर शोध कार्य स्तर तक अध्ययन की व्यवस्था हुई। 25 से अधिक पत्र पत्रिकाएं विदेशों में हिंदी में नियमित प्रकाशित हो रही हैं। यूएई में हम एफएम हिंदी का कार्यक्रम प्रसारित कर रहे हैं। बीबीसी, जर्मनी, जापान, चीन के चाइना रेडियो इंटरनेशनल हिंदी सेवा विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं दिसंबर 2016 में विश्व आर्थिक मंच ने 10 सर्वाधिक शक्तिशाली भाषाओं की सूची जारी की। जिसमें हिंदी का नाम उल्लेखनीय था। हिंदी को अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के आयोजन हेतु 11 फरवरी 2008 में विश्व हिंदी सचिवालय की स्थापना हुई। संयुक्त राष्ट्र संघ ने रेडियो प्रसारण हिंदी में करना प्रारंभ किया। हिंदी को संयुक्त राष्ट्र संघ की भाषा बनाने हेतु सरकारें प्रयत्नशील हैं हिंदी सम्मेलनों में बराबर प्रस्ताव पारित हो रहे हैं परिणाम 2018 में संयुक्त राष्ट्र संघ ने साप्ताहिक हिंदी समाचार बुलेटिन प्रारंभ किया। मोबाइल कंपनी ऐसे हैंडसेट बना रही हैं, जो हिंदी और भारतीय भाषाओं मैं सहायता करते हैं। बहुराष्ट्रीय कंपनियों में हिंदी बोलने वाले कर्मचारियों को वरीयता मिल रही है। हिंदी में फिल्में डब हो रही हैं। विज्ञापन हिंदी में पसंद होने लगे हैं। फेसबुक व्हाट्सएप हिंदी से तालमेल बैठा रहे हैं। 2018 में एक रिपोर्ट प्रकाशित हुई थी जिसमें बताया गया कि हिंदी में ट्वीट करना लोकप्रिय हो रहा है। हिंदी में विश्व भाषा बनने के सभी गुण मौजूद हैं। हिंदी राष्ट्रभाषा बने इसकी मांग भारत में तेजी से उठ रही है हिंदी हित तथा हिंदी के प्रचार प्रसार हेतु समय-समय पर विश्व हिंदी सम्मेलनों का आयोजन किया गया। जिसमें  प्रथम नागपुर (1975), दूसरा  पोर्ट लुईस, मॉरीशस (1976),  तीसरा नई दिल्ली (1983),  चतुर्थ पोर्ट लुइस, मॉरीशस (1993), पंचम पोर्ट ऑफ स्पेन, त्रिनिदाद टोबैगो (1996), छठवा  लंदन (1999),  सातवां पारामारिवो, सूरीनाम (2003), आठवां न्यूयॉर्क (2007), नवम जोहानसबर्ग, दक्षिण अफ्रीका (2012), दशम भोपाल (2015),  ग्यारवाँ पोर्ट लुइस, मॉरीशस (2018) ।
विपरीत परिस्थितियों में भी देश में विगत चार-पांच वर्षों से पुनः जागरूकता आनी शुरू हुई है। यह एक सकारात्मक पहलू है। इस दिशा में केंद्रीय सरकार एवं अन्य संस्थाओं ने कुछ सकारात्मक कदम उठाए हैं। केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री ने शिक्षक पात्रता परीक्षा देश कि 20 भारतीय भाषाओं में कराने की घोषणा की है। अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद द्वारा सभी महाविद्यालयों, विश्वविद्यालयों को हिंदी माध्यम में पढ़ने पढ़ाने की छूट दी जा चुकी है। मध्य प्रदेश के अटल बिहारी वाजपेई हिंदी विश्वविद्यालय एवं राजीव गांधी तकनीकी विश्वविद्यालय द्वारा इंजीनियरिंग की पढ़ाई हिंदी में उपलब्ध कराने की व्यवस्था की है। मध्यप्रदेश में चिकित्सा विश्वविद्यालय के निर्णय अनुसार प्रश्न पत्र के उत्तर हिंदी में देने का भी विकल्प है। हिमाचल प्रदेश में भी राज्य सरकार द्वारा प्रशासन के कामकाज हिंदी में करने का आदेश दिया है। विगत वर्ष हरियाणा उच्च न्यायालय द्वारा प्रथम बार हिंदी में लिखित निर्णय दिया। केंद्रीय मंत्री विमानन के निर्देशानुसार उद्घोषणाएं स्थानीय भाषा के बाद हिंदी में होंगी।
हिंदी भारत माता के माथे की बिंदी है। अंत में डॉ राम कुमार चतुर्वेदी की पंक्तियों से मैं अपनी कलम को विराम देती हूँ कि
चमकती रहेगी सदा शुद्ध हिंदी।
चमन आज सपने सजा कर चले हैं।।
रखो मान इसका तजो तुम ना इसको।
बने विश्व भाषा मानकर चलें हैं।।

         - ऊषा भरत चतुर्वेदी

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