महामीडिया न्यूज सर्विस
ग्रीन टी का सेवन सीमित मात्रा में करें और स्वस्थ रहें!

ग्रीन टी का सेवन सीमित मात्रा में करें और स्वस्थ रहें!

Admin Chandel | पोस्ट किया गया 28 दिन 1 घंटे पूर्व
24/09/2019
ग्रीन टी के कई विकल्प बाजार में उपलब्ध हैं। ग्रीन टी का सेवन पेय के रूप में किया जाता है। यह तरल अर्क, कैप्सूल और गोलियों में रूप में  बेचा जाता है और कभी-कभी सामयिक उत्पादों में उपयोग किया जाता है (जिसे त्वचा पर लगाने के उद्देश्य से किया जाता है)। सभी ग्रीन टी और ब्लैक टी एक ही पौधे से मिलती हैं, कैमेलिया साइनेन्सिस, लेकिन दोनों को विभिन्न तरीकों का उपयोग करके तैयार किया जाता हैं। समान्यत ग्रीन टी का उपयोग पेय या आहार अनुपूरक के रूप में किया जाता है। मानसिक स्वास्थ्य को बढ़ाने, पाचन क्रिया में सुधर, सिरदर्द से राहत, वजन घटाने आदि के लिए भी इसका उपयोग किया जाता है।
हालाकि नियमित रूप से ग्रीन टी का सेवन करने से संभावित स्वास्थ्य के प्रभावों पर काफी शोध हुए है, लेकिन इस बात के बहुत कम प्रमाण मिले हैं कि ग्रीन टी पीने से स्वास्थ्य पर कोई खास प्रभाव पड़ता है।
निष्कर्षों को मेडिकल माइक्रोबायोलॉजी जर्नल में प्रकाशित किया गया था, जिसमें शोधकर्ताओं ने पाया कि एपिगैलोकैटेचिन (ईजीसीजी) आमतौर पर इस्तेमाल किये जाने वाले एंटीबायोटिक, अजट्रेनाम की गतिविधि को बहाल कर सकता है। एक्ट्रेकोनम को रोगजनक बैक्टीरिया स्यूडोमोनस एरुगिनोसा के कारण होने वाले संक्रमण का इलाज करने के लिए उपयोग किया जाता है।
पी. एरुगिनोसा गंभीर श्वसन पथ और रक्तप्रवाह के संक्रमण से जुड़ा हुआ है और हाल के वर्षों में  एंटीबायोटिक दवाओं के कई प्रमुख वर्गों के लिए प्रतिरोधी बन गया है। वर्तमान में, पी. एरुगिनोसा से लड़ने के लिए एंटीबायोटिक दवाओं के संयोजन का उपयोग किया जाता है। हालांकि, इन संक्रमणों का इलाज करना मुश्किल हो रहा है, क्योंकि अंतिम पंक्ति की एंटीबायोटिक दवाओं के प्रतिरोध को देखा जा रहा है। ईजीसीजी और एटरेओनम के तालमेल का आकलन करने के लिए, टीम ने इन-विट्रो परीक्षणों का विश्लेषण किया कि वे व्यक्तिगत रूप से और संयोजन में पी. एरुगिनोसा के साथ कैसे परस्पर प्रभाव  डालता है। 
शोधकर्ताओं ने पाया कि एकेट्रोनम और ईजीसीजी का संयोजन पी. एरुगिनोसा की संख्या को कम करने में काफी अधिक प्रभावी था, जबकि  एजेंट के अकेले उपयोग से ।
सरे विश्विद्यालय में पशु चिकित्सा के स्कूल के वरिष्ठ अनुसंधान फेलो डॉ. जोनाथन बेट्स ने बताया की क एंटीमाइोिबयल प्रतिरोध (एएमआर) वैश्विक सावजिनक स्वस्थ के लिए एक गंभीर खतरा है। प्रभावी एंटीबायोटिक के बिना, सफलता के साथ उपचार नहीं किया जा सकता। ईजीसीजी जैसे प्राकृतिक उत्पादों का वर्तमान में लाइसेंस प्राप्त एंटीबायोटिक दवाओं के साथ संयोजन में उपयोग किया जाता है, शायद उनकी प्रभावशीलता और नैदानिक रूप से उपयोगी जीवन काल में सुधार का एक तरीका हो सकता है। विश्व स्वस्थ संगठन ने एंटीबायोटिक-प्रतिरोधी स्यूडोमोनास एरुगिनोसा को मानव स्वास्थ्य के लिए एक महत्वपूर्ण खतरे के रूप में सूचीबद्ध किया है। लेकिन इस नए शोध से पता चलता है कि प्राकृतिक उत्पादों के उपयोग से इसे सफलतापूर्वक समाप्त किया जा सकता है।
पिछले भी  ग्रीन टी पर कई शोध हुए हैं। पर कोई भी निर्णायक सबूत नहीं है कि ग्रीन टी लोगों में कैंसर को रोकने या उसका इलाज करने में मदद करती है। हरी चाय की खपत और पेट के कैंसर और गैर-मेलेनोमा त्वचा कैंसर जैसे कुछ कैंसर के जोखिम के बीच की कड़ी भी नामुनासिब या अपर्याप्त सबूत के कारण स्पष्ट नहीं लगती है।
भारत में, राष्ट्रीय पूरक और एकीकृत स्वास्थ्य केंद्र ग्रीन टी और उसके अर्क पर किये अनुसंधान की फंडिंग करता है, जिसमें लीवर पर चाय के घटकों की उच्च खुराक के प्रभावों का अध्ययन शामिल है, क्या ग्रीन टी में मौजूद पदार्थ से आयरन की अधिकता वाली बीमारी से लड़ने के लिए सहायक हो सकते हैं और एचआईवी पॉजिटिव लोगों में ग्रीन टी के यह पदार्थ सहायक हो सकते है।
हालाकि, विशेषज्ञों की राय यह है भी कि ग्रीन टी, जब पेय के रूप में पी जाती है, तो ऐसा माना जाता है कि सीमित मात्रा में ही इसका सेवन सुरक्षित है। कुछ लोगों में लिवर से सम्बंधित समस्या देखी गई जब उन्होंने गाढ़े ग्रीन टी के अर्क का प्रयोग किया। इसलिए, सीमित मात्रा में इसका सेवन करें और स्वस्थ रहें। 
प्रभाकर पुरंदरे
और ख़बरें >

समाचार

MAHA MEDIA NEWS SERVICES

Sarnath Complex 3rd Floor,
Front of Board Office, Shivaji Nagar, Bhopal
Madhya Pradesh, India

+91 755 4097200-16
Fax : +91 755 4000634

mmns.india@gmail.com
mmns.india@yahoo.in