महामीडिया न्यूज सर्विस
इंदौर की कंपनी ने किया अमेरिकी कंपनी का अधिग्रहण

इंदौर की कंपनी ने किया अमेरिकी कंपनी का अधिग्रहण

Admin Chandel | पोस्ट किया गया 19 दिन 8 घंटे पूर्व
25/09/2019
भोपाल [ महामीडिया ]    इंदौर की आईटी कंपनी इंफोबींस टेक्नोलॉजीस ने अमेरिका की आईटी कंपनी फिलॉसफी का अधिग्रहण कर लिया है। शहर के तीन दोस्तों द्वारा 19 साल पहले स्थापित इंफोबींस दो साल पहले ही आईपीओ लाकर एनएसई में लिस्टेड हुई है और अब मंदी के दौर में विस्तार की बड़ी डील के कारण चर्चा में आ गई है। इंदौर की इस कंपनी ने फिलॉसफी कॉर्पोरेशन नामक जिस आईटी कंपनी का अधिग्रहण किया है, उसका मुख्यालय न्यूयॉर्क में है। उसका कारोबार करीब 10 मिलियन डॉलर का है।अधिग्रहण के साथ इंदौर की इंफोबींस करीब 30 मिलियन डॉलर वाली देश की बड़ी आईटी कंपनियों में शुमार हो चुकी है। इंफोबींस का मुख्यालय फिलहाल इंदौर के क्रिस्टल आईटी पार्क में है। इंदौर में कंपनी के साथ 650 लोग जबकि पुणे में 200 लोग काम कर रहे हैं। इंफोबींस के जर्मनी, दुबई और अमेरिका में पहले ही काम कर रही थी। ताजा अधिग्रहण के साथ इंफोबींस ने अमेरिका आईटी बाजार में अपनी सीधी पकड़ बना ली है।असल में जिस कंपनी का इंदौर की आईटी कंपनी ने अधिग्रहण किया है, उसके ग्राहकों में गूगल, अमेजन, अमेरिकी एक्सप्रेस, कैरेबियन क्रूज जैसी बड़ी वैश्विक कंपनियां शामिल हैं। 10 साल पुरानी अमेरिकी आईटी कंपनी फिलॉसॉफी सूचना तकनीक में नए आईडियाज, प्रोटोटाइप और इनोवेशन के लिए पहचानी जाती रही है। इंफोबींस आईटी सॉफ्टवेयर क्रियान्वयन के क्षेत्र में दक्ष मानी जाती रही है। ताजा अधिग्रहण के साथ इंफोबींस सॉफ्टवेयर के शुरुआत से लेकर अंत की सेवा प्रदान करने वाली कंपनी बन गई है।इंफोबींस की और से अधिग्रहण के सौदे की राशि का खुलासा करने से इनकार कर दिया गया है। हालांकि कंपनी के सह संस्थापक अविनाश सेठी का कहना है कि डील का रकम हम नहीं बता सकते लेकिन यह स्पष्ट है कि अधिग्रहण का सौदा पूरी तरह ऑल इन कैश है। यानी सौदे की घोषणा के साथ ही अमेरिकी कंपनी को पैसा चुका दिया गया है।एनएसई को भी अधिग्रहण की औपचारिक सूचना मंगलवार को दे दी गई है। उल्लेखनीय है कि तीन दोस्तों अविनाश सेठी, सिद्धार्थ सेठी और मितेश वोहरा ने मिलकर इंफोबींस की नींव रखी थी। आनंद बाजार क्षेत्र में कंपनी ने शुरुआत में दफ्तर खोला था। कंपनी के सह संस्थापकों में से दो अब भी इंदौर में रहकर ही काम संभाल रहे हैं जबकि मितेश वोहरा अमेरिका में कंपनी का कामकाज देख रहे हैं।

और ख़बरें >

समाचार